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ऐतरेयोपनिषद् (Aitareya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

ऐतरेयोपनिषद्

Aitareya Upanishad
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57 पठन
hi भाषा
110 पृष्ठ

ऐतरेयोपनिषद् में आत्मा के तीन जन्मों का वर्णन है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

ऐतरेयोपनिषद् ऋग्वेद से संबद्ध है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति और "प्रज्ञानं ब्रह्म" का सिद्धांत है।
ऐतरेयोपनिषद् का मूल मंत्र "प्रज्ञानं ब्रह्म" है।

ऐतरेयोपनिषद् ऋग्वेद से संबद्ध है और यह ऐतरेय आरण्यक का भाग है। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, आत्मा के स्वरूप, और प्रज्ञान (चेतना) को ब्रह्म के रूप में प्रतिपादित किया गया है। उपनिषद् के प्रारंभ में "आत्मा वा इदमेक एवाग्र आसीत्" कहकर बताया गया कि प्रारंभ में केवल आत्मा ही था।

इस उपनिषद् में सृष्टि के क्रम का वर्णन है – आत्मा ने लोकों, देवताओं, और फिर शरीर की रचना की। प्रसिद्ध मंत्र "प्रज्ञानं ब्रह्म" (प्रज्ञान ही ब्रह्म है) यहाँ से लिया गया है। यह उपनिषद् अद्वैत वेदांत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आत्मा को सृष्टि का एकमात्र कारण बताती है।

ऐतरेयोपनिषद् में शरीर के भीतर आत्मा के तीन जन्मों की चर्चा भी है – पहला जन्म माता-पिता से, दूसरा जन्म यज्ञोपवीत से, तीसरा जन्म मृत्यु के बाद। यह उपनिषद् ज्ञान और कर्म के समन्वय का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
ऐतरेयोपनिषद् (Aitareya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
ऐतरेयोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Aitareya Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
110 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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