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निरुक्त (Nirukta) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
वेदांग

निरुक्त

Nirukta
0 कुल अध्याय
44 पठन
hi भाषा
380 पृष्ठ

यास्क ने निरुक्त में चार प्रकार के निर्वचन बताए हैं।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

निरुक्त यास्क रचित वेदांग है जो वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति और अर्थ का विवेचन करता है।
निरुक्त के बिना वेदों के गूढ़ अर्थ समझना असंभव है।

निरुक्त वेदांगों में चौथा अंग है, जिसके रचयिता यास्काचार्य माने जाते हैं। यह ग्रंथ वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति, अर्थ-निर्धारण और निघण्टु (वैदिक शब्द-कोश) की व्याख्या करता है। निरुक्त के बिना वेदों के गूढ़ अर्थों को समझना कठिन है, क्योंकि इसमें वैदिक मंत्रों में प्रयुक्त देवताओं, कर्मों और संज्ञाओं के व्युत्पत्तिपरक अर्थ बताए गए हैं।

निरुक्त में यास्क ने "निघण्टु" के पाँच अध्यायों पर विस्तृत भाष्य किया है। इसमें शब्दों की व्युत्पत्ति के लिए चार प्रकार के निर्वचन (ऐतिहासिक, व्याकरणिक, पारिभाषिक, और आधिदैविक) दिए गए हैं। यास्क ने वैदिक शब्दों के अर्थ निकालने हेतु "आख्यातोपसर्ग नियम" आदि सिद्धांत प्रतिपादित किए। इस ग्रंथ में नैरुक्त (व्युत्पत्तिवादी) और औपनिषद (अर्थवादी) विद्वानों के मतों का भी तुलनात्मक विवेचन है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत निरुक्त के साथ यास्क की व्याख्याओं का सरल भाषा में अनुवाद और व्याख्या दी गई है। यह पुस्तक वेदों के अध्ययन, संस्कृत व्युत्पत्ति, और प्राचीन भारतीय भाषा-दर्शन के लिए अपरिहार्य है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
निरुक्त (Nirukta) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
निरुक्त
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Nirukta
श्रेणी (Category)
वेदांग
पृष्ठ संख्या (Pages)
380 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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