सात्विक उपवास भोजन योजक
नवरात्रि / शिवरात्रि व्रत भोजन
- कुट्टू, सिंघाड़े व राजगीर का आटा
- साबूदाना, समा के चावल (वरण)
- सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा
- गेहूं, चावल, सूजी, मैदा, बेसन
- साधारण समुद्री नमक, हल्दी, लहसुन, प्याज
- दालें व सभी अनाज
दूध में मखाना उबालकर सेंधा नमक या मिश्री के साथ लें। सेब व केला खाएं।
सेंधा नमक, जीरा व अदरक के साथ पके समा के चावल और ताजी छाछ/दही।
उबले आलू की सूखी सब्जी (सेंधा नमक व काली मिर्च में पकी) और सिंघाड़े की पूरी।
आयुर्वेद में 'लंघन' (Fasting) का महत्व
आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में पाचन की कमजोरी से **'आम' (Undigested Toxic Waste)** का निर्माण होता है जो समस्त रोगों का मूल कारण है। उपवास करने से जठराग्नि प्रज्वलित होती है और वह शरीर के संचित विषैले तत्वों का पाचन कर शरीर को शुद्ध करती है।
ऑटोफैगी (Autophagy) विज्ञान: आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (नोबेल पुरस्कार विजेता ओशिनोरी ओहसुमी के शोध) ने यह सिद्ध किया है कि जब शरीर १२ से १६ घंटे तक भूखा रहता है, तो शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं अस्वस्थ व मृत कैंसर जैसी कोशिकाओं को खाकर ऊर्जा प्राप्त करती हैं। इसे ऑटोफैगी (स्व-भक्षण) कहते हैं। एकादशी उपवास इसी का प्राचीन रूप है।
पारणा (व्रत तोड़ने) के शास्त्रीय नियम
उपवास के उपरांत सीधे भारी भोजन करना पाचन तंत्र को हानि पहुँचा सकता है। व्रत खोलने (पारणा) के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
पारणा के समय सबसे पहले गुनगुना पानी या नींबू-शहद पानी पीना चाहिए। यह जठराग्नि को जाग्रत करता है।
एकादशी या बड़े व्रत के अगले दिन सुबह हल्का भोजन जैसे मूंग दाल की पतली खिचड़ी या दलिया खाना सर्वोत्तम माना जाता है।
उपवास आहार संबंधी जिज्ञासाएं (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
आयुर्वेदिक आहार व सात्विक संकलन
भक्तिलोक सात्विक परिषद् (Bhaktilok Satvik Council)
भावप्रकाश निघंटु तथा आयुर्वेद संहिताओं के अनुसार उपवास एवं फलाहार नियमों का संकलन करने वाली पोषण विशेषज्ञ समिति।
वैदिक समीक्षा व तथ्य-जांच
डॉ. हरिशंकर व्यास (Dr. Harishankar Vyas)
ग्रंथ समीक्षक व संस्कृत ग्रंथाचार्य। २५+ वर्षों का वैदिक अनुष्ठान व धार्मिक पंचांग समीक्षा अनुभव।
सात्विक आहार नियम सत्यापित