भक्तिलोक ग्रंथालय
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सुबालोपनिषद् (Subalopanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

सुबालोपनिषद्

Subalopanishad
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65 पठन
hi भाषा
110 पृष्ठ

ब्रह्मविद्या और आत्मज्ञान की उपनिषद।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

सुबालोपनिषद् ऋग्वेदीय उपनिषद है। इसमें ब्रह्म, आत्मा, और प्रणव की व्याख्या है।
सुबालोपनिषद् में ॐ और आत्मतत्त्व का गहन विश्लेषण है।

सुबालोपनिषद् एक प्रमुख उपनिषद है जो ऋग्वेद से संबंधित है। इसमें ब्रह्मविद्या, प्रणव (ॐ) का महत्व, और आत्मा के स्वरूप का विस्तार से वर्णन है। यह उपनिषद सुबाल ऋषि के प्रश्नों और उनके उत्तरों के रूप में है।

इसमें शरीर के पांच तत्वों, तीन अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति), और तुरीय की स्थिति का विवेचन किया गया है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
सुबालोपनिषद् (Subalopanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
सुबालोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Subalopanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
110 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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