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श्री हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा रचित 'श्री हनुमान चालीसा' महाबली बजरंगबली की स्तुति का सबसे दिव्य, सरल एवं महाशक्तिशाली स्तोत्र है। यहाँ चालीसा के समस्त दोहों एवं चौपाइयों का मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अनुवाद, आध्यात्मिक व्याख्या, महत्व तथा शास्त्रोक्त पाठ विधि का सम्यक् बोध प्राप्त करें।

1 मिनट का पाठ संशोधित: 5 दिन पहले
दैनिक विचार · आज की चौपाई

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन।।6।।

सरल हिंदी अर्थ: आप शंकर (शिव) के अवतार हैं, केसरी के पुत्र हैं और आपके तेज एवं प्रताप की संपूर्ण जगत में वंदना होती है।


विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या:
इस चौपाई में हनुमान जी की उत्पत्ति और महिमा बताई गई है। "शंकर सुवन" – वे भगवान शिव के अवतार हैं। "केसरी नंदन" – वे केसरी नामक वानर के पुत्र हैं।

२. श्री हनुमान चालीसा पाठ (सार्थ)

किसी भी चौपाई अथवा दोहे पर क्लिक करके उसका विस्तृत अर्थ और व्याख्या तुरंत देखें।

मंगलाचरण दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

हिंदी अर्थ: गुरु के चरणों की धूल से मन को शुद्ध करके मैं श्री राम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला है।

विस्तृत व्याख्या: यह दोहा हनुमान चालीसा का प्रारम्भ है। गोस्वामी तुलसीदास जी सबसे पहले अपने गुरु को नमन करते हैं। गुरु के चरणकमलों की रज से वे अपने मन रूपी दर्पण को साफ करते हैं ताकि वह प्रभु के यश को प्रतिबिम्बित करने योग्य हो जाए। बिना गुरु की कृपा के भगवान का सच्चा स्वरूप नहीं जाना जा सकता।

मंगलाचरण दोहा
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

हिंदी अर्थ: मैं अपने शरीर को बुद्धिहीन जानकर पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ। हे प्रभु, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और मेरे कष्टों तथा विकारों को हर लीजिए।

विस्तृत व्याख्या: इस दोहे में तुलसीदास जी की अत्यंत विनम्रता दिखती है। वे स्वयं को बुद्धिहीन और असमर्थ मानते हैं, और इसी भाव से वे हनुमान जी का स्मरण करते हैं। यह सिखाता है कि भगवान के सामने हमें अपनी लघुता का बोध होना चाहिए; तभी उनकी कृपा बरसती है।

चौपाई 1
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।1।।

हिंदी अर्थ: हे हनुमान जी, आपकी जय हो। आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। हे वानरराज, आपकी जय हो, आप तीनों लोकों में प्रकाशित हैं।

विस्तृत व्याख्या: यह प्रथम चौपाई हनुमान जी के स्वरूप का बखान करती है। "ज्ञान गुन सागर" – वे ज्ञान और गुणों के असीम सागर हैं। "कपीस" का अर्थ है वानरों के स्वामी। "तिहुं लोक उजागर" – उनकी कीर्ति तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में फैली हुई है।

चौपाई 2
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।2।।

हिंदी अर्थ: आप श्री राम के दूत हैं और अपार बल के धाम हैं। आप माता अंजनी के पुत्र और पवनदेव के पुत्र कहलाते हैं।

विस्तृत व्याख्या: इस चौपाई में हनुमान जी के तीन प्रसिद्ध नाम आते हैं – रामदूत, अंजनिपुत्र, पवनसुत। "अतुलित बल धामा" – उनमें अपार बल है, जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।

चौपाई 3
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।3।।

हिंदी अर्थ: आप महावीर हैं, प्रचण्ड पराक्रमी हैं और आपका शरीर वज्र के समान कठोर है। आप कुमति (बुरी बुद्धि) को दूर करने वाले और सुमति (अच्छी बुद्धि) देने वाले संगी हैं।

