Katha Maa Chandraghanta Ki

श्री शिवस्तुति (Sri Shivastuti Lyrics in Hindi) - Kailash Rana Shiv Chandra Mouli Shiv Stuti by Nirupama Dey - Bhaktilok

21,030 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

कैलासराणा शिवचंद्रमौळी ।

फणींद्र माथां मुकुटी झळाळी ।

कारुण्यसिंधू भवदुःखहारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १ ||


रवींदु दावानल पूर्ण भाळी ।

स्वतेज नेत्रीं तिमिरौघ जाळी ।

ब्रह्मांडधीशा मदनांतकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २ ||


जटा विभूति उटि चंदनाची ।

कपालमाला प्रित गौतमीची ।

पंचानना विश्वनिवांतकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ३ ||


वैराग्ययोगी शिव शूलपाणी ।

सदा समाधी निजबोधवाणी ।

उमानिवासा त्रिपुरांतकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ४ ||


उदार मेरु पति शैलजेचा ।

श्रीविश्र्वनाथ म्हणती सुरांचा ।

दयानिधीचा गजचर्मधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ५ ||


ब्रह्मादि वंदी अमरादिनाथ ।

भुजंगमाला धरि सोमकांत ।

गंगा शिरीं दोष महा विदारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ६ ||


कर्पूरगौरी गिरिजा विराजे ।

हळाहळें कंठ निळाचि साजे ।

दारिद्र्यदुःखे स्मरणें निवारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ७ ||


स्मशानक्रीडा करितां सुखावे ।

तो देव चूडामणि कोण आहे ।

उदासमूर्ती जटाभस्मधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ८ ||


भूतादिनाथ अरि अंतकाचा ।

तो स्वामी माझा ध्वज शांभवाचा ।

राजा महेश बहुबाहुधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ९ ||


नंदी हराचा हर नंदिकेश ।

श्रीविश्वनाथ म्हणती सुरेश ।

सदाशिव व्यापक तापहारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १० ||


भयानक भीम विक्राळ नग्न ।

लीलाविनोदें करि काम भग्न ।

तो रुद्र विश्वंभर दक्ष मारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ११ ||


इच्छा हराची जग हे विशाळ ।

पाळी रची तो करि ब्रह्मगोळ ।

उमापति भैरव विघ्नहारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १२ ||


भागीरथीतीर सदा पवित्र ।

जेथें असे तारक ब्रह्ममंत्र ।

विश्वेश विश्वंभर त्रिनेत्रधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १३ ||


प्रयाग वेणी सकळा हराच्या ।

पादारविंदी वाहाती हरीच्या ।

मंदाकिनी मंगल मोक्षकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १४ ||


कीर्ती हराची स्तुति बोलवेना ।

कैवल्यदाता मनुजा कळेना ।

एकाग्रनाथ विष अंगिकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १५ ||


सर्वांतरी व्यापक जो नियंता ।

तो प्राणलिंगाजवळी महंता ।

अंकी उमा ते गिरिरुपधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १६ ||


सदा तपस्वी असे कामधेनू ।

सदा सतेज शशिकोटिभानू ।

गौरीपती जो सदा भस्मधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १७ ||


कर्पूरगौर स्मरल्या विसांवा ।

चिंता हरी जो भजकां सदैवा ।

अंती स्वहीत सुवना विचारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १८ ||


विरामकाळीं विकळ शरीर ।

उदास चित्तीं न धरीच धीर ।

चिंतामणी चिंतनें चित्तहारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || १९ ||


सुखावसाने सकळ सुखाची ।

दुःखावसाने टळती जगाचीं ।

देहावसाने धरणी थरारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २० ||


अनुहात शब्द गगनी न माय ।

त्याने निनादें भव शून्य होय ।

कथा निजांगे करुणा कुमारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २१ ||


शांति स्वलीला वदनीं विलासे ।

ब्रह्मांडगोळी असुनी न दिसे ।

भिल्ली भवानी शिव ब्रह्मचारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २२ ||


पीतांबरे मंडित नाभि ज्याची ।

शोभा जडीत वरि किंकिणीची ।

श्रीदेवदत्त दुरितांतकारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २३ ||


जिवाशिवांची जडली समाधी ।

विटला प्रपंची तुटली उपाधी ।

शुद्धस्वरें गर्जति वेद चारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २४ ||


निधानकुंभ भरला अभंग ।

पाहा निजांगें शिव ज्योतिर्लिंग ।

गंभीर धीर सुर चक्रधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २५ ||


मंदार बिल्वें बकुलें सुवासी ।

माला पवित्र वहा शंकरासी ।

काशीपुरी भैरव विश्व तारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २६ ||


जाई जुई चंपक पुष्पजाती ।

शोभे गळां मालतिमाळ हातीं ।

प्रताप सूर्यशरचापधारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २७ ||


अलक्ष्यमुद्रा श्रवणीं प्रकाशे ।

संपूर्ण शोभा वदनीं विकसे ।

नेई सुपंथे भवपैलतीरीं ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २८ ||


नागेशनामा सकळा जिव्हाळा ।

मना जपें रे शिवमंत्रमाळा ।

पंचाक्षरी घ्यान गुहाविहारीं ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || २९ ||


एकांति ये रे गुरुराज स्वामीं ।

चैतन्यरुपीं शिवसौख्य नामीं ।

शिणलों दयाळा बहुसाल भारी ।

तुजवीण शंभो मज कोण तारी || ३० ||


शास्त्राभ्यास नको श्रुति पढुं नको तीर्थासि जाऊं नको ।

योगाभ्यास नको व्रतें मख नको तीव्रें तपें तीं नको ।

काळाचे भय मानसीं धरुं नको दुष्टांस शंकूं नको ।

ज्याचीया स्मरणें पतीत तरती तो शंभु सोडू नको || ३१ ||

*** Singer: Nirupama Dey ****


भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "श्री शिवस्तुति (Sri Shivastuti Lyrics in Hindi) - Kailash Rana Shiv Chandra Mouli Shiv Stuti by Nirupama Dey - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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