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बृहदारण्यकभाष्य (Brihadaranyaka Bhashya) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
वेदान्त

बृहदारण्यकभाष्य

Brihadaranyaka Bhashya
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41 पठन
hi भाषा
620 पृष्ठ

बृहदारण्यक उपनिषद की अद्वैत व्याख्या।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

बृहदारण्यक उपनिषद पर आदि शंकराचार्य का अद्वैत भाष्य।
शंकराचार्य का बृहदारण्यकोपनिषद भाष्य।

बृहदारण्यकभाष्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित बृहदारण्यक उपनिषद का भाष्य है। यह उपनिषद वेदान्त दर्शन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। भाष्य में यज्ञ, ब्रह्मविद्या, आत्मतत्त्व और संसार के स्वरूप पर गहन विवेचन है।

इसमें "अहं ब्रह्मास्मि" और "नेति नेति" जैसे महावाक्यों की व्याख्या विस्तार से की गई है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
बृहदारण्यकभाष्य (Brihadaranyaka Bhashya) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
बृहदारण्यकभाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Brihadaranyaka Bhashya
श्रेणी (Category)
वेदान्त
पृष्ठ संख्या (Pages)
620 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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