विस्तृत व्याख्या: इस चौपाई में हनुमान जी के गुणों का वर्णन है। "बजरंगी" – जिसका शरीर वज्र (हीरे) के समान मजबूत हो। "कुमति निवार" – वे बुरी बुद्धि, दुर्भावना, अज्ञान को दूर करते हैं और सद्बुद्धि प्रदान करते हैं।

चौपाई 4
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।4।।

हिंदी अर्थ: आपके शरीर का रंग सोने के समान चमकीला है और आप सुंदर वेशभूषा धारण किए हैं। आपके कानों में कुंडल हैं और बाल घुंघराले हैं।

विस्तृत व्याख्या: इस चौपाई में हनुमान जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन है। "कंचन बरन" – उनका शरीर स्वर्णिम आभा से युक्त है। "कानन कुंडल" – उनके कानों में कुंडल शोभायमान हैं और बाल घुंघराले हैं।

चौपाई 5
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।।5।।

हिंदी अर्थ: आपके हाथ में वज्र (बज्र) और ध्वजा सुशोभित है और कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभायमान है।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी के हाथों में वज्र (बज्र) – एक अस्त्र, और ध्वजा (झंडा) है। कंधे पर मूँज के जनेऊ का होना यह बताता है कि वे ब्रह्मचारी हैं, वेदों के ज्ञाता हैं और सदा शुद्ध एवं संयमित जीवन जीते हैं।

चौपाई 6
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन।।6।।

हिंदी अर्थ: आप शंकर (शिव) के अवतार हैं, केसरी के पुत्र हैं और आपके तेज एवं प्रताप की संपूर्ण जगत में वंदना होती है।

विस्तृत व्याख्या: इस चौपाई में हनुमान जी की उत्पत्ति और महिमा बताई गई है। "शंकर सुवन" – वे भगवान शिव के अवतार हैं। "केसरी नंदन" – वे केसरी नामक वानर के पुत्र हैं।

चौपाई 7
बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।7।।

हिंदी अर्थ: आप अत्यंत विद्वान, गुणवान और चतुर हैं। आप सदा राम के कार्य को करने के लिए आतुर रहते हैं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी के बौद्धिक गुणों का वर्णन है। "बिद्यावान" – वे सभी विद्याओं के ज्ञाता हैं। "राम काज करिबे को आतुर" – वे सदा प्रभु राम के कार्य को करने के लिए तत्पर रहते हैं।

चौपाई 8
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।8।।

हिंदी अर्थ: आप प्रभु के चरित्र सुनने में अत्यंत रस रखते हैं और आप राम, लक्ष्मण एवं सीता के हृदय में बसे हुए हैं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी प्रभु राम की कथा सुनने के अत्यंत रसिया (प्रेमी) हैं। वे सदा रामकीर्तन में लीन रहते हैं और तीनों उनसे अत्यंत प्रेम करते हैं।

चौपाई 9
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।9।।

हिंदी अर्थ: आपने अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण कर सीता जी को दर्शन दिए और विकराल रूप धारण कर लंका को जला दिया।

विस्तृत व्याख्या: यह चौपाई हनुमान जी के दो अद्भुत कार्यों का वर्णन करती है। जब वे सीता जी की खोज में लंका गए, तो उन्होंने सूक्ष्म रूप (अणु-रूप) धारण किया, और जब लंका में उत्पात मचाया, तो विकराल रूप धारण कर उन्होंने लंका का दहन किया।

चौपाई 10
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।10।।

हिंदी अर्थ: आपने भीमकाय रूप धारण कर राक्षसों का संहार किया और श्री रामचंद्र जी के सभी कार्यों को पूरा किया।

विस्तृत व्याख्या: राम-रावण युद्ध में हनुमान जी ने अनेक राक्षसों का वध किया। उन्होंने भीम रूप धारण कर अकेले ही असंख्य सेनाओं को ध्वस्त किया और प्रभु राम के कार्यों को सफल बनाया।

चौपाई 11
लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए।।11।।

हिंदी अर्थ: आप संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को जीवित किया, जिससे श्री रघुवीर राम ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

