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श्री अम्बे गौरी आरती
178 पाठ

ॐ जय अम्बे गौरी आरती (Om Jai Ambe Gauri Aarti) – Lyrics in Hindi

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
५-७ मिनट पठन अवधि
हिन्दी आरती भाषा
परंपरागत रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ ॐ जय अम्बे गौरी आरती (Om Jai Ambe Gauri Aarti) – Lyrics in Hindi ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

🙏 ॐ जय अम्बे गौरी

(Om Jai Ambe Gauri) – प्रसिद्ध दुर्गा आरती

माँ दुर्गा की आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: दुर्गा आरती / माँ अम्बे
📍 भाव: शक्ति, आशीर्वाद, रक्षा

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमाद।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीराजत॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

चन्द्रहासोज्जवलकरा, शार्दूल वाहना।
कंटकों में बैठने वाली, माँ सब सुख दाता॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

माँ शेरोंवाली दुःखियों की रखवाली।
भक्तों पर कृपा करती, दुष्टों को दलती॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, काली जय दुर्गे।
खप्पर कटारी वाली, शोभित भुज चतुर्गे॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

जय अम्बे गौरी मैया, जय श्यामा गौरी।
तुम ही हो भवानी, तुम ही जगत जननी॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

ॐ जय अम्बे गौरी, स्वामी जय अम्बे गौरी।
सुख सम्पत्ति कर तुम्हारी, जय अम्बे गौरी॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध दुर्गा आरती माँ अम्बे गौरी की महिमा का गुणगान करती है। “ॐ जय अम्बे गौरी” – माँ अम्बे गौरी की जय हो। वे ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला रानी के रूप में सृष्टि की संचालिका हैं। उनके मस्तक पर सिंदूर और भाल पर मृगमद की टीका शोभायमान है।

माँ शेर पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्टों का संहार करती हैं। वे जगदम्बा, काली, दुर्गा – सभी रूपों में शक्ति की प्रतिमूर्ति हैं। इस आरती के माध्यम से भक्त माँ से सुख, सम्पत्ति और रक्षा की कामना करते हैं।

आरती के अंत में कहा गया है कि जो भी इसे श्रद्धा से गाता है, माँ उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं और उसे हर संकट से मुक्ति दिलाती हैं।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

नवरात्रि की आराधना: यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना में गाई जाती है।

शक्ति की उपासना: अम्बे गौरी आदि शक्ति का रूप हैं – यह आरती उनके सौम्य एवं उग्र दोनों स्वरूपों का वर्णन करती है।

रक्षा और समृद्धि: मान्यता है कि इस आरती का नियमित पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सभी विघ्न दूर होते हैं।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

माँ अम्बे गौरी जगत की पालनहारी हैं। वे भक्तों पर सदा कृपा बरसाती हैं। इस आरती को गाने से भक्त के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो माँ दुर्गा की शक्ति और करुणा से अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय अम्बे गौरी मैया ।।

॥ इति श्रीदुर्गारती सम्पूर्णम् ॥
॥ ॐ जय अम्बे गौरी ।।

१. ॐ जय अम्बे गौरी आरती (Om Jai Ambe Gauri Aarti) – Lyrics in Hindi का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री अम्बे गौरी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

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भगवान श्री अम्बे गौरी जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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