प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
झूम रहे हैं पवन गूँज को सुनके पृथ्वीवासी
बम बम बोल रहा है काशी
बम बम बोल रहा है काशी
महादेव का डमरू बाजे नाचे मगन सन्यासी
बम बम बोल रहा है काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी।
बम बम बोल रहा हे काशी।
यहाँ किसी के मरने का न शोक मनाया जाता है
मुक्ति धाम हे मरनेवाला अवस्य मुक्ति पाता है।
माँ गंगा की पवन लहरें और बरुना की धारा
जोश हे देती बोल के हर हर महादेव का नारा
मुक्ति मंत्र ललकार बनके बोले हिन्द निवासी
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी।
बम बम बोल रहा हे काशी।
द्वादस ज्योत्रिलिंग यहाँ हैविश्वनाथ अविनासी
मात विशालाक्षी भी यहाँ है शक्तिपीठ है काशी।
शिव त्रिशूल के बसे धाम में देवों का है फेरा
संतों की नगरी हे यहाँ पर तुलसी का है डेरा।
यहाँ मंत्र शिव नाम बदल दे भक्त का गृह और राशी
बम बम बोल रहा है’ काशी।
बम बम बोल रहा हे काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
हर देवी हर देवता का इस नगरी में डेरा है
रोज़ यहाँ की गलियों में संतो का लगता फेरा है।
माँ अन्पुर्णा संकट मोचन भैरव अस्ट विनायक
महादेव का नाम रटते बाबा गौअत्म साधक।
मस्ती का बरदान हे बटता भागे दूर उदासी
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
आँख उठाने का भारत पे कोई देश न भूल करे
बेरर विनाश श्री विश्व्नाथ के हाथों का त्रिशूल करे।
डमरू का दमक बम बम का धमक हर शत्रु को दहलाता है.
हर हर महादेव का नारा रण मैं विजय दिलाता है
मुक्ति देते साथ में देते शक्ति शिव अबिनाशी
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
झूम रहे हैं पवन गूँज को सुनके पृथ्वीवासी
बम बम बोल रहा है काशी
बम बम बोल रहा है काशी
महादेव का डमरू बाजे नाचे मगन सन्यासी
बम बम बोल रहा है काशी।
बम बम बोल रहा है’ काशी
बम बम बोल रहा हे काशी।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "बम बम बोल रहा है काशी लिरिक्स हिंदी (Bam Bam Bol Raha Kashi Lyrics Hindi ) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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