मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम सहारा मिल गया ||
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम सहारा मिल गया ||
उसे मझधार में भी श्याम पक्ष मिल गया
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम ||
हुआ जब जंग घरहाघज पुकारा था घज ने तुमनेको,
करी फिर आपने कहा था कि किरपा सहारा दे दिया घज को,
केवल करहा से घज को भी छुटकारा मिल गया बाबा,
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम ||
हुई लाचार जब द्रोपती फसी जब कोरव के बीच
पुत्तर फिर वो बेहन तुम हो बाबा श्याम रो रो के,
बचाए लाज फिर तुम ने आकर के खुरीठे बाबा,
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम ||
जिसे विस्वाश तुम पर उसे तेरा सहारा है,
कोई भी लाख करे कोशिश वो जीते जी न हारा है,
कहे शिवू हमे वो भी मिल गया बाबा,
|| जिसे तेरी किरपा का श्याम ||
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह भजन श्रीकृष्ण की कृपा और सहारे की महिमा का गुणगान करता है। 'जिसे तेरी कृपा का श्याम सहारा मिल गया' - यह मूल पंक्ति बताती है कि जो व्यक्ति भगवान कृष्ण की कृपा को प्राप्त कर लेता है, वह सांसारिक कठिनाइयों में भी सुरक्षित रहता है। भजन में महाभारत के प्रसंगों - घज (गज) की कथा और द्रौपदी की लाज रक्षा - का उल्लेख करके दर्शाया गया है कि कृष्ण की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। यह भजन विश्वास और समर्पण की शक्ति को प्रदर्शित करता है।
इस भजन का भावार्थ यह है कि भगवान कृष्ण सर्वदा अपने भक्तों के साथ हैं और उन्हें संकट से बचाते हैं। 'मझधार में भी श्याम पक्ष मिल गया' का अर्थ है कि जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी कृष्ण का सहारा मिलता है। द्रौपदी की कथा से यह संदेश मिलता है कि जो पूर्ण विश्वास और भक्ति से पुकारता है, भगवान उसकी लाज रक्षा अवश्य करते हैं। यह भजन हृदय की पीड़ा और प्रार्थना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
यह भजन महाभारत के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर आधारित है। द्रौपदी की चीरहरण से जुड़ी कथा भगवान कृष्ण की लीला और सर्वशक्तिमत्ता का प्रमाण है। उपनिषदों में कहा गया है कि जो आत्मा परमात्मा का शरणागत है, वह सर्व भयों से मुक्त हो जाता है। यह भजन भक्ति योग का सारमर्म प्रस्तुत करता है, जहाँ पूर्ण समर्पण और विश्वास ही मुक्ति का मार्ग है। श्याम नाम स्वयं कृष्ण की सुंदरता और करुणा का प्रतीक है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन और ध्यान चिंता और भय को दूर करता है तथा मन में दृढ़ विश्वास और आशा का संचार करता है। यह भक्ति के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाता है और कृष्ण के प्रति प्रेम गहरा करता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
इस भजन का गायन प्रातःकाल या संध्या के समय सर्वोत्तम है। पवित्र स्थान पर बैठकर, दीपक जलाकर और कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने इसे गाएँ। पद्मासन या सुखासन में बैठें और पूर्ण मनोयोग से भजन गाएँ। मन में कृष्ण की कृपा को अनुभव करते हुए गायन करें। शांत और निर्मल मन से इस भजन का अभ्यास करने से आध्यात्मिक प्रगति होती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस भजन में 'श्याम सहारा' का क्या अर्थ है?
'श्याम सहारा' का अर्थ है कृष्ण का सहायता और संरक्षण। श्याम कृष्ण का नाम है जिसका अर्थ है काले रंग का, और सहारा मतलब सहारा-सहायता। यह भजन बताता है कि कृष्ण की कृपा ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।
इस भजन में द्रौपदी की कथा क्यों दी गई है?
द्रौपदी की चीरहरण की कथा महाभारत का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है। जब द्रौपदी पूर्ण विश्वास से कृष्ण को पुकारती है, तो कृष्ण उसकी लाज की रक्षा करते हैं। यह उदाहरण बताता है कि भक्ति और विश्वास से भगवान अवश्य सहायता करते हैं।
इस भजन को कौन लोग गा सकते हैं?
यह भजन सभी आयु और जाति के भक्त गा सकते हैं। इसमें सार्वभौमिक भक्ति का संदेश है। नियमित रूप से इसे गाने वाले व्यक्ति को आंतरिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है।
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