विस्तृत व्याख्या: लक्ष्मण मेघनाद के शक्ति बाण से मूर्छित हो गए थे, और उनके जीवन के लिए संजीवनी बूटी आवश्यक थी। हनुमान जी ने द्रोणागिरि पर्वत ही उठा लिया और समय पर लाकर लक्ष्मण को जीवनदान दिया।

चौपाई 12
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।12।।

हिंदी अर्थ: रघुपति श्री राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे भरत के समान प्रिय हो।

विस्तृत व्याख्या: लक्ष्मण को जीवित करने के बाद प्रभु राम ने हनुमान जी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे उतने ही प्रिय हो जितने मेरे भाई भरत।

चौपाई 13
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।13।।

हिंदी अर्थ: सहस्र मुख वाले शेषनाग भी आपके यश का गान करते हैं – ऐसा कहकर श्रीपति राम ने आपको गले लगा लिया।

विस्तृत व्याख्या: प्रभु राम ने कहा कि हनुमान, तुम्हारा यश इतना विशाल है कि सहस्र मुख वाले शेषनाग जी भी तुम्हारा गुणगान करते हैं। इतना कहकर राम ने उन्हें हृदय से लगा लिया।

चौपाई 14
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।14।।

हिंदी अर्थ: सनक, सनन्दन आदि मुनि, ब्रह्मा, नारद, सरस्वती और शेषनाग भी आपका यश गाते हैं।

विस्तृत व्याख्या: केवल साधारण जन ही नहीं, बल्कि सनकादि मुनि (जो सदा ज्ञान में लीन रहते हैं), ब्रह्मा जी (सृष्टिकर्ता), नारद मुनि (देवर्षि), सरस्वती जी (विद्या की देवी), और शेषनाग सभी हनुमान जी के यश का गान करते हैं।

चौपाई 15
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।15।।

हिंदी अर्थ: यम, कुबेर और दसों दिशाओं के पालक भी आपके गुणों का वर्णन नहीं कर सकते। कवि और विद्वान भी कहाँ तक कह पाएँगे?

विस्तृत व्याख्या: यहाँ अन्य देवताओं – यमराज (मृत्यु के देवता), कुबेर (धन के देवता), और दिग्पाल (दिशाओं के रक्षक) – का उल्लेख है। ये सभी भी हनुमान जी के गुणों का वर्णन करने में असमर्थ हैं।

चौपाई 16
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।16।।

हिंदी अर्थ: आपने सुग्रीव पर बड़ा उपकार किया कि उन्हें राम से मिलवाकर राज्य-पद दिलवाया।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी ने सुग्रीव की भेंट राम से करवाई, जिससे सुग्रीव ने अपने भाई बालि से मुक्ति पाई और किष्किंधा के राजा बने।

चौपाई 17
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।17।।

हिंदी अर्थ: आपके मंत्र को विभीषण ने माना, जिससे वे लंकेश्वर बने – यह सारा संसार जानता है।

विस्तृत व्याख्या: विभीषण रावण का छोटा भाई था। हनुमान जी ने उसे राम की शरण में जाने की प्रेरणा दी। विभीषण ने हनुमान जी का मंत्र माना और राम की शरण में गया, जिससे वह लंका का राजा बना।

चौपाई 18
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।18।।

हिंदी अर्थ: जो सूर्य हजारों योजन दूर है, उसे आपने मीठा फल समझकर निगल लिया था।

विस्तृत व्याख्या: यह हनुमान जी के बाल-स्वरूप की लीला है। बाल्यकाल में वे सूर्य को पका हुआ फल समझकर उसे पकड़ने के लिए आकाश में उड़े और उसे मुँह में रख लिया।

चौपाई 19
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं।।19।।

हिंदी अर्थ: प्रभु राम की मुद्रिका मुँह में रखकर आप समुद्र को लाँघ गए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी ने समुद्र पार करने के लिए प्रभु राम की अंगूठी मुँह में रखी और विशाल समुद्र को लाँघ दिया। यह उनकी अलौकिक शक्ति का परिचायक है।

चौपाई 20
दुर्गम काज जगत के जेते।
Suगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।20।।

