ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
प्रश्नोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है और इसमें छह शिष्यों द्वारा पिप्पलाद ऋषि से पूछे गए छह प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न ब्रह्मविद्या के किसी न किसी पहलू पर केंद्रित है – प्राण, सूर्य, आत्मा, संसार, ध्यान और ओंकार आदि।
पहले प्रश्न में प्राणों की उत्पत्ति और उनके कार्यों की चर्चा है। दूसरे प्रश्न में सूर्य और प्राण के संबंध का वर्णन है। तीसरे प्रश्न में प्राण की सर्वव्यापकता और जीवन में उसकी भूमिका बताई गई है। चौथे प्रश्न में सुषुप्ति और जाग्रत अवस्था में आत्मा की स्थिति का विवेचन है। पाँचवें प्रश्न में ओंकार की साधना और उसके फलों का उपदेश है। छठे प्रश्न में पुरुष और अक्षर ब्रह्म का वर्णन है।
प्रश्नोपनिषद् अपने प्रश्नोत्तर शैली के कारण सरल और बोधगम्य है। यह उपनिषद् आत्मज्ञान के इच्छुक साधकों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।