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जगदम्बा आरती (Jagadamba Aarti) – Lyrics in Hindi
जगदम्बा आरती – माँ दुर्गा की प्रसिद्ध आरती। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व के साथ पढ़ें जगदम्बा माता की स्तुति।
शेरावाली माता आरती (Sheranwali Mata Aarti) – Lyrics in Hindi
शेरावाली माता आरती – यह प्रसिद्ध दुर्गा आरती माँ शेरावाली की महिमा का गुणगान करती है। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित।
आदि शक्ति आरती (Adi Shakti Aarti) – ॐ जय अम्बे गौरी | Lyrics in Hindi
आदि शक्ति आरती (Adi Shakti Aarti) – ॐ जय अम्बे गौरी के हिंदी लिरिक्स, अर्थ, महत्व और भक्ति भाव सहित। माँ भवानी की यह प्रसिद्ध आरती पढ़ें।
माता की आरती (Mata Ki Aarti) – Lyrics in Hindi | Jai Ambe Gauri
माता की आरती – जय अम्बे गौरी के भक्ति भाव से परिपूर्ण यह प्रसिद्ध दुर्गा आरती हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व सहित।
जय माता दी आरती (Jai Mata Di Aarti) – Lyrics in Hindi | Ambe Tu Hai Jagdambe
जय माता दी आरती (Jai Mata Di Aarti) – माँ दुर्गा के जगदम्बा स्वरूप की स्तुति। अम्बे तू है जगदम्बे लिरिक्स, अर्थ और भक्ति भाव सहित।
जय आदि शक्ति माता आरती (Jai Adi Shakti Aarti) – Lyrics in Hindi
जय आदि शक्ति माता आरती – आदिशक्ति की प्रसिद्ध आरती। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व सहित।
ॐ जय अम्बे गौरी आरती (Om Jai Ambe Gauri Aarti) – Lyrics in Hindi
ॐ जय अम्बे गौरी – यह प्रसिद्ध दुर्गा आरती माँ अम्बे गौरी की महिमा का गुणगान करती है। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित।
जय अम्बे गौरी आरती (Jai Ambe Gauri Aarti) – Lyrics in Hindi
जय अम्बे गौरी आरती – माँ दुर्गा की प्रसिद्ध आरती। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और महत्व सहित।
ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) – Lyrics in Hindi
ॐ जय जगदीश हरे – सबसे प्रसिद्ध विष्णु आरती। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित। हर पूजा में गाई जाने वाली यह आरती भक्तों के सभी कष्ट …
ॐ जय शिव ओंकारा आरती (Om Jai Shiv Omkara Aarti) – Lyrics in Hindi
ॐ जय शिव ओंकारा – यह प्रसिद्ध शिव आरती भगवान शिव की महिमा का गुणगान करती है। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित।
जय गणेश जय गणेश देवा आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) – Lyrics in Hindi
जय गणेश जय गणेश देवा – यह प्रसिद्ध गणेश आरती भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करती है। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित।
आरती का शास्त्रीय व आध्यात्मिक महत्व
सनातन हिंदू धर्म में देव पूजा की पूर्णता आरती से होती है। आरती शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'आर्त्रिका' से हुई है, जिसका अर्थ होता है विपत्ति का हरण करना या संकट दूर करना। पूजा-पाठ के दौरान होने वाली त्रुटियों और कमियों को दूर करने के लिए पूजा के अंत में आरती करने का विधान शास्त्रों में निर्दिष्ट किया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती की थाली में सजाया गया दीया ईश्वर की दिव्य ज्योति का प्रतीक होता है। थाली में जलने वाली कपूर या घी की बत्तियां हमारे भीतर छुपे अंधकार (अज्ञान) को मिटाकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर जाने का प्रतीक हैं। आरती के समय घंटियों और घड़ियाल की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
आरती का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक शोध के अनुसार, आरती के दौरान जलने वाले कपूर (Camphor) और घी की सुगंध से वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होते हैं। आरती के समय बजने वाले शंख और तांबे की घंटियों की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क को शांत करने और मानसिक तनाव दूर करने में सहायक सिद्ध होती हैं।
आरती करने की सही शास्त्रीय विधि (Aarati Vidhi)
हरिभक्ति विलास ग्रंथ के अनुसार, आरती घुमाने का एक निश्चित चक्र होता है, जिसका पालन अत्यंत आवश्यक है:
आरती सम्बन्धी प्रमुख प्रश्न (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
लेखन एवं संकलन
भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)
सनातन संप्रदायों के शास्त्रों, भजनों और आरतियों का शोध कर प्रामाणिक पाठ उपलब्ध कराने वाली संस्था।
धार्मिक तथ्य-समीक्षा
डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)
वैदिक संस्कृति व देव साहित्य के विद्वान। पीएचडी (वैदिक संस्कृत साहित्य)।
प्रामाणिकता सत्यापित