हिंदी अर्थ: जगत के जितने भी दुर्गम कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से सुगम हो जाते हैं।

विस्तृत व्याख्या: यह चौपाई हनुमान जी की कृपा की महिमा बताती है। संसार में कोई भी कार्य असंभव नहीं है यदि हनुमान जी का आशीर्वाद हो। वे भक्तों के सभी कठिन कार्यों को सरल बना देते हैं।

चौपाई 21
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।21।।

हिंदी अर्थ: आप राम के द्वार के रखवाले हैं। बिना आपकी आज्ञा के वहाँ प्रवेश नहीं मिलता।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी को भगवान राम के द्वारपाल के रूप में स्थापित किया गया है। उनके भक्तों को सर्वप्रथम हनुमान जी की कृपा प्राप्त करनी होती, तभी वे राम के दरबार तक पहुँच पाते हैं।

चौपाई 22
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।22।।

हिंदी अर्थ: आपकी शरण में आने से सभी सुख मिलते हैं। आप रक्षक हैं, तो किसी का डर नहीं रहता।

विस्तृत व्याख्या: जो भी हनुमान जी की शरण में आता है, उसे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। हनुमान जी के रक्षक होते हुए भक्त को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।

चौपाई 23
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै।।23।।

हिंदी अर्थ: आप अपने तेज को स्वयं संभालते हैं। आपकी हाँक (गर्जना) से तीनों लोक काँप उठते हैं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी का तेज इतना प्रचंड है कि वे स्वयं उसे संभालते हैं, अन्यथा उसकी प्रचंडता से संसार जल सकता है। उनकी गर्जना से तीनों लोक काँप उठते हैं।

चौपाई 24
भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।24।।

हिंदी अर्थ: जब महावीर हनुमान का नाम सुनाया जाता है, तो भूत-पिशाच पास नहीं आते।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी का नाम स्मरण करने मात्र से नकारात्मक शक्तियाँ, भूत-प्रेत आदि भाग जाते हैं। वे सबसे बड़े वीर हैं, इसलिए उनका नाम रक्षा कवच का काम करता है।

चौपाई 25
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।25।।

हिंदी अर्थ: निरंतर हनुमान जी का नाम जपने से सभी रोग नष्ट होते हैं और सब पीड़ा हर ली जाती है।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी की निरंतर उपासना से शारीरिक और मानसिक रोग दूर होते हैं, और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

चौपाई 26
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।26।।

हिंदी अर्थ: जो मन, वचन और कर्म से हनुमान जी का ध्यान लगाता है, उसे सभी संकटों से मुक्त कर देते हैं।

विस्तृत व्याख्या: यह चौपाई शर्तिया उपाय बताती है – यदि कोई मन, वाणी और कर्म से पूर्ण समर्पण भाव से हनुमान जी का ध्यान करे, तो वे उसे हर संकट से उबार लेते हैं।

चौपाई 27
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।।27।।

हिंदी अर्थ: सब पर राम राजा हैं, जो महान तपस्वी हैं। उनके सभी कार्यों को आपने सफल किया।

विस्तृत व्याख्या: राम तो सबके राजा हैं और वे स्वयं महातपस्वी हैं। फिर भी उनके कार्यों को पूरा करने वाले हनुमान जी हैं। यह बताता है कि भक्त की सेवा के बिना भगवान के भी कार्य नहीं होते।

चौपाई 28
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।28।।

हिंदी अर्थ: और जो कोई भी मनोरथ (इच्छा) लेकर आता है, वह अनंत जीवन फल (सफलता) पाता है।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी के पास जो भी कोई मनोकामना लेकर आता है, उसे अत्यधिक फल मिलता है। वे सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं, चाहे वह लौकिक हो या पारलौकिक।

चौपाई 29
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।29।।

हिंदी अर्थ: चारों युगों में आपका प्रताप फैला हुआ है। यह सारे जगत में प्रसिद्ध है और उजाला करता है।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी की महिमा सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग – सभी युगों में व्याप्त है। उनकी कीर्ति से समस्त जगत प्रकाशित है।

