भक्तिलोक आध्यात्मिक ग्रंथालय
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथ, उपनिषद, वेद, पुराण और प्रामाणिक आध्यात्मिक कृतियों का अद्वितीय डिजिटल संग्रह। सरल हिंदी अर्थ और गहराई से समझें।
ब्रह्म पुराण (Brahma Purana)
ब्रह्म पुराण अठारह महापुराणों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ है। इसमें भगवान महेश्वर की महिमा, शि…
पद्म पुराण (Padma Purana)
पद्म पुराण अठारह महापुराणों में से दूसरा पुराण है। इसमें सृष्टि खण्ड, भूमि खण्ड, स्वर्ग खण्ड, पातल खण्ड, उत्तर…
शिव पुराण (Shiva Purana)
शिव पुराण अठारह महापुराणों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ है। इसमें भगवान महेश्वर की महिमा, शिव-प…
विज्ञान भैरव तंत्र
विज्ञान भैरव तंत्र शिव-पार्वती संवाद है। इसमें ११२ ध्यान विधियाँ दी गई हैं।
चरक संहिता
चरक संहिता आयुर्वेद का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इसमें आठ स्थानों में रोग निदान, चिकित्सा, और स्वास्थ्य विधियाँ ह…
शंकरभाष्य
शंकरभाष्य आदि शंकराचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें अद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
पतंजलि योग सूत्र
पतंजलि योग सूत्र योग दर्शन का प्रमुख ग्रंथ है। इसमें १९६ सूत्रों में अष्टांग योग, समाधि, और कैवल्य का वर्णन है…
शिक्षा
शिक्षा वेदांग है जो वर्णों के उच्चारण, स्वर, मात्रा और उच्चारण-स्थानों का विज्ञान सिखाती है।
अष्टाध्यायी
अष्टाध्यायी पाणिनि रचित संस्कृत व्याकरण का प्रमुख ग्रंथ है। ३,९९६ सूत्रों में भाषा का वैज्ञानिक विश्लेषण किया …
अष्टांगहृदय
अष्टांगहृदय वाग्भट रचित आयुर्वेद का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें आयुर्वेद के आठ अंगों का संक्षिप्त एवं प्रयोगप्रधा…
भागवत पुराण
भागवत पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान कृष्ण की लीलाओं और भक्ति का सर्वोत्तम ग्रंथ है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण
ब्रह्म वैवर्त पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा-कृष्ण के प्रेम का वर्…
स्कन्द पुराण
स्कन्द पुराण अट्ठारह महापुराणों में सबसे बड़ा है। इसमें तीर्थों, शिव भक्ति और कार्तिकेय की महिमा का वर्णन है।
गरुड़ पुराण
गरुड़ पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें मृत्यु, नरक, और प्रेतकर्म का वर्णन है।
महाभागवतपुराण
महाभागवतपुराण श्रीमद्भागवत का विस्तृत रूप है। इसमें कृष्ण लीला, राधा प्रेम, और भक्ति का वर्णन है।
ब्रह्माण्ड पुराण (ललितोपाख्यान)
ब्रह्माण्ड पुराण का ललितोपाख्यान देवी ललिता, ललिता सहस्रनाम और श्रीचक्र का वर्णन करता है।
ऋग्वेद
ऋग्वेद विश्व का सबसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ है। इसमें १०२८ सूक्त और १०५८० मंत्र हैं।
अथर्ववेद
अथर्ववेद चार वेदों में चौथा है। इसमें आयुर्वेद, गृहस्थ अनुष्ठान, मंत्र और तंत्र का वर्णन है।
शुश्रुत संहिता
शुश्रुत संहिता आयुर्वेद का प्रमुख ग्रंथ है। यह शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का आधार ग्रंथ है।
रामचरितमानस
रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य है। इसमें सात कांडों में रामायण की कथा है।
महाभारत
महाभारत विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य है। इसमें १८ पर्व, १,००,००० श्लोक हैं।
वेदान्तसूत्र
वेदान्तसूत्र (ब्रह्मसूत्र) बादरायण का ग्रंथ है। इसमें ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष का विवेचन है।
ज्योतिष
ज्योतिष वेदांग है जो खगोल विज्ञान, काल-गणना और मुहूर्त विद्या का प्रतिपादन करता है।
छान्दोग्योपनिषद्
छान्दोग्योपनिषद् सामवेद का विशाल उपनिषद् है, जिसमें "तत्त्वमसि" महावाक्य प्रतिपादित है।
गन्धर्ववेद
गन्धर्ववेद सामवेद का उपवेद है, जो संगीत, नृत्य और नाट्य कला का प्राचीन शास्त्र है।
स्थापत्यवेद
स्थापत्यवेद वास्तुकला, शिल्पकला और नगर-निर्माण का प्राचीन शास्त्र है। इसे अथर्ववेद का उपवेद माना जाता है।
बृहदारण्यकोपनिषद्
बृहदारण्यकोपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद की सबसे बड़ी उपनिषद् है, जिसमें याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद और "अहं ब्रह्मास्म…
ब्रह्म पुराण (गौडीय संस्करण)
ब्रह्म पुराण का गौडीय संस्करण बंगाल के तीर्थों और वैष्णव परंपरा का वर्णन करता है।
स्पन्दकारिका
स्पन्दकारिका कश्मीर शैव का प्रमुख ग्रंथ है जो स्पन्द (स्फुरण) के द्वारा चैतन्य की अभिव्यक्ति बताता है।
योगशिखोपनिषद्
योगशिखोपनिषद् योग के शिखर (समाधि) की प्राप्ति के मार्ग बताती है। इसमें विभिन्न योग प्रकारों का वर्णन है।
मुहूर्त चिन्तामणि
मुहूर्त चिन्तामणि मुहूर्त शास्त्र का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसमें शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त निर्धारण के सिद्धांत…
ब्रह्माण्ड पुराण
ब्रह्माण्ड पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें ब्रह्माण्ड की रचना, भूगोल और देवी ललिता का वर्णन है।
विष्णुधर्मपुराण
विष्णुधर्मपुराण एक उपपुराण है। इसमें विष्णु भक्ति, व्रत, और पूजा विधियों का वर्णन है।
घेरण्ड संहिता
घेरण्ड संहिता – हठ योग का सप्तांग ग्रंथ, षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्राणायाम, ध्यान, समाधि।
पद्म पुराण (पातालखण्ड)
पद्म पुराण का पातालखण्ड नागलोक, पाताल लोक, और बलि राजा की कथा का वर्णन करता है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण (श्रीकृष्णजन्मखण्ड)
ब्रह्म वैवर्त पुराण का श्रीकृष्णजन्मखण्ड राधा-कृष्ण प्रेम और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करता है।
गोरक्षसंहिता
गोरखनाथ द्वारा रचित हठयोग ग्रंथ (द्वितीय पाठ), आसन, प्राणायाम, मुद्रा, कुण्डलिनी।
