१. परिचय (Introduction)
उत्तर प्रदेश की पौराणिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (काशी) में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर विराजमान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर सनातन धर्म का हृदय स्थल है। भगवान शिव के प्रिय द्वादश ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ का स्थान अद्वितीय है। काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह भूमि जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रलय काल में भी यह नगरी नष्ट नहीं होती, वरन भगवान शिव इसे अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।
२. इतिहास व जीर्णोद्धार (History)
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही गौरवशाली और संघर्षमय भी है। स्कंद पुराण के काशी खंड में इस मंदिर का विशद वर्णन मिलता है। ग्यारहवीं से सत्रहवीं शताब्दी के मध्य कई मुस्लिम शासकों ने इस मंदिर पर आक्रमण किए और इसे ध्वस्त किया। मंदिर के स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया गया।
वर्तमान मुख्य मंदिर का निर्माण इंदौर की महान मराठा शासक महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा सन १७८० में कराया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखरों पर लगभग ८२० किलोग्राम शुद्ध सोने की परत चढ़ाई, जिसके बाद से इसे 'गोल्डन टेम्पल' (Golden Temple of Varanasi) भी कहा जाने लगा।
३. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor)
आधुनिक युग में मंदिर के कायाकल्प के लिए ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण किया गया, जिसका लोकार्पण दिसंबर २०२१ में किया गया। इस भव्य कॉरिडोर ने गंगा नदी के ललिता घाट को सीधे विश्वनाथ मंदिर परिसर से जोड़ दिया है, जिससे अब श्रद्धालु गंगा स्नान कर सीधे बाबा के दरबार में जल अर्पित करने पहुंच सकते हैं। लगभग ५ लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस धाम में भक्तों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं, संग्रहालय और पुस्तकालय निर्मित किए गए हैं।
४. महत्व व मोक्ष साधना (Significance & Moksha Sadhana)
सनातन शास्त्रों के अनुसार, काशी मोक्षदायिनी नगरी है। भगवान विश्वनाथ यहां सायुज्य मुक्ति प्रदान करते हैं। यह माना जाता है कि काशी में मृत्यु प्राप्त करने वाले जीव के कान में स्वयं भगवान शिव 'तारक मंत्र' फूंकते हैं, जिससे वह जन्म-मरण के चक्र से सदा के लिए मुक्त हो जाता है। काशी विश्वनाथ में रुद्राभिषेक, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ और महामृत्युंजय साधना साधक को चरम आध्यात्मिक चेतना प्रदान करती है।
५. आरती व दर्शन समय (Timings & Aarti)
बाबा विश्वनाथ के दरबार में दैनिक पांच विशेष आरतियां आयोजित होती हैं, जिनमें सम्मिलित होना परम पुण्यदायी माना जाता है:
| आरती का नाम | समय |
|---|---|
| मंगला आरती (Mangala Aarti) | प्रातः ०३:०० से ०४:०० बजे तक |
| भोग आरती (Bhog Aarti) | दोपहर ११:१५ से १२:२० बजे तक |
| सप्तऋषि आरती (Saptarishi Aarti) | सायं ०७:०० से ०८:१५ बजे तक |
| श्रृंगार आरती (Shringar Aarti) | रात्रि ०९:०० से १०:१५ बजे तक |
| शयन आरती (Shayan Aarti) | रात्रि १०:३० से ११:०० बजे तक |