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ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत लिरिक्स (Mamta Ke Mandir Ki Hai Tu Sabse Pyari Murat Lyrics) - Ye Bandhan To Pyar Ka Bandhan Hai Alka Yagnik Karan Arjun - Bhaktilok

6,883 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत लिरिक्स (Mamta Ke Mandir Ki Hai Tu Sabse Pyari Murat Lyrics) - Alka Yagnik Karan Arjun Bhakti Geet

अपडेटेड: 2026 श्रेणी: देवी भजन, फिल्मी भक्ति गीत, देवी गीत गायक: अल्का याग्निक रचनाकार: इंदिवर

भारतीय संगीत जगत और सनातन भक्ति परंपरा में ममता, करुणा और वात्सल्य की अधिष्ठत्री माँ जगदंबा के प्रति अनन्य प्रेम को समर्पित यह रचना अत्यंत लोकप्रिय है। फिल्म 'करण अर्जुन' (Karan Arjun) का यह अमर गीत "ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत" (Mamta Ke Mandir Ki Hai Tu Sabse Pyari Murat) केवल एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि यह मातृशक्ति और आदि शक्ति माँ दुर्गा के प्रति एक परम भक्त की हार्दिक वंदना और शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अल्का याग्निक (Alka Yagnik) की सुमधुर और भावपूर्ण आवाज में गाया गया यह भजन हर भारतीय के अंतर्मन को झंकृत कर देता है। इस विस्तृत आलेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक संदर्भ, सांस्कृतिक महत्व और इसके श्रवण से मिलने वाले आंतरिक आनंद पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भजन संक्षिप्त अवलोकन

यह गीत माँ के आंचल की छांव और उनकी अहेतुकी कृपा का गुणगान करता है। जब एक संतान अपने जीवन के संघर्षों के बीच माँ की शरण में जाती है, तो उसे जो मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, उसका सजीव चित्रण इस रचना में मिलता है। इसे दुर्गा सप्तशती के पाठ, माता के जागरण, नवरात्रि पूजन और विभिन्न पारिवारिक अनुष्ठानों में अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना और गाया जाता है।

सम्पूर्ण गीत एवं भजन लिरिक्स | Complete Mamta Ke Mandir Ki Lyrics

॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥

ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत,
भगवान को भी जिस पर हो जाए नाज़, वो सूरत।
ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत,
भगवान को भी जिस पर हो जाए नाज़, वो सूरत।
भगतों की तू है किस्मत, माता ओ माता,
तू ही है मेरी जन्नत, माता ओ माता...

॥ प्रथम अंतरा ॥

जब आँख खुले मेरी, चेहरा तेरा दिखे,
दुख दर्द कोई भी हो, पल में दूर हो लिखे।
तेरी चरण धूलि में, सारे तीरथ समाए,
जो तेरी शरण आए, वो मुक्ति को पा जाए।
तेरी रहमत का साया, माता ओ माता,
तू ही है मेरी जन्नत, माता ओ माता...

॥ द्वितीय अंतरा ॥

इस दुनिया की भीड़ में, तूने ही संभाला है,
हर मुश्किल तूफ़ान से, तूने ही निकाला है।
अंधेरी इस दुनिया में, तू ही तो उजाला है,
तेरे चरणों से जुड़ा, अपना हर नाता है।
तू ही मेरी आराधना, माता ओ माता,
तू ही है मेरी जन्नत, माता ओ माता...

॥ समापन चरण ॥

ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत,
भगवान को भी जिस पर हो जाए नाज़, वो सूरत।
भगतों की तू है किस्मत, माता ओ माता,
तू ही है मेरी जन्नत, माता ओ माता...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

किसी भी भजन या गीत की गहराई को समझने के लिए उसके शब्दों के मर्म में उतरना आवश्यक होता है। "ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत" गीत का प्रत्येक शब्द वात्सल्य और भक्ति की त्रिवेणी है। आइए इसके भावार्थ को विस्तार से समझें:

मुखड़े का भावार्थ

गीतकार कहता है कि देवी माँ ममता के उस पावन मंदिर की सबसे अलौकिक और सुंदर प्रतिमा हैं, जिनकी पवित्रता और महिमा को देखकर साक्षात भगवान को भी गर्व (नाज़) महसूस होता है। वह भक्तों के भाग्य का विधान लिखने वाली और इस नश्वर संसार में मोक्ष व शांति प्रदान करने वाली परम जननी हैं।