भविष्य पुराण (उत्तरपर्व)
भविष्य पुराण का उत्तरपर्व धर्म, व्रत, तीर्थ, और मोक्ष का उपदेश देता है।
शिवसंहिता
शिवसंहिता – हठ योग का प्राचीन ग्रंथ, आसन, प्राणायाम, कुण्डलिनी, सिद्धियाँ, समाधि।
गरुड़ पुराण (ब्रह्मकाण्ड)
गरुड़ पुराण का ब्रह्मकाण्ड सृष्टि, धर्म, व्रत, आयुर्वेद और मोक्ष का वर्णन करता है।
वायुपुराण
वायुपुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें सृष्टि, वंशावली, और भूगोल का वर्णन है।
नारद पुराण (बृहन्नारदीय)
बृहन्नारदीय पुराण नारद पुराण का विस्तृत संस्करण है। इसमें भक्ति, व्रत, तीर्थ और मोक्ष का वर्णन है।
सनत्कुमारसंहिता
सनत्कुमारसंहिता भक्ति, ज्ञान, योग और मोक्ष का उपदेश देने वाला ग्रंथ है।
रामचन्द्रिका
रामचन्द्रिका केशवदास का प्रसिद्ध राम-काव्य है, जो रीतिकालीन साहित्य की श्रेष्ठ कृति है।
सामवेद
सामवेद चार वेदों में द्वितीय है। इसे संगीत का वेद कहा जाता है। इसमें १८७५ मंत्र हैं।
श्रीमद्भागवत टीका
श्रीमद्भागवत टीका भागवत पुराण की हिंदी व्याख्या है, जो भक्ति और दर्शन का सार प्रस्तुत करती है।
मण्डलब्राह्मणोपनिषद्
मण्डलब्राह्मणोपनिषद् मण्डलों (चक्रों) की साधना और ब्रह्मज्ञान का वर्णन करती है।
पैंगलोपनिषद्
पैंगलोपनिषद् पैंगल ऋषि के उपदेशों और वेदांत दर्शन का वर्णन करती है।
परब्रह्मोपनिषद्
परब्रह्मोपनिषद् परब्रह्म के स्वरूप और उपासना का वर्णन करती है।
भूगुप्त संहिता
भूगुप्त संहिता हस्तरेखा और ज्योतिष का प्राचीन ग्रंथ है। इसमें रेखाओं के आधार पर भविष्य जानने की विधि है।
शिवताण्डव स्तोत्र
शिवताण्डव स्तोत्र – रावण कृत, शिव के ताण्डव नृत्य और विभूतियों का वर्णन।
गीता भाष्य (मध्व)
गीता भाष्य – मध्वाचार्य कृत द्वैत वेदान्त दृष्टि से गीता की व्याख्या, भक्ति प्रधान।
गीता रहस्य
गीता रहस्य – लोकमान्य तिलक कृत गीता की टीका, निष्काम कर्मयोग का विवेचन।
मीमांसासूत्र
मीमांसासूत्र जैमिनि का ग्रंथ है। इसमें वैदिक कर्मकांड, यज्ञ विधियाँ, और धर्म का स्वरूप वर्णित है।
हनुमानाष्टक
हनुमानाष्टक – हनुमान जी का अष्टक, बल, पराक्रम, भक्ति, भय निवारण।
मध्वभाष्य
मध्वभाष्य मध्वाचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें द्वैत वेदांत के पंचभेद सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
वल्लभाचार्य भाष्य
वल्लभाचार्य भाष्य वल्लभाचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें शुद्धाद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
पवमान सूक्त
पवमान सूक्त ऋग्वेद का सूक्त है जो सोम देवता की स्तुति और पवित्रता प्रदान करने वाला है।
पदार्थधर्मसंग्रह
पदार्थधर्मसंग्रह प्रशस्तपाद का वैशेषिक दर्शन का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें छह पदार्थों, नौ द्रव्यों और गुणों का …
सिद्धान्तबिन्दु
सिद्धान्तबिन्दु अद्वैत वेदांत का एक प्रमुख ग्रंथ है जो माया, विवर्त, और ब्रह्म-ज्ञान का विवेचन करता है।
शिवसूत्र
शिवसूत्र कश्मीर शैव दर्शन का प्रथम एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
अभिनवभारती
अभिनवभारती भरत के नाट्यशास्त्र पर अभिनवगुप्त की व्याख्या है, जिसमें रस, अभिनय और संगीत का विश्लेषण है।
तेजोबिन्दूपनिषद्
तेजोबिन्दूपनिषद् योगोपनिषद है। इसमें योग साधना, प्रकाश, और बिन्दु का विवरण है।
अर्थशास्त्र
अर्थशास्त्र कौटिल्य का राजनीति और अर्थनीति का प्राचीन ग्रंथ है, जो शासन, युद्ध और अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डालता…
कल्पसूत्र
कल्पसूत्र वेदांग है जो यज्ञों, संस्कारों और धार्मिक विधियों का विवरण देता है।
योगचूडामण्युपनिषद्
योगचूडामण्युपनिषद् हठयोग और राजयोग की प्रमुख उपनिषद है। इसमें कुंडलिनी जागरण की विधियाँ हैं।
जातकपारिजात
जातकपारिजात ज्योतिष का सर्वोपरि ग्रंथ है, जो जातक फल, योग, दशा और गोचर को विस्तार से बताता है।
विवाह पद्धति
विवाह पद्धति हिन्दू विवाह संस्कार की सम्पूर्ण विधि, मंत्र और रीति-रिवाज प्रस्तुत करती है।
भिक्षुकोपनिषद्
भिक्षुकोपनिषद् संन्यास और भिक्षु जीवन के नियमों, वैराग्य, और मोक्ष साधना पर आधारित है।
परमहंसोपनिषद्
परमहंसोपनिषद् संन्यास की सर्वोच्च अवस्था परमहंस का वर्णन करती है, जिसमें निर्विकल्प समाधि और ब्रह्म में एकता क…
आत्मबोध
आत्मबोध आदि शंकराचार्य का प्रकरण ग्रन्थ है, जिसमें आत्मज्ञान का सरल एवं सारगर्भित विवेचन है।
शुक्लयजुर्वेदीयोपनिषद्
शुक्ल यजुर्वेद से संबद्ध उपनिषदों का संकलन।
बृहज्जाबालोपनिषद्
बृहज्जाबालोपनिषद् शैव परम्परा की एक प्रमुख उपनिषद है, जिसमें भस्म, रुद्राक्ष और पंचाक्षर मन्त्र का विवेचन है।
श्रीप्रश्न संहिता
श्रीप्रश्न संहिता पञ्चरात्र ग्रन्थ है, जो प्रश्नोत्तर शैली में वैष्णव साधना के रहस्यों को उद्घाटित करती है।
जयाख्य संहिता
जयाख्य संहिता पञ्चरात्र आगम का ग्रन्थ है, जो योग, मन्त्र और भक्ति-साधना का प्रतिपादन करता है।
सात्वत संहिता
सात्वत संहिता पञ्चरात्र ग्रन्थ है, जो विष्णु-उपासना के सात्त्विक विधानों और वैष्णव-आचार का विवेचन करती है।
विष्णु पुराण
विष्णु पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान विष्णु की लीलाओं और अवतारों का वर्णन करता है।
पौष्कर संहिता
पौष्कर संहिता पञ्चरात्र ग्रन्थ है, जो वैष्णव-पूजा, मन्दिर-स्थापना और तीर्थ-साधना का विवेचन करती है।
भारद्वाज संहिता
भारद्वाज संहिता ऋषि भारद्वाज की कृति है, जो वैदिक-आगम समन्वय, यज्ञ-विधान और साधना-पद्धति का विवेचन करती है।
विखानस संहिता
विखानस संहिता वैखानस आगम का ग्रन्थ है, जो मन्दिर-प्रतिष्ठा, मूर्ति-शिल्प और वैष्णव-पूजा का विवेचन करती है।
नारद पुराण
नारद पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें तीर्थ, व्रत और भक्ति का विवरण है।
वैखानसागम
