ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
कृष्णोपनिषद् में भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर उनके नाम, मंत्र और उपासना का वर्णन है।
कृष्णोपनिषद् कृष्ण भक्ति का उपनिषदीय आधार है।
कृष्णोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध एक लघु उपनिषद् है, जो भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित करती है। इसमें कृष्ण के विभिन्न नामों, मंत्रों, और उनकी उपासना का वर्णन है।
उपनिषद् में "कृष्ण" शब्द का अर्थ बताया गया है – "कृषिः भूवाचकः णश्च निर्वृतिवाचकः" अर्थात कृष्ण वह हैं जो भू (सत्ता) और निर्वृति (आनंद) के स्वरूप हैं। उन्हें परमात्मा, परब्रह्म, और गोपीजनवल्लभ कहा गया है।
कृष्णोपनिषद् में कृष्ण मंत्रों का जप, ध्यान, और उनकी लीलाओं का स्मरण करने से मोक्ष की प्राप्ति बताई गई है। यह उपनिषद् विशेष रूप से कृष्ण भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
कृष्णोपनिषद् (Krishna Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
कृष्णोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Krishna Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
65 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
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