पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री गणेश आरती
635 पाठ

जय गणेश जय गणेश देवा आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) – Lyrics in Hindi

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
५-७ मिनट पठन अवधि
हिन्दी आरती भाषा
परंपरागत रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ जय गणेश जय गणेश देवा आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) – Lyrics in Hindi ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

🙏 जय गणेश जय गणेश देवा

(Jai Ganesh Jai Ganesh Deva) – प्रसिद्ध गणेश आरती 2026

परंपरागत आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: गणेश आरती / भगवान गणेश
📍 भाव: आस्था, समर्पण, मंगलकामना

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूरा करो, जय बलिहारी।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी,
कामना को पूरा करो, जय बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध गणेश आरती भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करती है। "जय गणेश जय गणेश देवा" – भक्त गणेश जी की जय-जयकार करता है। भगवान गणेश को एक दंत, चार भुजाओं वाला, मूषक वाहन पर विराजमान बताया गया है। वे दयालु हैं, अंधों को आँखें, कोढ़ियों को स्वस्थ शरीर, बांझों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।

आरती में पान, फूल, मेवा चढ़ाने और लड्डुओं के भोग का वर्णन है। संत और भक्त उनकी सेवा करते हैं। अंत में भक्त प्रार्थना करता है कि हे शंकर के पुत्र, दीन-दुखियों की लाज रखो और हमारी कामनाएँ पूर्ण करो।

यह आरती सभी मंगल कार्यों के आरंभ में गाई जाती है और भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

प्रथम पूज्य: भगवान गणेश को सभी देवों में प्रथम पूज्य माना जाता है। इस आरती के माध्यम से भक्त उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मंगलदायक: यह आरती हर शुभ अवसर पर गाई जाती है, क्योंकि गणेश जी विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं।

भक्ति भाव: आरती में वर्णित प्रत्येक पंक्ति भक्त के हृदय से निकली पुकार है, जो गणेश जी से दया और कृपा की याचना करती है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

भगवान गणेश सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। सच्चे मन से की गई आरती और प्रार्थना से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो गणेश जी की कृपा से अपने जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता चाहते हैं।

🙏 ॐ गं गणपतये नमः ।। श्री गणेशाय नमः ।।

॥ इति श्रीगणेशारती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय गणेश जय गणेश देवा ।।

१. जय गणेश जय गणेश देवा आरती (Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Aarti) – Lyrics in Hindi का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री गणेश के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री गणेश जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री गणेश की समस्त आरतियाँ