वैखानसागम वैखानस सम्प्रदाय का प्रमुख आगम है, जो वैष्णव-पूजा, मन्दिर-स्थापना और आचार-संहिता का विवेचन करता है।
मार्कण्डेय पुराण
मार्कण्डेय पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) का वर्णन है।
लक्ष्मीतंत्र
लक्ष्मीतंत्र वैष्णव तन्त्र है, जो देवी लक्ष्मी की उपासना, श्रीविद्या और मन्त्र-साधना का विवेचन करता है।
अग्नि पुराण
अग्नि पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें धर्म, राजनीति, आयुर्वेद, और साहित्य का वर्णन है।
शाक्तानन्दतरंगिणी
शाक्त साधना, तांत्रिक पूजा, कुलाचार, पंचमकार का विवेचन।
भविष्य पुराण
भविष्य पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें भविष्य की घटनाओं, व्रतों और धर्म का वर्णन है।
तन्त्रराज तन्त्र
शाक्त तंत्र, श्रीविद्या साधना, मंत्र-यंत्र-दीक्षा का समग्र विवरण।
लिङ्ग पुराण
लिङ्ग पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें शिवलिङ्ग की महिमा और शिव पूजा का वर्णन है।
वाराह पुराण
वाराह पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें भगवान विष्णु के वाराह अवतार और तीर्थों का वर्णन है।
वामन पुराण
वामन पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें विष्णु के वामन अवतार और तीर्थों का वर्णन है।
कूर्म पुराण
कूर्म पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें विष्णु के कूर्म अवतार और समुद्र मंथन का वर्णन है।
विष्णुधर्मोत्तरपुराण
विष्णुधर्मोत्तरपुराण एक उपपुराण है। इसमें कला, वास्तु, संगीत, और धर्म का वर्णन है।
गोरक्ष संहिता
गोरखनाथ द्वारा रचित हठयोग ग्रंथ, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, कुण्डलिनी।
देवीपुराण
देवीपुराण एक उपपुराण है। इसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों, पूजा विधियों और महिमा का वर्णन है।
सिद्धसिद्धान्त पद्धति
सिद्धसिद्धान्त पद्धति – नाथ योग परम्परा का ग्रंथ, सिद्धान्त, चक्र, कुण्डलिनी, योग साधना।
कालिकापुराण
कालिकापुराण एक उपपुराण है। इसमें देवी काली, कामाख्या, और तंत्र साधना का वर्णन है।
शिवधर्मपुराण
शिवधर्मपुराण एक उपपुराण है। इसमें शिव पूजा, व्रत, रुद्राक्ष, और भस्म का वर्णन है।
छिन्नमस्तातन्त्र
छिन्नमस्तातन्त्र – देवी छिन्नमस्ता की उपासना, मंत्र, यन्त्र, ध्यान, दशमहाविद्या।
शिवरहस्यपुराण
शिवरहस्यपुराण एक उपपुराण है। इसमें शिव के रहस्य, योग, तंत्र, और ज्ञान का वर्णन है।
रुद्रयामल
रुद्रयामल – यामल तन्त्र, शिव-शक्ति संवाद, मंत्र, यन्त्र, दीक्षा, अनुष्ठान।
स्कन्द पुराण (काशीखण्ड)
स्कन्द पुराण का काशीखण्ड काशी के तीर्थों, घाटों, और मोक्ष महत्व का वर्णन करता है।
ब्रह्मयामल
ब्रह्मयामल – यामल तन्त्र, ब्रह्मा-शक्ति संवाद, सृष्टि-रहस्य, मंत्र, यन्त्र।
स्कन्द पुराण (प्रभासखण्ड)
स्कन्द पुराण का प्रभासखण्ड सोमनाथ, द्वारका और आसपास के तीर्थों का वर्णन करता है।
विष्णुयामल
विष्णुयामल वैष्णव तन्त्र का एक प्रमुख यामल ग्रन्थ है, जो मन्त्र-साधना, यन्त्र और योग का विवेचन करता है।
स्कन्द पुराण (अवन्तिखण्ड)
स्कन्द पुराण का अवन्तिखण्ड उज्जैन, महाकालेश्वर और क्षिप्रा नदी का महात्म्य बताता है।
स्कन्दयामल
स्कन्दयामल यामल तन्त्र है, जो स्कन्द (कार्तिकेय) की उपासना, मन्त्र-साधना और योग-विधियों का विवेचन करता है।
स्कन्द पुराण (नागरखण्ड)
स्कन्द पुराण का नागरखण्ड नागों और सरस्वती नदी के तीर्थों का वर्णन करता है।
मन्त्रमहोदधि (नारायण)
नारायण द्वारा रचित मंत्रशास्त्र का ग्रंथ, मंत्र-यंत्र-साधना का विवरण।
स्कन्द पुराण (रेवाखण्ड)
स्कन्द पुराण का रेवाखण्ड नर्मदा नदी के तीर्थों, परिक्रमा और महात्म्य का वर्णन करता है।
पद्म पुराण (भूमिखण्ड)
पद्म पुराण का भूमिखण्ड पृथ्वी के तीर्थों, नदियों, और धार्मिक स्थलों का वर्णन करता है।
प्रपञ्चसार (शंकराचार्य)
शंकराचार्य द्वारा रचित तांत्रिक ग्रंथ, श्रीचक्र पूजा, मंत्र-यंत्र-साधना।
निर्वाणतन्त्र
शाक्त तंत्र, कौल मार्ग, पंचमकार, दीक्षा, मोक्ष साधना (द्वितीय पाठ)।
ब्रह्म वैवर्त पुराण (गणपतिखण्ड)
ब्रह्म वैवर्त पुराण का गणपतिखण्ड गणेश जी की उत्पत्ति, पूजा और व्रतों का वर्णन करता है।
श्रीविद्यारहस्य
श्रीविद्या के रहस्य, श्रीचक्र, षोडशी मंत्र, उपासना विधि (द्वितीय पाठ)।
भविष्य पुराण (प्रतिसर्गपर्व)
भविष्य पुराण का प्रतिसर्गपर्व भविष्य की घटनाओं, मुगल-ब्रिटिश काल और कलियुग के लक्षणों का वर्णन करता है।
गरुड़ पुराण (प्रेतकल्प)
गरुड़ पुराण का प्रेतकल्प मृत्यु, नरक, श्राद्ध और पिंडदान की विधियों का वर्णन करता है।
योगवशिष्ठ (तन्त्रपरक)
योगवशिष्ठ (तन्त्रपरक) – वाल्मीकि रामायण के योगवशिष्ठ का तांत्रिक व्याख्यान, मंत्र, यन्त्र, ध्यान।
रुद्रागम
रुद्रागम – शैवागम, अष्टाविंशति भेद, शिव पूजा, मंत्र, यन्त्र, दीक्षा, मन्दिर स्थापत्य।
लिङ्ग पुराण (उत्तरभाग)
लिङ्ग पुराण का उत्तरभाग योग, संन्यास, और मोक्ष का उपदेश देता है।
मत्स्य पुराण (नृसिंहोपाख्यान)
मत्स्य पुराण का नृसिंहोपाख्यान नृसिंह अवतार, प्रह्लाद भक्ति और हिरण्यकशिपु वध की कथा है।
औशनसपुराण
औशनसपुराण शुक्राचार्य द्वारा रचित राजनीति, दान और तीर्थ का ग्रंथ है।
गणेश पुराण (क्रीड़ाखण्ड)
गणेश पुराण का क्रीड़ाखण्ड गणेश जी की लीलाओं और अवतारों का वर्णन करता है।
गणेश पुराण (उपासनाखण्ड)
गणेश पुराण का उपासनाखण्ड गणेश उपासना, मंत्र, व्रत और तीर्थों का वर्णन करता है।
मुद्गलपुराण
मुद्गलपुराण गणेश जी के ३२ स्वरूपों और उनकी उपासना का वर्णन करता है।
सूरसागर
सूरसागर सूरदास का महाकाव्य है, जो श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और वात्सल्य-भक्ति का उत्कृष्ट ग्रन्थ है।
वशिष्ठपुराण
वशिष्ठपुराण महर्षि वशिष्ठ के उपदेशों, योग और आत्मज्ञान का ग्रंथ है।
अवधूतोपनिषद्
अवधूतोपनिषद् अवधूत अवस्था, संन्यास और ब्रह्मज्ञान का वर्णन करती है।
सूरसारावली