चरणों की वंदना

भक्त की यह कामना है कि उसकी सुबह माँ के दर्शन से हो और जीवन के सभी संताप मिट जाएं। माँ के चरणों की धूल में समस्त तीर्थों का पुण्य निवास करता है। जो मनुष्य सच्चे भाव से माँ की शरण में आता है, वह भवसागर से पार हो जाता है।

गीत की मुख्य विशेषताएं एवं आध्यात्मिक महत्व | Significance

यह रचना केवल फिल्म 'करण अर्जुन' का एक लोकप्रिय गीत ही नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में मातृ-पूजा और शक्ति-आराधना के उस सनातन भाव को प्रज्वलित करती है जो वेदों और पुराणों से चला आ रहा है। सनातन धर्म में 'मातृ देवो भव' की परम्परा है और माँ को ही प्रथम गुरु व ईश्वर का रूप माना गया है। इस गीत को सुनने से मन को असीम शांति मिलती है और मानसिक तनाव दूर होता है। इसे आप माता की भेंट के रूप में भी सत्संग और आयोजनों में गा सकते हैं।

गीत की जानकारी एक नजर में | Song Quick Information

गीत विवरण विवरण / जानकारी
गीत का नाम ममता के मंदिर की है तू सबसे प्यारी मूरत (Mamta Ke Mandir Ki Hai Tu Sabse Pyari Murat)
संबंधित फिल्म करण अर्जुन (Karan Arjun - 1995)
गायक / गायिका अल्का याग्निक (Alka Yagnik)
गीतकार (Lyricist) इंदिवर (Indeevar)
संगीतकार राजेश रोशन (Rajesh Roshan)
भाषा हिंदी / उर्दू मिश्रित सरल ब्रज-अवधि भाव
मुख्य विषय देवी भक्ति, मातृत्व प्रेम, वात्सल्य, शरणागति

कठिन शब्दों के अर्थ एवं भाव | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
ममता वात्सल्य, अहेतुकी प्रेम, स्नेह ईश्वर या माँ का जीव के प्रति निष्काम प्रेम
मूरत प्रतिमा, स्वरूप, आकृति दिव्य चेतना का साक्षात साकार रूप
रहमत कृपा, करुणा, अनुकम्पा देवी माँ का आशीर्वाद जो भक्त पर बरसता है
जन्नत स्वर्ग, परम शांति का धाम माता के चरणों में मिलने वाला आध्यात्मिक सुख
चरण धूलि पवित्र चरणों की रज समस्त तीर्थों और पवित्र स्थलों का सार

गीत सुनने और गाने का उपयुक्त अवसर | When to Listen & Sing

इस अद्भुत भजन को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जा सकता है:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के दिनों में माता के पंडालों और घरों में संध्या आरती के समय।
  • माता की चौकी या जागरण: रात्रि जागरण के दौरान जब वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
  • पारिवारिक अनुष्ठान: माता-पिता के प्रति सम्मान प्रकट करने या किसी मांगलिक उत्सव पर।
  • दैनिक साधना के समय: सुबह या शाम को जब आप मानसिक शांति चाहते हैं और ध्यान लगाना चाहते हैं।

संबंधित देवी स्तुति एवं मंत्र

माता की आराधना को पूर्ण करने के लिए आप निम्नलिखित पावन स्तोत्रों और मंत्रों का भी पाठ कर सकते हैं:

या देवी सर्वभूतेषु

पढ़ें मंत्र →

दुर्गा चालीसा

पढ़ें चालीसा →

अम्बे तू है जगदंबे

पढ़ें आरती →

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: यह लोकप्रिय गीत वर्ष 1995 में आई प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म 'करण अर्जुन' (Karan Arjun) का है।

उत्तर: इस गीत को प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अल्का याग्निक (Alka Yagnik) ने अपनी सुमधुर और जादुई आवाज में गाया है।

उत्तर: इस गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार इंदिवर (Indeevar) जी ने लिखे हैं और इसका संगीत राजेश रोशन (Rajesh Roshan) ने तैयार किया है।

उत्तर: हाँ, यह गीत माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन और नवरात्रि के विशेष अवसरों पर अत्यधिक श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख संकलित सांस्कृतिक एवं पारंपरिक स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को लोकप्रिय भक्ति गीतों के सटीक लिरिक्स, उनके अर्थ और उनके आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना है। यदि आप किसी विशिष्ट संशोधन का सुझाव देना चाहते हैं, तो संपर्क कर सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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