ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
धनुर्वेद भारतीय धनुष-बाण विद्या और युद्ध-कला का प्राचीन शास्त्र है। इसे उपवेद के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो यजुर्वेद से संबद्ध माना जाता है। इस ग्रंथ में धनुष-बाण के निर्माण, अस्त्र-शस्त्रों के प्रकार, युद्ध-नीति, रथ-चालन, अश्व-गज-सेना के प्रबंधन, और योद्धाओं के प्रशिक्षण का विस्तृत वर्णन है।
धनुर्वेद के अनुसार, एक योद्धा को न केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ होना चाहिए, बल्कि संयम, अनुशासन, और रणनीतिक बुद्धि भी आवश्यक है। इसमें विभिन्न प्रकार के अस्त्रों (यंत्रमुक्त) और शस्त्रों (हस्तमुक्त) का वर्गीकरण है। धनुर्वेद में मार्मिक स्थानों का ज्ञान, प्रतिद्वंद्वी के मर्म पर प्रहार करने की विधि, और युद्ध-चिकित्सा का भी उल्लेख मिलता है। यह ग्रंथ केवल युद्ध-कला तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीति, नीति और शासन-प्रबंधन का भी ज्ञान देता है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में धनुर्वेद के मूल सूत्रों के साथ युद्ध-विद्या, अस्त्र-शस्त्र विज्ञान, और योद्धा-धर्म का सरल विवेचन किया गया है। यह पुस्तक भारतीय सैन्य परंपरा, मार्शल आर्ट्स और रणनीति के अध्ययन के लिए उपयोगी है।