सूरसारावली सूरदास के पदों का एक संकलन है, जो भक्ति-रस का सार प्रस्तुत करता है।
हयग्रीवपुराण
हयग्रीवपुराण विष्णु के हयग्रीव अवतार, विद्या और ज्ञान का वर्णन करता है।
ब्रह्मबिन्दूपनिषद्
ब्रह्मबिन्दूपनिषद् ब्रह्म और बिन्दु के संबंध और उनकी एकता का वर्णन करती है।
पद्मावत
पद्मावत मलिक मुहम्मद जायसी का सूफी-प्रेमकाव्य है, जो रूपक के रूप में आध्यात्मिक यात्रा का चित्रण करता है।
ब्रह्मविद्योपनिषद्
ब्रह्मविद्योपनिषद् ब्रह्मज्ञान और ब्रह्म के स्वरूप का वर्णन करती है।
दक्षिणामूर्त्युपनिषद्
दक्षिणामूर्त्युपनिषद् भगवान दक्षिणामूर्ति की उपासना और उनके मौन उपदेश का वर्णन करती है।
आनन्दरामायण
आनन्दरामायण राम-कथा का एक विशिष्ट ग्रन्थ है, जिसमें अनेक रहस्यमयी लीलाएँ और उपासना-विधियाँ हैं।
काशीपुराण
काशीपुराण काशी के महात्म्य, घाटों, तीर्थों और मोक्षदायिनी नगरी का वर्णन करता है।
ध्यानबिन्दूपनिषद्
ध्यानबिन्दूपनिषद् ध्यान, प्राणायाम और बिन्दु साधना का वर्णन करती है।
अध्यात्मरामायण
अध्यात्मरामायण राम-कथा का अद्वैत-दार्शनिक ग्रन्थ है, जो राम को परब्रह्म के रूप में स्थापित करता है।
जैमिनीयपुराण
जैमिनीयपुराण जैमिनी ऋषि के उपदेशों, अश्वमेध यज्ञ और मीमांसा दर्शन का वर्णन करता है।
गर्भोपनिषद्
गर्भोपनिषद् गर्भ में शिशु के विकास और शरीर रचना का वर्णन करती है।
योगवासिष्ठ
योगवासिष्ठ वशिष्ठ ऋषि द्वारा राम को दिया गया ज्ञान-योग का ग्रन्थ है, जो अद्वैत और योग का समन्वय है।
बाल्मीकिपुराण
बाल्मीकिपुराण महर्षि वाल्मीकि, रामायण रचना, और वाल्मीकि तीर्थ का वर्णन करता है।
वासिष्ठ रामायण
वासिष्ठ रामायण (योगवासिष्ठ) एक प्रमुख वेदान्त ग्रन्थ है, जो वशिष्ठ-राम संवाद पर आधारित है।
जाबालदर्शनोपनिषद्
जाबालदर्शनोपनिषद् जाबाल ऋषि के दर्शन और संन्यास का वर्णन करती है।
देवीभागवत
देवीभागवत पुराण शाक्त सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रन्थ है, जो देवी की महिमा और उपासना का विवेचन करता है।
कलिसन्तरणोपनिषद्
कलिसन्तरणोपनिषद् कलियुग के तारण के लिए हरे कृष्ण महामंत्र का वर्णन करती है।
भागवत महात्म्य
भागवत महात्म्य श्रीमद्भागवत के पाठ-श्रवण की महिमा का वर्णन करने वाला ग्रन्थ है।
नादबिन्दूपनिषद्
नादबिन्दूपनिषद् नाद और बिन्दु की साधना से ब्रह्म प्राप्ति का वर्णन करती है।
नारद भक्तिसूत्र
नारद भक्तिसूत्र भक्ति-दर्शन का प्रमुख ग्रन्थ है, जो भक्ति के लक्षण, साधन और फल बताता है।
शाण्डिल्य भक्तिसूत्र
शाण्डिल्य भक्तिसूत्र भक्ति-दर्शन का ग्रन्थ है, जो साधना के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालता है।
रावण संहिता
रावण संहिता एक तांत्रिक और ज्योतिषीय ग्रंथ है। इसमें मुहूर्त, ग्रह फल, मंत्र और आयुर्वेद का वर्णन है।
श्रीरुद्राष्टाध्यायी
श्रीरुद्राष्टाध्यायी यजुर्वेद का अंश है, जो रुद्र (शिव) की स्तुति और उपासना का प्रमुख मन्त्र-ग्रन्थ है।
बजरंगबाण
बजरंगबाण – हनुमान जी का प्रसिद्ध स्तोत्र, संकट मोचन, शक्ति और सिद्धि की प्रार्थना।
मनुस्मृति
मनुस्मृति धर्मशास्त्र का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इसमें वर्णाश्रम धर्म, राजधर्म, संस्कार और प्रायश्चित्त का वर्ण…
पाशुपतब्रह्मोपनिषद्
पाशुपतब्रह्मोपनिषद् भगवान पशुपति की उपासना और पाशुपत व्रत का वर्णन करती है।
सुन्दरकाण्ड
सुन्दरकाण्ड – रामचरितमानस का पाँचवाँ अध्याय, हनुमान जी के लंका प्रस्थान, सीता मिलन, लंका दहन।
रुद्रहृदयोपनिषद्
रुद्रहृदयोपनिषद् रुद्र के हृदय में स्थित ब्रह्म और उनकी साधना का वर्णन करती है।
सन्यासोपनिषद्
सन्यासोपनिषद् संन्यास आश्रम के नियम, विधि, और कर्तव्यों का वर्णन करती है।
भजन गोविन्दम्
भजन गोविन्दम् – शंकराचार्य कृत वैराग्य स्तोत्र, मोहमुद्गर, गोविन्द भक्ति।
सरस्वतीरहस्योपनिषद्
सरस्वतीरहस्योपनिषद् देवी सरस्वती के रहस्यों, मंत्रों और उपासना का वर्णन करती है।
मधुराष्टकम्
मधुराष्टकम् – वल्लभाचार्य कृत कृष्ण स्तोत्र, माधुर्य भक्ति, अष्टक।
वेदों में विज्ञान
वेदों में विज्ञान पुस्तक वैदिक साहित्य में छिपे खगोल, गणित, भौतिकी, और आयुर्वेद के ज्ञान को प्रस्तुत करती है।
गीता दर्शन
गीता दर्शन – विनोबा भावे कृत भगवद्गीता की टीका, व्यावहारिक अर्थ, कर्म-ज्ञान-भक्ति।
पंचतंत्र
पंचतंत्र नीति कथाओं का संग्रह है। यह पाँच तंत्रों में जानवरों की कथाओं के माध्यम से व्यवहार और राजनीति सिखाता …
गीता भाष्य (शंकर)
गीता भाष्य – शंकराचार्य कृत अद्वैत वेदान्त दृष्टि से गीता की व्याख्या।
विमान शास्त्र
विमान शास्त्र महर्षि भरद्वाज द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ है। इसमें विमानों के निर्माण, धातुओं, और उड़ान तकनीक का…
गीता भाष्य (रामानुज)
गीता भाष्य – रामानुजाचार्य कृत विशिष्टाद्वैत दृष्टि से गीता की व्याख्या, भक्ति प्रधान।
न्यायसूत्र
न्यायसूत्र महर्षि गौतम का प्रमुख दार्शनिक ग्रंथ है। इसमें प्रमाण, तर्क और वाद-विवाद के सिद्धांत दिए गए हैं।
गीता (गीता प्रेस)
गीता प्रेस संस्करण – गोरखपुर से प्रकाशित भगवद्गीता का शुद्ध संस्करण, हिन्दी अनुवाद सहित।
वैशेषिकसूत्र
वैशेषिकसूत्र कणाद का दार्शनिक ग्रंथ है। इसमें सात पदार्थों, नौ द्रव्यों और परमाणु सिद्धांत का वर्णन है।
रामचरितमानस (टीका सहित)
रामचरितमानस टीका – तुलसीदास रचित रामकथा का सरल हिन्दी भावार्थ सहित संस्करण।
सांख्यकारिका
सांख्यकारिका ईश्वरकृष्ण का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें प्रकृति-पुरुष विवेक, पच्चीस तत्व, और कैवल्य का वर्णन है।
विनय पत्रिका
विनय पत्रिका – तुलसीदास कृत भक्ति काव्य, राम से विनय, प्रार्थना, आत्मसमर्पण।
योगसूत्र
योगसूत्र पतंजलि का प्रसिद्ध दार्शनिक ग्रंथ है। इसमें अष्टांग योग, समाधि, और कैवल्य का वर्णन है।
गौडपादकारिका
