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सनातन दिव्य लिरिक्स

जय माता दी आरती (Jai Mata Di Aarti) – Lyrics in Hindi | Ambe Tu Hai Jagdambe

जय माता दी आरती (Jai Mata Di Aarti) – माँ दुर्गा के जगदम्बा स्वरूप की स्तुति। अम्बे तू है जगदम्बे लिरिक्स, अर्थ और भक्ति भाव सहित।

देव: श्री दुर्गा काल: 1 मिनट पढ़ें कुल पाठ: 787 बार

घंटी बजाकर आशीर्वाद लें

आरती दिव्य तरंग (Ambient Temple Chants)

मंदिर घंटियों और ॐ जप के पावन स्वर के साथ आरती का अनुभव करें।

जय श्री दुर्गा आरति लिरिक्स

🙏 जय माता दी – अम्बे तू है जगदम्बे

(Jai Mata Di – Ambe Tu Hai Jagdambe Aarti)

प्रसिद्ध दुर्गा आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: दुर्गा आरती / माँ अम्बे
📍 भाव: शक्ति, करुणा, मातृभक्ति

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

तेरे भक्तों की रक्षा करने वाली,
तेरे भक्तों की रक्षा करने वाली।
माँ तू है सबसे प्यारी, माता सबसे न्यारी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

तेरे दर पर आया, मैं तो सीस नवाया,
मेरी झोली भर देना, माता मैं तो आया॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

तेरी जय जयकार हो, सब पर उपकार हो,
हर लो विपदा हमारी, मैया तुम हो प्यारी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

सिंह वाहिनी माता, सबसे तू है रंगी,
दुःखियों के दुःख हरती, सुखियों को सुख संगी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

शुम्भ-निशुम्भ मर्दिनी, महिषासुर घातिनी,
भक्तों पर कृपा करनी, माँ तू है सुखदायिनी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

अष्ट भुजा वाली, दस भुजा वाली,
चार भुजा वाली, तू ही सुखदाता।
सब पर कृपा करना, माँ तू है जगत माता॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तू है कमला रानी,
आदि शक्ति अम्बे, सबकी तू है मैया॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

अम्बे तू है जगदम्बे, माँ तू है जगदम्बे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध आरती माँ दुर्गा के जगदम्बा स्वरूप की स्तुति करती है। “अम्बे तू है जगदम्बे” – हे अम्बे, तू ही जगत की माता है। “जय माता दी” का उद्घोष माँ की विजय और भक्तों के आनन्द का प्रतीक है।

आरती में माँ की महिमा का वर्णन है – वे सिंह वाहिनी हैं, शुम्भ-निशुम्भ और महिषासुर का वध करने वाली हैं, और अपने भक्तों की सभी विपदाओं को हरती हैं। आरती के माध्यम से भक्त माँ से सुख, समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं।

यह आरती विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान और प्रत्येक दिन माँ के पूजन में गाई जाती है। “जय माता दी” का जाप भक्तों में शक्ति और उत्साह का संचार करता है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

जगदम्बा का स्वरूप: “जगदम्बे” का अर्थ है सम्पूर्ण जगत की माता। यह आरती उनके सार्वभौमिक मातृत्व और असीम करुणा का बखान करती है।

शक्ति और सुरक्षा: मान्यता है कि इस आरती के नियमित पाठ से माँ की कृपा से घर-परिवार की रक्षा होती है, नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

नवरात्रि की प्रधान आरती: यह आरती नवरात्रि के नौ दिनों में सबसे अधिक गाई जाने वाली आरतियों में से एक है। इसे सामूहिक रूप से गाने से भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

माँ दुर्गा भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं। यह आरती हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से माँ की आराधना करने पर वे हमारे जीवन की हर बाधा को दूर कर देती हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

“जय माता दी” केवल एक नारा नहीं, बल्कि माँ के प्रति अटूट विश्वास और भक्तिभाव का सशक्त मंत्र है। यह आरती उन सभी के लिए प्रेरणा है जो माँ की कृपा से जीवन में सुख-शांति की कामना रखते हैं।

🙏 जय अम्बे गौरी ।। जय माता दी ।।

॥ इति जय माता दी आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय अम्बे जय जगदम्बे, जय माता दी ॥

आरती का शास्त्रीय व आध्यात्मिक महत्व

सनातन हिंदू धर्म में देव पूजा की पूर्णता आरती से होती है। आरती शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'आर्त्रिका' से हुई है, जिसका अर्थ होता है विपत्ति का हरण करना या संकट दूर करना। पूजा-पाठ के दौरान होने वाली त्रुटियों और कमियों को दूर करने के लिए पूजा के अंत में आरती करने का विधान शास्त्रों में निर्दिष्ट किया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती की थाली में सजाया गया दीया ईश्वर की दिव्य ज्योति का प्रतीक होता है। थाली में जलने वाली कपूर या घी की बत्तियां हमारे भीतर छुपे अंधकार (अज्ञान) को मिटाकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर जाने का प्रतीक हैं। आरती के समय घंटियों और घड़ियाल की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

आरती का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक शोध के अनुसार, आरती के दौरान जलने वाले कपूर (Camphor) और घी की सुगंध से वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होते हैं। आरती के समय बजने वाले शंख और तांबे की घंटियों की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क को शांत करने और मानसिक तनाव दूर करने में सहायक सिद्ध होती हैं।

आरती करने की सही शास्त्रीय विधि (Aarati Vidhi)

हरिभक्ति विलास ग्रंथ के अनुसार, आरती घुमाने का एक निश्चित चक्र होता है, जिसका पालन अत्यंत आवश्यक है:

प्रथम चरण: चरणों की चार बार आरती आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों की ओर सबसे पहले चार बार घुमाना चाहिए। यह समर्पण और नमन का सूचक है।
द्वितीय चरण: नाभि की दो बार आरती इसके बाद भगवान की नाभि की ओर दो बार थाली घुमाई जाती है, जो कि सृष्टि के केंद्र की वंदना मानी गई है।
तृतीय चरण: मुखमंडल की एक बार आरती भगवान के मुखारविंद के सामने एक बार आरती घुमाएं, जिससे उनके सौंदर्य और करुणामय स्वरूप का दर्शन होता है।
चतुर्थ चरण: सम्पूर्ण स्वरूप की सात बार आरती अंत में, भगवान के मस्तक से लेकर चरणों तक, सम्पूर्ण शरीर के चारों ओर चक्राकार रूप में सात बार आरती घुमाई जाती है।

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संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

लेखन एवं संकलन

भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)

सनातन संप्रदायों के शास्त्रों, भजनों और आरतियों का शोध कर प्रामाणिक पाठ उपलब्ध कराने वाली संस्था।

धार्मिक तथ्य-समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)

वैदिक संस्कृति व देव साहित्य के विद्वान। पीएचडी (वैदिक संस्कृत साहित्य)।

प्रामाणिकता सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पढ़ें
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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