चौपाई 30
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।30।।

हिंदी अर्थ: आप साधु-संतों के रखवाले हैं, असुरों का नाश करने वाले हैं और राम के दुलारे हैं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी सज्जनों की रक्षा करते हैं और दुष्टों का संहार करते हैं। वे राम के परम प्रिय हैं, इसलिए "राम दुलारे" कहलाते हैं।

चौपाई 31
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता।।31।।

हिंदी अर्थ: आप अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों को देने वाले हैं। ऐसा वरदान आपको माता जानकी ने दिया था।

विस्तृत व्याख्या: माता सीता ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया था कि वे अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता होंगे। अर्थात् भक्तों को सभी प्रकार की ऐश्वर्य और सिद्धियाँ प्रदान करने की शक्ति उनमें है।

चौपाई 32
राम रसायन तुम्हरे पासा।
Sदा रहो रघुपति के दासा।।32।।

हिंदी अर्थ: आपके पास राम-रसायन (रामनाम का खजाना) है। आप सदा रघुपति के दास बने रहो।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी के पास राम नाम का अमृत है। वे सदा राम के दास हैं, और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

चौपाई 33
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।33।।

हिंदी अर्थ: आपका भजन करने से राम की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के दुख दूर होते हैं।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी की उपासना करने से अंततः राम की प्राप्ति होती है। साथ ही, जन्म-जहाँ के दुख और संचित कष्ट भी नष्ट हो जाते हैं।

चौपाई 34
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई।।34।।

हिंदी अर्थ: अंतकाल में (मृत्यु के समय) आप रघुवर के धाम को जाते हैं, जहाँ जन्म लेने वाले हरिभक्त कहलाते हैं।

विस्तृत व्याख्या: जो हनुमान जी का भजन करता है, वह मरने के बाद राम के धाम (साकेत) को जाता है, और वहाँ जन्म लेने पर वह भगवान का भक्त कहलाता है।

चौपाई 35
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।35।।

हिंदी अर्थ: अन्य देवताओं का ध्यान न करके केवल हनुमान जी की सेवा करने से सब सुख मिल जाते हैं।

विस्तृत व्याख्या: यह चौपाई हनुमान जी की सर्वोपरि महिमा बताती है कि यदि कोई अन्य देवताओं को न भी माने, केवल हनुमान जी की शरण में रहे, तो उसे सभी सुख प्राप्त होते हैं।

चौपाई 36
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।36।।

हिंदी अर्थ: जो हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती है।

विस्तृत व्याख्या: हनुमान जी के स्मरण मात्र से सारे संकट दूर हो जाते हैं और समस्त कष्टों का नाश हो जाता है। वे बलवीर हैं, इसलिए उनका नाम अभय प्रदान करता है।

चौपाई 37
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।37।।

हिंदी अर्थ: हे हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप गुरुदेव के समान कृपा कीजिए।

विस्तृत व्याख्या: यह चौपाई हनुमान जी की स्तुति है और उनसे गुरु की तरह कृपा करने की प्रार्थना है। गुरु की भाँति वे अज्ञान दूर करें और ज्ञान का प्रकाश दें।

चौपाई 38
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।38।।

हिंदी अर्थ: जो कोई सौ बार इसका पाठ करेगा, वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे महान सुख मिलेगा।

विस्तृत व्याख्या: यह चालीसा के पाठ का फल बताया गया है – जो व्यक्ति सौ बार हनुमान चालीसा का पाठ करता है, वह सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है और परम सुख को प्राप्त करता है।

चौपाई 39
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।39।।

हिंदी अर्थ: जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, वह सिद्धि को प्राप्त करता है – इसके साक्षी गौरीशंकर (शिवजी) हैं।

विस्तृत व्याख्या: इस चालीसा का नियमित पाठ करने वाला सिद्ध (सफल) हो जाता है। इसकी प्रामाणिकता के साक्षी स्वयं भगवान शिव हैं, जो इसके रचयिता तुलसीदास के इष्टदेव हैं।