गौडपादकारिका आचार्य गौडपाद का ग्रंथ है। इसमें अद्वैत वेदांत के अजातिवाद, माया और ब्रह्म-आत्मा की अभिन्नता का व…
रामानुजभाष्य
श्रीभाष्य रामानुजाचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें विशिष्टाद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित हैं।
श्रीरुद्रं
श्रीरुद्रं (शतरुद्रीय) यजुर्वेद का प्रसिद्ध स्तोत्र है जिसमें भगवान रुद्र की स्तुति है।
चमकम्
चमकम् यजुर्वेद का अनुवाक है जिसमें जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति हेतु प्रार्थना है।
श्रीसूक्त भाष्य
श्रीसूक्त पर आधारित हिंदी भाष्य – देवी लक्ष्मी के सूक्त का अर्थ एवं व्याख्या।
निम्बार्क भाष्य
निम्बार्क भाष्य निम्बार्काचार्य का ब्रह्मसूत्र पर भाष्य है। इसमें द्वैताद्वैत वेदांत के सिद्धांत प्रतिपादित है…
मधुसूदन सरस्वती ग्रन्थावली
मधुसूदन सरस्वती की प्रमुख रचनाओं का संकलन, अद्वैत वेदांत के महत्वपूर्ण ग्रंथ।
अद्वैत सिद्धि
अद्वैत सिद्धि अद्वैत वेदांत का एक प्रतिष्ठित ग्रंथ है जो द्वैत-अद्वैत विवाद में अद्वैत की स्थापना करता है।
ब्रह्मसिद्धि
ब्रह्मसिद्धि मंडन मिश्र का अद्वैत वेदांत ग्रंथ है जो ब्रह्म की सिद्धि और जगत के मिथ्यात्व को प्रतिपादित करता ह…
ईश्वरप्रत्यभिज्ञा
ईश्वरप्रत्यभिज्ञा कश्मीर शैव दर्शन का मूल ग्रंथ है जो चैतन्य की पहचान और ईश्वर-जीव की एकता को स्थापित करता है।
प्रत्यभिज्ञाहृदय
प्रत्यभिज्ञाहृदय कश्मीर शैव दर्शन का संक्षिप्त एवं सारगर्भित ग्रंथ है।
तंत्रालोक
तंत्रालोक अभिनवगुप्त का विश्वकोशीय ग्रंथ है, जो कश्मीर शैव के सभी पक्षों को प्रकाशित करता है।
सीतोपनिषद्
सीतोपनिषद् देवी सीता की उपासना, शाक्त दर्शन, और मोक्ष साधना पर आधारित उपनिषद है।
ध्वन्यालोक
ध्वन्यालोक काव्यशास्त्र का मूल ग्रंथ है जिसमें ध्वनि सिद्धांत और व्यंजना का विवेचन है।
दशरूपक
दशरूपक धनंजय का नाट्यशास्त्रीय ग्रंथ है जिसमें दस रूपकों की परिभाषा और लक्षण दिए गए हैं।
त्रिपुरातापनीयोपनिषद्
त्रिपुरातापनीयोपनिषद् देवी त्रिपुरसुंदरी की उपासना, श्रीचक्र, और शाक्त तंत्र पर आधारित है।
नाट्यशास्त्र
नाट्यशास्त्र भरतमुनि का विश्वकोशीय ग्रंथ है, जो नाट्य, नृत्य, संगीत और रस सिद्धांत का मूल स्रोत है।
वज्रसूचिकोपनिषद्
वज्रसूचिकोपनिषद् जाति और वर्ण के भ्रम को तोड़ने वाली उपनिषद है। इसमें ब्राह्मणत्व की वास्तविक परिभाषा दी गई है…
वाराहोपनिषद्
वाराहोपनिषद् योगोपनिषद है। इसमें योग, आत्मज्ञान, और मोक्ष का वर्णन है।
शुक्रनीति
शुक्रनीति शुक्राचार्य का नीतिशास्त्रीय ग्रंथ है, जो राजा, मंत्री और राज्य संचालन के सिद्धांतों को बताता है।
फलदीपिका
फलदीपिका ज्योतिष का प्रसिद्ध ग्रंथ है जिसमें जातक फल, योग और दशाओं का वर्णन है।
योगकुण्डल्युपनिषद्
योगकुण्डल्युपनिषद् कुंडलिनी योग की प्रमुख उपनिषद है। इसमें षट्चक्र, नाड़ी, और कुंडलिनी जागरण का वर्णन है।
निरुक्त
निरुक्त यास्क रचित वेदांग है जो वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति और अर्थ का विवेचन करता है।
छन्दःशास्त्र
छन्दःशास्त्र वेदांग है जो वैदिक और लौकिक छंदों के लक्षण, गणना और लय का विज्ञान सिखाता है।
योगतत्त्वोपनिषद्
योगतत्त्वोपनिषद् योग के मूल सिद्धांतों और चार प्रकारों (मंत्र, लय, हठ, राज) का वर्णन करती है।
धर्मसिन्धु
धर्मसिन्धु हिन्दू धर्म के आचार, व्रत, उत्सव और संस्कारों का प्रामाणिक ग्रंथ है।
काश्यप संहिता
काश्यप संहिता आयुर्वेद का बाल रोग (कौमारभृत्य) पर आधारित ग्रंथ है। इसमें गर्भावस्था, शिशु-पोषण, बाल रोग और स्त…
हारीत संहिता
हारीत संहिता आयुर्वेद का प्राचीन ग्रंथ है। इसमें रसायन, वाजीकरण, धातु-भस्म और पंचकर्म का वर्णन है।
कालनिर्णय
कालनिर्णय हिन्दू समय-निर्धारण, पंचांग गणना और शुभ-अशुभ काल का प्रतिपादन करता है।
ब्रह्मसूत्रशांकरभाष्य
ब्रह्मसूत्र पर शंकराचार्य का अद्वैत भाष्य – द्वितीय खंड।
तिथितत्त्व
तिथितत्त्व हिन्दू तिथियों के धार्मिक महत्व, व्रत-उत्सव और नियमों का प्रतिपादक ग्रंथ है।
माधवनिदान
माधवनिदान आयुर्वेद का प्रमुख निदान-ग्रंथ है। इसमें सत्तर से अधिक रोगों के लक्षण, हेतु और संप्राप्ति का वर्णन ह…
ब्रह्मसूत्रवल्लभाचार्यभाष्य
वल्लभाचार्य का शुद्धाद्वैत वेदान्त पर अनुभाष्य।
कामसूत्र
कामसूत्र वात्स्यायन का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जो कामशास्त्र, नागरिक जीवन और संबंधों का विवेचन करता है।
श्लोकवार्तिक
कुमारिल भट्ट कृत श्लोकवार्तिक – मीमांसा दर्शन की श्लोकात्मक टीका, शब्द प्रामाण्य और वेद नित्यता का प्रतिपादन।
कैवल्योपनिषद्
कैवल्योपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है, जिसमें मोक्ष (कैवल्य) और अद्वैत साधना का वर्णन है।
भट्टदीपिका
खण्डदेव कृत भट्टदीपिका – मीमांसा दर्शन की टीका, कर्मकांड और धर्म का विवरण।
नृसिंहतापनीयोपनिषद्
नृसिंहतापनीयोपनिषद् नृसिंह अवतार की महिमा और उपासना पर केंद्रित है।
रामरहस्योपनिषद्
रामरहस्योपनिषद् में भगवान राम को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर उनके नाम, मंत्र और ध्यान का रहस्य बताया गया है।
पञ्चदशी
विद्यारण्य कृत पञ्चदशी – अद्वैत वेदान्त का प्रसिद्ध ग्रंथ, पंद्रह अध्यायों में विविध विवेक।
कृष्णोपनिषद्
कृष्णोपनिषद् में भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर उनके नाम, मंत्र और उपासना का वर्णन है।
अद्वैतानुभूति
आदि शंकराचार्य कृत अद्वैतानुभूति – अद्वैत ब्रह्म के अनुभव पर आधारित ग्रंथ, आत्मा और ब्रह्म की अभिन्नता।
अग्निरहस्योपनिषद्
अग्निरहस्योपनिषद् अग्नि के रहस्यों पर केंद्रित है, जिसमें अग्नि के रूप, मंत्र, और यज्ञ का वर्णन है।
अद्वैतसिद्धि
अद्वैतसिद्धि मधुसूदन सरस्वती का अद्वैत सिद्धांतों का प्रतिष्ठापक एवं द्वैत का खंडन करने वाला ग्रन्थ है।
अमृतबिन्दूपनिषद्
