ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
जाबालोपनिषद् संन्यास धर्म पर केंद्रित है, जिसमें चार आश्रमों और संन्यास के नियमों का वर्णन है।
जाबालोपनिषद् संन्यास परंपरा का आधार ग्रंथ है।
जाबालोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है। यह उपनिषद् मुख्यतः संन्यास धर्म पर केंद्रित है। इसमें ब्रह्मचर्य, गार्हस्थ्य, वानप्रस्थ और संन्यास – चार आश्रमों का विवेचन है, और संन्यास को सर्वोच्च बताया गया है।
उपनिषद् में याज्ञवल्क्य और जाबालि ऋषि के संवाद के माध्यम से संन्यास की दीक्षा, वस्त्र, और आचार के नियम बताए गए हैं। इसमें "ब्रह्मविद्याप्राप्तये" (ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के लिए) संन्यास लेने का विधान है।
जाबालोपनिषद् में कहा गया है कि संन्यासी को "अभय", "अहिंसा", और "सत्य" का पालन करना चाहिए। यह उपनिषद् वेदांत के संन्यास परंपरा का आधार ग्रंथ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
जाबालोपनिषद् (Jabala Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
जाबालोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Jabala Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
70 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
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