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संकटनाशन गणेश स्तोत्र - प्रणम्य शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम (Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

54 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र: विघ्नों का नाशक

भगवान गणेश की महिमा का स्तवन, सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति के लिए अद्भुत साधना.

संकटनाशन गणेश स्तोत्र - प्रणम्य शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम (Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra Lyrics in Hindi) - Bhaktilokसंकटनाशन गणेश स्तोत्र - प्रणम्य शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम (Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra Lyrics in Hindi) - ॥ श्री गणेशायनमः ॥नारद उवाच -प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1॥प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3॥नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: ।न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5॥विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7॥अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस स्तोत्र में भगवान गणेश का गुणगान किया गया है, जो कि 'गौरीपुत्र' और 'विनायक' जैसे नामों से जाने जाते हैं। स्तोत्र की पहली पंक्ति में भक्त प्रार्थना करते हैं कि वे अपने सिर को झुकाकर भगवान गणेश का स्मरण करें, जो भक्तों के वास में निवास करते हैं। यह दर्शाता है कि ज्ञान, ऐश्वर्य और संतोष की प्राप्ति के लिए हमारी आस्था और प्रयास आवश्यक हैं। इसके बाद अलग-अलग प्रकार के गणेश का वर्णन मिलता है, जैसे वक्रतुण्ड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्ष, आदि, जो दर्शाते हैं कि गणेश सभी विघ्नों का नाशक और शुभता का दाता हैं। जब हम इन्हें सहेजते हैं, तब सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।

गणेश की महिमा से ओतप्रोत यह स्तोत्र, भक्त को मनचाहा फल पाने के लिए प्रेरित करता है। विभिन्न प्रकार की इच्छाओं के पूर्ति की कामना की जाती है - शिक्षा, धन, संतान और मोक्ष। जब भक्त इस स्तोत्र का जप करते हैं, तब उन्हें कहा गया है कि वे न केवल इन इच्छाओं की पूर्ति करें, बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी लाएं। यहाँ दी गई प्रक्रिया यह दर्शाती है कि ‘सच्ची श्रद्धा’ और ‘भक्ति’ से किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है। संतोष और धैर्य से प्रक्रिया को अपनाना आवश्यक है, जो हमारे सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन में भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गणेश उपासना में भक्ति मार्ग का महत्व बताया गया है। भक्त श्रवण, जप और ध्यान के माध्यम से भगवान गणेश के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को अभिव्यक्त करते हैं। यह दिखाता है कि भक्ति किसी भी संकट में स्थिरता का आधार है। यह सिद्धांत भी दर्शाया गया है कि भगवान गणेश के अनेक नामों का स्मरण करने से सभी प्रकार के विघ्न दूर हो जाते हैं और भक्त साधारण जीवन की कठिनाइयों से पार हो सकते हैं। संकटनाशन स्तोत्र विभिन्न पठन और जप प्रक्रियाओं को दर्शाता है, जो भक्तों की आध्यात्मिक उन्नति के लिए फायदेमंद होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह स्तोत्र विशेष रूप से नारद पुराण से लिया गया है, जहाँ भगवान श्री गणेश को विघ्न और बाधाओं के नाशक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भगवान गणेश को प्रमुख देवता मानते हुए भक्त उनके द्वारा समस्त कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं। रामायण और महामायाज्ञान में भी गणेश की पूजा का उल्लेख है, जो दर्शाता है कि सभी प्रकार के कार्यों में उनकी उपस्थिति आवश्यक होती है। अनुसंधान से यह भी सिद्ध होता है कि भक्तों के लिए गणेश के नामों का जप विशेष फलदायी होता है, जो न केवल संकटों को समाप्त करता है बल्कि जीवन के मूलभूत उद्देश्यों की भी सिद्धि करता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का नियमित पाठ मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और अभावों की समाप्ति में सहायक होता है। यह भक्ति साधना न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाती है, बल्कि आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सुख-शांति भी प्रदान करती है। इसके प्रति आस्था रखने वाले भक्त किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ प्रात: काल या संध्या समय करना उत्तम होता है। पूजा के समय स्वच्छता का ध्यान रखें और एक दीप जलाएं। स्फटिक या मिट्टी की गणेश प्रतिमा के सामने बैठकर शांत मन से स्तोत्र का जप करें। ध्यान रहे कि मानसिक स्थिति शांत और एकाग्र हो। ध्यान रखने से पूजा का फल जल्दी और साकारात्मक तरीके से प्राप्त होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने का सही समय क्या है?

इस स्तोत्र का पाठ प्रात: काल और संध्या समय करना उत्तम माना जाता है, ताकि प्रार्थना के फलकारी परिणाम मिल सकें।

क्या संकटनाशन गणेश स्तोत्र से धन की प्राप्ति संभव है?

जी हाँ, इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को धन की प्राप्ति और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, जैसा कि श्रुति में कहा गया है।

क्या मैं इस स्तोत्र का पाठ अकेले कर सकता हूँ?

बिलकुल! इस स्तोत्र का पाठ बिना किसी विशेष संख्याबद्धता के अकेले भी किया जा सकता है, इससे आपका आत्मविश्वास और भक्ति बढ़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 28 Aug 2026

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