अमृतबिन्दूपनिषद् मन के निरोध और एकाग्रता पर केंद्रित है, जिसमें मन को बंधन-मोक्ष का कारण बताया गया है।
भामती
भामती वाचस्पति मिश्र की ब्रह्मसूत्र भाष्य की व्याख्या है, जो भामती सम्प्रदाय का आधार ग्रन्थ है।
कल्पतरु
कल्पतरु अमलानन्द द्वारा भामती पर लिखित टीका है, जो अद्वैत व्याख्या की परम्परा को आगे बढ़ाती है।
गणपत्युपनिषद्
अथर्ववेदीय गणेशोपनिषद, गणपति को सर्वोच्च ब्रह्म बताने वाली।
नीलरुद्रोपनिषद्
अथर्ववेदीय शैव उपनिषद, रुद्र के नीलकंठ स्वरूप की व्याख्या।
शतरुद्रीयोपनिषद्
यजुर्वेदीय शैव उपनिषद, शतरुद्रीय मंत्रों का दार्शनिक विवेचन।
माण्डूक्यकारिका
माण्डूक्यकारिका गौडपादाचार्य की कृति है, जो अद्वैत वेदान्त के अजातिवाद सिद्धांत का प्रतिपादन करती है।
कठोपनिषद्भाष्य
कठोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें नचिकेता-यम संवाद, आत्म-ज्ञान और मोक्ष का विवरण है।
सुबालोपनिषद्
सुबालोपनिषद् – ब्रह्म, जीव, जगत, मोक्ष और अवस्थात्रय पर आधारित वेदान्त उपनिषद्।
वज्रसूचिकोपनिषद्
वज्रसूचिकोपनिषद् – ब्राह्मणत्व के वास्तविक स्वरूप, जाति और ज्ञान का विवेचन।
योगकुण्डल्युपनिषद्
योगकुण्डल्युपनिषद् – कुंडलिनी योग, नाड़ी शुद्धि, चक्र, प्राणायाम और ध्यान।
मैत्रेय्युपनिषद्
मैत्रेय्युपनिषद् मैत्रेयी और याज्ञवल्क्य के संवाद पर आधारित है, जो ज्ञान-योग और संन्यास की महत्ता बताती है।
पञ्चब्रह्मोपनिषद्
पञ्चब्रह्मोपनिषद् शिव के पाँच मुखों (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान) का विवेचन करती है।
प्रणाग्निहोत्रोपनिषद्
प्रणाग्निहोत्रोपनिषद् आन्तरिक यज्ञ की विधि बताती है, जिसमें प्राणों को अग्नि और आहार को हवि मानकर साधना की जात…
सावित्र्युपनिषद्
सावित्र्युपनिषद् गायत्री मन्त्र के गूढ़ अर्थ, उपासना विधि और सावित्री देवी के स्वरूप का वर्णन करती है।
अथर्वशिखोपनिषद्
अथर्वशिखोपनिषद् प्रणव (ॐ) के रहस्य, उसके मात्राओं के अर्थ, और ॐकार साधना का विवेचन करती है।
चिन्त्यागम
चिन्त्यागम – शैवागम परम्परा का ग्रंथ, शिव पूजा, मंत्र, यन्त्र, ध्यान और दीक्षा विधियाँ।
स्वायंभुवागम
स्वायंभुवागम – शैवागमों का आदि ग्रंथ, स्वयंभू शिव द्वारा प्रकट, सृष्टि, पूजा, दीक्षा।
ललितागम
ललितागम शाक्त आगम है, जिसमें देवी ललिता की उपासना, श्रीचक्र और तन्त्र-साधना का विवेचन है।
पाद्म संहिता
पाद्म संहिता पञ्चरात्र आगम का ग्रन्थ है, जो वैष्णव-पूजा, मन्दिर-स्थापना और आचार-संहिता का विवेचन करता है।
परम संहिता
परम संहिता पञ्चरात्र ग्रन्थ है, जो परमात्मा, सृष्टि और मोक्ष के उच्चतम तत्त्वों का प्रतिपादन करती है।
मत्स्य पुराण
मत्स्य पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें विष्णु के मत्स्य अवतार, वंशावली और तीर्थों का वर्णन है।
बृहद्विष्णुपुराण
बृहद्विष्णुपुराण विष्णु पुराण का विस्तृत संस्करण है। इसमें विष्णु की महिमा, अवतार, और भक्ति का वर्णन है।
हठयोग प्रदीपिका
हठयोग प्रदीपिका – हठ योग का मूल ग्रंथ, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, कुण्डलिनी जागरण।
तन्त्रसार (अभिनवगुप्त)
अभिनवगुप्त द्वारा रचित कश्मीर शैव का तंत्रसार, त्रिक दर्शन।
ब्रह्म वैवर्त पुराण (कृष्णजन्मखण्ड)
ब्रह्म वैवर्त पुराण का कृष्णजन्मखण्ड श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं और राधा-कृष्ण प्रेम का वर्णन करता है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण (प्रकृतिखण्ड)
ब्रह्म वैवर्त पुराण का प्रकृतिखण्ड देवी के स्वरूपों, सहस्रनाम और उपासना का वर्णन करता है।
षट्चक्रनिरूपण (पूर्णानन्द)
पूर्णानन्द कृत षट्चक्रनिरूपण, चक्र साधना, कुण्डलिनी योग।
वराह पुराण (सनत्कुमारसंहिता)
वराह पुराण की सनत्कुमारसंहिता भक्ति, ज्ञान, और मोक्ष का उपदेश देती है।
कूर्म पुराण (ईश्वरगीता)
कूर्म पुराण की ईश्वरगीता शिव द्वारा उपदेशित ज्ञान, योग और मोक्ष का ग्रंथ है।
लक्ष्मीनृसिंह स्तोत्र
नृसिंह-लक्ष्मी स्तोत्र, रक्षा मंत्र, उग्र शांति।
नन्दिकेश्वरपुराण
नन्दिकेश्वरपुराण शिव भक्ति, शिवलिंग पूजा, रुद्राक्ष और भस्म का वर्णन करता है।
बृहद्धर्मपुराण
बृहद्धर्मपुराण धर्म, व्रत, तीर्थ और आचार का विस्तृत वर्णन करता है।
कबीर साखी
संत कबीर के दोहों का संकलन, जो आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता और आत्म-ज्ञान पर आधारित है।
परमहंसपरिव्राजकोपनिषद्
परमहंसपरिव्राजकोपनिषद् परमहंस संन्यासियों के आचार और मोक्ष का वर्णन करती है।
संत वाणी संग्रह
संत वाणी संग्रह – कबीर, रैदास, तुलसी, सूर, मीरा, नानक आदि संतों की वाणी का संकलन।
शारीरिकोपनिषद्
शारीरिकोपनिषद् शरीर और आत्मा के संबंध, पंचकोश, और योग साधना पर आधारित उपनिषद है।
सुबालोपनिषद्
सुबालोपनिषद् ऋग्वेदीय उपनिषद है। इसमें ब्रह्म, आत्मा, और प्रणव की व्याख्या है।
काव्यप्रकाश
काव्यप्रकाश मम्मटाचार्य का प्रसिद्ध काव्यशास्त्रीय ग्रंथ है, जो रस, अलंकार और काव्यदोषों पर प्रकाश डालता है।
निर्णयसिन्धु
निर्णयसिन्धु धार्मिक विधि-निर्णय, व्रत, उत्सव, प्रायश्चित्त और संस्कारों का प्रामाणिक ग्रंथ है।
ब्रह्मसूत्ररामानुजभाष्य
रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत वेदान्त पर श्रीभाष्य।
श्राद्धतत्त्व
श्राद्धतत्त्व हिन्दू श्राद्ध कर्म, पितृ-पक्ष, तर्पण और पिण्डदान की सम्पूर्ण विधि प्रस्तुत करता है।
धनुर्वेद
धनुर्वेद भारतीय धनुष-बाण विद्या और युद्ध-कला का प्राचीन शास्त्र है। इसमें अस्त्र-शस्त्र, युद्ध-नीति और योद्धाओ…
ब्रह्मसूत्रमध्वभाष्य
मध्वाचार्य का द्वैत वेदान्त पर ब्रह्मसूत्र भाष्य।
शुद्धितत्त्व
शुद्धितत्त्व हिन्दू धर्म में शुद्धि, आशौच, प्रायश्चित्त और संस्कार-शुद्धि का प्रामाणिक ग्रंथ है।
नाट्यशास्त्र
नाट्यशास्त्र भरत मुनि का विश्वकोशीय ग्रंथ है, जो नाट्य, नृत्य, संगीत और रस सिद्धांत का प्रतिपादन करता है।
ब्रह्मसूत्रनिम्बार्कभाष्य
