वैदिक यज्ञ आहुति व सामग्री आकलनक
आवश्यक सामग्री एवं समिधा भार मात्रा:
यज्ञ का वैज्ञानिक महत्व: पर्यावरण शुद्धि
आधुनिक विज्ञान ने यह स्वीकार किया है कि यज्ञ में हवन सामग्री की जड़ी-बूटियों के दहन से जो धुआँ (Medicinal Smoke) उत्पन्न होता है, वह वायुमंडल के हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और कवक (Fungus) को नष्ट कर देता है।
नकारात्मक आयन (Negative Ions) मुक्ति: देशी गाय के शुद्ध घी और कपूर के मिश्रण को अग्नि में समर्पित करने पर हवा में बड़ी मात्रा में नकारात्मक आयन (Negative Ions) उत्सर्जित होते हैं, जो फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, मानसिक तनाव दूर करते हैं और वातावरण को प्रदूषण मुक्त करते हैं।
यज्ञ समिधा (लकड़ी) चयन शास्त्र नियम
यज्ञ में मनचाही सूखी लकड़ी का प्रयोग निषेध है। प्रत्येक ग्रह और देवता के निमित्त विशिष्ट समिधा का वर्णन शास्त्रों में है:
आम की लकड़ी का धुआँ फॉर्मेल्डिहाइड गैस जैसी तीखी गंध पैदा नहीं करता, बल्कि वातावरण को शुद्ध और सुगन्धित बनाता है।
पलाश (ढाक) सूर्य के लिए तथा खैर समिधा मंगल ग्रह के दोष निवारण के लिए अत्यंत फलदाई मानी गई है।
पीपल बृहस्पति के लिए तथा शमी की समिधा शनिदेव के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए प्रयोग की जाती है।
यज्ञ सामग्री संबंधी शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
यज्ञकल्प विधान व आहुति भार आकलन
भक्तिलोक कर्मकांड पीठ (Bhaktilok Karmakand Peeth)
कल्पसूत्र तथा कात्यायन श्रौतसूत्र के अनुसार यज्ञकुंड निर्माण व आहुति सामग्रियों के द्रव्य परिमाण की गणना करने वाली शास्त्रीय परिषद।
धार्मिक समीक्षा व तथ्य-जांच
डॉ. सुरेन्द्रनाथ द्विवेदी (Dr. Surendranath Dwivedi)
संस्कृत प्राध्यापक व पाणिनीय संकाय अध्यक्ष। ३०+ वर्षों का यज्ञ अनुष्ठान व वैदिक मंत्र समीक्षा अनुभव।
कल्प परिमाण गणित सत्यापित