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गरुड़ पुराण (Garuda Purana) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
पुराण

गरुड़ पुराण

Garuda Purana
0 कुल अध्याय
76 पठन
hi भाषा
1050 पृष्ठ

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद प्रेत को मुक्ति के लिए श्राद्ध आवश्यक है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

गरुड़ पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। इसमें मृत्यु, नरक, और प्रेतकर्म का वर्णन है।
गरुड़ पुराण मृत्यु के बाद की यात्रा का विस्तृत वर्णन करता है।

गरुड़ पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के संवाद के रूप में है। यह पुराण विशेष रूप से मृत्यु, पुनर्जन्म, नरकों के वर्णन, और प्रेतकर्म (अंत्येष्टि संस्कार) के लिए प्रसिद्ध है। यह दो भागों में विभक्त है – पूर्वखंड और प्रेतकल्प (उत्तरखंड)।

पूर्वखंड में सृष्टि, व्रत, तीर्थ, दान, और आयुर्वेद का वर्णन है। प्रेतकल्प में मृत्यु के बाद की यात्रा, यमदूत, नरकों के कष्ट, और प्रेतों को मुक्ति देने के लिए श्राद्ध, पिंडदान, और गयाश्राद्ध की विधियाँ विस्तार से दी गई हैं। इस पुराण में "गरुड़ पुराण सार" भी है जो मृत्यु के बाद की प्रक्रियाओं का सारांश देता है।

गरुड़ पुराण को मृत्यु के बाद दसवें दिन पढ़ने की परंपरा है। यह ग्रंथ जीवन की अनित्यता, कर्मफल और मोक्ष का उपदेश देता है।

हमारा हिंदी संस्करण मूल श्लोकों के साथ सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ उन सभी के लिए उपयोगी है जो मृत्यु संस्कार, श्राद्ध और आध्यात्मिक मुक्ति के विषय में जानना चाहते हैं।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
गरुड़ पुराण (Garuda Purana) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
गरुड़ पुराण
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Garuda Purana
श्रेणी (Category)
पुराण
पृष्ठ संख्या (Pages)
1050 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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