निम्बार्काचार्य का द्वैताद्वैत वेदान्त पर भाष्य।
अर्थशास्त्र
अर्थशास्त्र कौटिल्य (चाणक्य) का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जो राजनीति, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और युद्धनीति का विवेचन कर…
ईशावास्योपनिषद्
ईशावास्योपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद की अंतिम संहिता में स्थित १८ मंत्रों का उपनिषद् है। यह ज्ञान और कर्म का समन्वय …
केनोपनिषद्
केनोपनिषद् सामवेद से संबद्ध उपनिषद् है, जिसमें ब्रह्म को सर्वप्रेरक के रूप में बताया गया है।
न्यायसिद्धान्तमुक्तावली
विश्वनाथ पञ्चानन का नव्यन्याय पर प्रसिद्ध ग्रंथ।
रतिरहस्य
रतिरहस्य कोक्कोक का प्रसिद्ध कामशास्त्र ग्रंथ है, जो रति, आसन और संबंधों के रहस्यों का वर्णन करता है।
कठोपनिषद्
कठोपनिषद् नचिकेता और यमराज के संवाद पर आधारित है, जिसमें आत्मा और मोक्ष का विवेचन है।
ज्योतिष रत्नाकर
ज्योतिष रत्नाकर एक प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ है, जो फलित ज्योतिष, दशा, गोचर, मुहूर्त आदि का विवेचन करता है।
प्रश्नोपनिषद्
प्रश्नोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध छह प्रश्नों के उत्तरों का संग्रह है, जिसमें प्राण, सूर्य, ओंकार आदि विषय हैं।
बृहज्जातक
बृहज्जातक वराहमिहिर का प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ है, जो फलित ज्योतिष, योग, दशा और गोचर का विवेचन करता है।
मुण्डकोपनिषद्
मुण्डकोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है, जिसमें परा और अपरा विद्या का विवेचन है।
लघुजातक
लघुजातक वराहमिहिर का संक्षिप्त ज्योतिष ग्रंथ है, जो जातक के मूल सिद्धांतों को सरलता से समझाता है।
माण्डूक्योपनिषद्
माण्डूक्योपनिषद् १२ मंत्रों का लघु उपनिषद् है, जो ओंकार और चार अवस्थाओं का विवेचन करता है।
तैत्तिरीयोपनिषद्
तैत्तिरीयोपनिषद् तीन वल्लियों में विभक्त है, जिसमें पंचकोश और ब्रह्मानन्द का वर्णन है।
ऐतरेयोपनिषद्
ऐतरेयोपनिषद् ऋग्वेद से संबद्ध है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति और "प्रज्ञानं ब्रह्म" का सिद्धांत है।
पातञ्जलयोगसूत्राणि
पातञ्जलयोगसूत्राणि टीका सहित – योग दर्शन का मूल ग्रंथ, अष्टांग योग और समाधि का विवरण।
मीमांसान्यायप्रकाश
अप्पय दीक्षित कृत मीमांसान्यायप्रकाश – मीमांसा दर्शन के न्याय और कर्मकांड का विवरण।
श्वेताश्वतरोपनिषद्
श्वेताश्वतरोपनिषद् में भक्ति, योग और ईश्वर के अस्तित्व पर विशेष बल दिया गया है।
जाबालोपनिषद्
जाबालोपनिषद् संन्यास धर्म पर केंद्रित है, जिसमें चार आश्रमों और संन्यास के नियमों का वर्णन है।
वेदान्तपरिभाषा
धर्मराजाध्वरिन्द्र कृत वेदान्तपरिभाषा – अद्वैत वेदान्त की पारिभाषिक शब्दावली का विवरण।
वेदान्तसार
सदानन्द कृत वेदान्तसार – अद्वैत वेदान्त का सार संग्रह, ब्रह्म, माया, जीव, मोक्ष का विवरण।
वेदान्तकल्पतरु
अमलानन्द कृत वेदान्तकल्पतरु – शंकर भाष्य पर टीका, अद्वैत वेदान्त के सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन।
गोपालतापनीयोपनिषद्
गोपालतापनीयोपनिषद् कृष्ण भक्ति पर केंद्रित है, जिसमें गोपाल को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर मंत्र और उपासना विधियाँ द…
विवेकचूडामणि
आदि शंकराचार्य कृत विवेकचूडामणि – अद्वैत वेदान्त का प्रसिद्ध ग्रंथ, विवेक और ज्ञान का महत्व।
उपदेशसाहस्री
आदि शंकराचार्य कृत उपदेशसाहस्री – अद्वैत वेदान्त के उपदेशों का संग्रह, आत्मज्ञान और साधना का मार्ग।
महानारायणोपनिषद्
महानारायणोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध है, जिसमें नारायण को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर स्तुति और उपासना की गई है…
अध्यात्मोपनिषद्
अध्यात्मोपनिषद् आत्मा और परमात्मा के अद्वैत पर केंद्रित है, जिसमें योग और आत्मज्ञान का वर्णन है।
जीवन्मुक्तिविवेक
विद्यारण्य कृत जीवन्मुक्तिविवेक – जीवन्मुक्ति के स्वरूप, लक्षण और साधना का विवरण।
नारदपरिव्राजकोपनिषद्
नारदपरिव्राजकोपनिषद् संन्यास धर्म पर केंद्रित है, जिसमें चार प्रकार के संन्यासियों और उनके आचार का वर्णन है।
वाक्यवृत्ति
आदि शंकराचार्य कृत वाक्यवृत्ति – महावाक्यों का विवेचन, ब्रह्म और आत्मा की अभिन्नता।
तत्त्वबोध
आदि शंकराचार्य कृत तत्त्वबोध – वेदान्त दर्शन के मूल तत्त्वों का परिचय, आत्मा, ब्रह्म, माया, मोक्ष।
अक्षमालिकोपनिषद्
अक्षमालिकोपनिषद् जप और माला के महत्व पर केंद्रित है, जिसमें विभिन्न मालाओं और जप विधियों का वर्णन है।
एकाक्षरोपनिषद्
एकाक्षरोपनिषद् ओंकार के रहस्य पर केंद्रित है, जिसमें उसके तीन मात्राओं और तुरीय का विवेचन है।
मानसोल्लास
मानसोल्लास सुरेश्वराचार्य की रचना है, जो शारीरिक भाष्य पर आधारित अद्वैत साधना का विवेचन करती है।
सूर्योपनिषद्
सूर्योपनिषद् सूर्य देवता को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर उनके मंत्र और उपासना का वर्णन करती है।
शारीरकमीमांसाभाष्य
शारीरकमीमांसाभाष्य शंकराचार्य का ब्रह्मसूत्र पर अद्वैत भाष्य है, जो वेदान्त का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ है।
चन्द्रोपनिषद्
चन्द्रोपनिषद् चंद्र देवता की स्तुति और उपासना पर केंद्रित है, जिसमें चंद्र मंत्र और उनके फल बताए गए हैं।
बृहदारण्यकोपनिषद्वार्तिक
बृहदारण्यकोपनिषद्वार्तिक सुरेश्वराचार्य द्वारा रचित बृहदारण्यक उपनिषद भाष्य की व्याख्या है।
नैष्कर्म्यसिद्धि
नैष्कर्म्यसिद्धि सुरेश्वराचार्य का ग्रन्थ है, जो ज्ञानोत्पत्ति के पश्चात कर्मों की अनिवार्यता का निराकरण करता …
अक्ष्युपनिषद्
अक्ष्युपनिषद् आंखों के रहस्य और उनके माध्यम से आत्मसाक्षात्कार पर केंद्रित है।
ब्रह्मसिद्धि
ब्रह्मसिद्धि मण्डन मिश्र का ग्रन्थ है, जो अद्वैत सिद्धांत की प्रमाणिक स्थापना करता है।
