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माण्डूक्योपनिषद् (Mandukya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

माण्डूक्योपनिषद्

Mandukya Upanishad
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49 पठन
hi भाषा
65 पृष्ठ

माण्डूक्योपनिषद् में ओंकार को ब्रह्म का वाचक बताया गया है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

माण्डूक्योपनिषद् १२ मंत्रों का लघु उपनिषद् है, जो ओंकार और चार अवस्थाओं का विवेचन करता है।
माण्डूक्योपनिषद् अद्वैत वेदांत का सार है।

माण्डूक्योपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध सबसे लघु उपनिषदों में से है, परंतु अद्वैत वेदांत में इसका अत्यधिक महत्व है। इसमें केवल १२ मंत्र हैं, जो ओंकार के तीन मात्राओं (अ, उ, म) और तुरीय अवस्था के माध्यम से संपूर्ण ब्रह्मविद्या का प्रतिपादन करते हैं।

उपनिषद् के अनुसार, जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय – ये चार अवस्थाएँ हैं। तुरीय वह अवस्था है जहाँ आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित होती है। गौडपादाचार्य ने इस उपनिषद् पर "माण्डूक्यकारिका" लिखी, जो अद्वैत वेदांत का प्रारंभिक ग्रंथ मानी जाती है।

माण्डूक्योपनिषद् में ओंकार को ब्रह्म का वाचक बताया गया है। इसके प्रत्येक मात्रा का अपना रहस्य है – "अ" जाग्रत, "उ" स्वप्न, "म" सुषुप्ति, और मात्रारहित ओंकार तुरीय का प्रतीक है। यह उपनिषद् ध्यान और उपासना का आधार है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
माण्डूक्योपनिषद् (Mandukya Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
माण्डूक्योपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Mandukya Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
65 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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