चौपाई 40
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।40।।

हिंदी अर्थ: तुलसीदास जी सदा हरि के सेवक हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि हे नाथ, मेरे हृदय में निवास कीजिए।

विस्तृत व्याख्या: अंतिम चौपाई में रचयिता तुलसीदास जी विनम्रतापूर्वक कहते हैं कि वे सदा हरि के दास हैं और हनुमान जी से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके हृदय में वास करें। यह भक्त की परम अभिलाषा है कि प्रभु उसके हृदय में बसे।

समापन दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

हिंदी अर्थ: हे पवनपुत्र, संकट हरने वाले, मंगलमूर्ति! आप राम, लक्ष्मण और सीता सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

विस्तृत व्याख्या: यह अंतिम दोहा हनुमान जी से प्रार्थना है कि वे राम, सीता और लक्ष्मण सहित सदा हमारे हृदय में बसे रहें। हनुमान जी संकट हरने वाले और कल्याण के साकार रूप हैं। उनके हृदय में बसने से सब मंगल होता है।

३. हनुमान चालीसा का दिव्य इतिहास

हनुमान चालीसा अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा रचित एक परम प्रसिद्ध एवं पावन स्तुति ग्रंथ है। इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब गोस्वामी तुलसीदास जी को दिल्ली के शासक ने कारागार में बंदी बना लिया था, तब उन्होंने कारागृह में बजरंगबली का स्मरण करते हुए इस चालीसा की रचना की थी। चालीसा का पाठ पूर्ण होते ही विशाल वानर सेना ने दिल्ली नगर को घेर लिया था, जिसके उपरांत सम्राट ने भयभीत होकर तुलसीदास जी को सहर्ष आदर सहित मुक्त किया।

४. नियमित पाठ के अद्भुत लाभ

हनुमान चालीसा का प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन की समस्त व्याधियां, भय एवं संकट दूर होते हैं। इसके प्रमुख लाभ नीचे दिए गए हैं:

  • भय एवं नकारात्मक ऊर्जा का नाश: चालीसा का पाठ करने से मन और घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास होता है।
  • बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति: "बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार" - नियमित पाठ से मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
  • रोग एवं शारीरिक पीड़ा से मुक्ति: "नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा" - असाध्य रोगों से सुरक्षा एवं स्वास्थ्य लाभ।

५. शास्त्रोक्त पाठ विधि एवं नियम

हनुमान चालीसा का पाठ करते समय शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। प्रातः काल स्नान के उपरांत लाल आसन पर बैठकर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। पाठ से पूर्व तांबे के कलश में जल भरकर रखें, और पाठ पूर्ण होने के उपरांत उस जल का आचमन करें। प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को धूप, दीप एवं बूंदी अथवा गुड़-चने का भोग लगाना चाहिए।

६. हनुमान चालीसा से जुड़े प्रश्नोत्तर (FAQ)

हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन प्रातः काल उठकर स्नान करने के उपरांत करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके अतिरिक्त संध्या आरती के समय भी इसका पाठ श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।

हनुमान चालीसा में कुल ४० चौपाइयाँ हैं। पाठ के आरंभ में २ दोहे और पाठ के समापन पर १ दोहा है। कुल मिलाकर इसमें ४३ काव्य छंद हैं।

हाँ, महिलाएं पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, इसलिए महिलाओं को केवल उनकी मूर्ति को स्पर्श करने से परहेज करना चाहिए, जबकि पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी है।
रामगोपाल शास्त्री
धार्मिक इतिहासकार

रामगोपाल शास्त्री

धार्मिक इतिहासकार एवं वैदिक विद्वान। प्राचीन संस्कृत हस्तलिपियों और रामचरितमानस प्रतियों के मिलान व प्रामाणिकता के विशेषज्ञ।

डॉ. वेदप्रकाश शर्मा
मुख्य समीक्षक

डॉ. वेदप्रकाश शर्मा

संस्कृत विभागाध्यक्ष (दिल्ली विश्वविद्यालय)। भक्तिलोक धार्मिक ग्रंथों और स्तोत्रों की आध्यात्मिक शुद्धता के प्रधान समीक्षक।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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