आत्मबोधोपनिषद्
आत्मबोधोपनिषद् आत्मा के स्वरूप और आत्मज्ञान पर केंद्रित है, जिसमें शरीर को अनात्म और आत्मा को साक्षी बताया गया…
सिद्धान्तबिन्दु
सिद्धान्तबिन्दु मधुसूदन सरस्वती द्वारा दशश्लोकी की व्याख्या है, जो अद्वैत सिद्धांतों का संग्रह है।
अमृतनादोपनिषद्
अमृतनादोपनिषद् नाद (ध्वनि) साधना पर केंद्रित है, जिसमें नाद को ब्रह्म का प्रतीक माना गया है।
प्रस्थानभेद
प्रस्थानभेद मधुसूदन सरस्वती का ग्रन्थ है, जो भारतीय दर्शनों का तुलनात्मक वर्णन करता है।
गोपालपूर्वतापनीयोपनिषद्
अथर्ववेदीय वैष्णव उपनिषद, गोपालकृष्ण की ब्रह्मस्वरूपता।
हैरण्यगर्भोपनिषद्
यजुर्वेदीय उपनिषद, हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) का स्वरूप।
रामपूर्वतापनीयोपनिषद्
अथर्ववेदीय वैष्णव उपनिषद, राम को परब्रह्म बताने वाली।
मुण्डकोपनिषद्भाष्य
मुण्डकोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें परा-अपरा विद्या, ब्रह्मज्ञान और सन्यास का विवेचन है।
ईशावास्यभाष्य
ईशावास्योपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जो कर्म, ज्ञान और सन्यास के समन्वय को दर्शाता है।
केनोपनिषद्भाष्य
केनोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें ब्रह्म की अविषयता और अनुभवगम्यता का विवेचन है।
प्रश्नोपनिषद्भाष्य
प्रश्नोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें छह प्रश्नों के माध्यम से सृष्टि, प्राण और आत्मा का विवेचन है।
तैत्तिरीयभाष्य
तैत्तिरीयोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जो पंचकोश सिद्धांत और ब्रह्मानन्द का विस्तृत विवेचन करता है।
ऐतरेयभाष्य
ऐतरेयोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें सृष्टि-रहस्य और "प्रज्ञानम ब्रह्म" महावाक्य की व्याख्या है।
जाबालदर्शनोपनिषद्
अथर्ववेदीय उपनिषद, जाबाल ऋषि के दर्शन, संन्यास और ब्रह्मज्ञान।
कलिसन्तरणोपनिषद्
अथर्ववेदीय वैष्णव उपनिषद, कलियुग में उद्धार के लिए हरे कृष्ण महामंत्र का विधान।
पाशुपतब्रह्मोपनिषद्
अथर्ववेदीय शैव उपनिषद, पशुपति शिव का स्वरूप और ब्रह्मत्व।
रुद्रहृदयोपनिषद्
यजुर्वेदीय शैव उपनिषद, रुद्र के हृदय और ब्रह्मत्व का विवेचन।
सीतोपनिषद्
सीतोपनिषद् – देवी सीता के स्वरूप, तत्त्व, मंत्र और उपासना पर आधारित उपनिषद्।
तेजोबिन्दूपनिषद्
तेजोबिन्दूपनिषद् – तेज और बिन्दु के योगिक-वेदान्तिक सिद्धांत, ध्यान और आत्मज्ञान।
त्रिपुरातापनीयोपनिषद्
त्रिपुरातापनीयोपनिषद् – देवी त्रिपुरा सुन्दरी, श्री विद्या, मंत्र, यन्त्र और उपासना।
वाराहोपनिषद्
वाराहोपनिषद् – भगवान वराह अवतार के स्वरूप, मंत्र, ध्यान और उपासना।
योगचूडामण्युपनिषद्
योगचूडामण्युपनिषद् – योग, आसन, प्राणायाम, ध्यान, समाधि और कुंडलिनी साधना।
योगशिखोपनिषद्
योगशिखोपनिषद् – योग साधना, प्राणायाम, ध्यान, समाधि और कुंडलिनी पर आधारित उपनिषद्।
योगतत्त्वोपनिषद्
योगतत्त्वोपनिषद् – योग के चार प्रकार, आसन, प्राणायाम, ध्यान, समाधि और कुंडलिनी।
भिक्षुकोपनिषद्
भिक्षुकोपनिषद् – भिक्षु (संन्यासी) के जीवन-नियम, कर्तव्य, वैराग्य और मोक्ष साधना।
कठरुद्रोपनिषद्
कठरुद्रोपनिषद् में रुद्र के स्वरूप, मृत्युंजय मन्त्र और कठोपनिषद् के ज्ञान का समन्वय है।
मैत्रायण्युपनिषद्
मैत्रायण्युपनिषद् योग और वेदान्त का समन्वय करने वाली उपनिषद है, जिसमें षट्चक्र, कुण्डलिनी और प्राणविद्या का वर…
नारायणोपनिषद्
नारायणोपनिषद् नारायण को परब्रह्म बताती है और वैष्णव साधना के मन्त्रों का वर्णन करती है।
रुद्राक्षजाबालोपनिषद्
रुद्राक्षजाबालोपनिषद् रुद्राक्ष के महात्म्य, उत्पत्ति और धारण विधि पर आधारित है।
स्कन्दोपनिषद्
स्कन्दोपनिषद् में कार्तिकेय द्वारा उपदिष्ट आत्म-ज्ञान, प्रणव और संन्यास साधना का विवरण है।
शुकरहस्योपनिषद्
शुकरहस्योपनिषद् शुकदेव द्वारा उपदिष्ट ब्रह्मविद्या के गुप्त रहस्यों का संग्रह है।
तारोपनिषद्
तारोपनिषद् तारा देवी और ॐकार के तारक स्वरूप पर आधारित एक शाक्त-तान्त्रिक उपनिषद है।
याज्ञवल्क्योपनिषद्
याज्ञवल्क्योपनिषद् संन्यास और ब्रह्मविद्या पर आधारित है, जो याज्ञवल्क्य ऋषि के उपदेशों को समेटती है।
कारणागम
कारणागम – शैवागम, शिव को सृष्टि का कारण मानने वाला ग्रंथ, तत्त्व विवेचन और साधना।
सूक्ष्मागम
सूक्ष्मागम – शैवागम, शिवतत्त्व के सूक्ष्म तत्व, तन्त्र, योग, प्राण, कुंडलिनी।
चन्द्रज्ञानागम
चन्द्रज्ञानागम शैव आगम है, जो मन और ज्ञान के समन्वय से साधना पद्धति का विवेचन करता है।
बिम्बागम
बिम्बागम शैव आगम है, जिसमें मूर्ति-निर्माण, प्रतिष्ठा और पूजा-पद्धति का विस्तृत वर्णन है।
प्रोद्गीतागम
प्रोद्गीतागम प्रणव (ॐ) के रहस्य, उद्गीथ-साधना और मन्त्र-विज्ञान पर आधारित शैव आगम है।
सिद्धागम
सिद्धागम शैव आगम है, जिसमें योग-साधना, सिद्धियाँ और मोक्ष-प्राप्ति के मार्ग बताए गए हैं।
संतानागम
संतानागम शैव आगम है, जिसमें गुरु-शिष्य परम्परा, दीक्षा और आचार-संहिता का वर्णन है।
सर्वोक्तागम
सर्वोक्तागम शैव आगम है, जो शैव धर्म के समस्त विधानों, योग, ज्ञान और क्रिया का संग्रह है।
पञ्चरात्रागम
पञ्चरात्रागम वैष्णव आगम है, जो विष्णु-उपासना, मन्दिर-स्थापना और भक्ति-साधना का प्रतिपादन करता है।
अहिर्बुध्न्य संहिता
अहिर्बुध्न्य संहिता पञ्चरात्र ग्रन्थ है, जो सुदर्शन मन्त्र, श्रीचक्र और विष्णु-शक्तियों का वर्णन करती है।
आरती संग्रह
आरती संग्रह – हिन्दू देवी-देवताओं की आरतियों का संकलन, पूजा-पाठ हेतु उपयोगी।
तन्त्रवार्तिक
कुमारिल भट्ट कृत तन्त्रवार्तिक – सबर भाष्य की टीका, मीमांसा सूत्रों की व्याख्या और दार्शनिक खंडन।
रामतापनीयोपनिषद्
रामतापनीयोपनिषद् राम भक्ति पर केंद्रित है, जिसमें राम मंत्र, ध्यान, और उनके स्वरूप का वर्णन है।
वासुदेवोपनिषद्
वासुदेवोपनिषद् वासुदेव (श्रीकृष्ण) की सर्वोच्चता और उनके मन्त्र की महिमा का वर्णन करती है।