ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
शंकरभाष्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र का सबसे प्रसिद्ध भाष्य है। यह अद्वैत वेदांत का आधारभूत ग्रंथ है। शंकराचार्य ने इस भाष्य में ब्रह्मसूत्र के ५५५ सूत्रों की व्याख्या अद्वैत दृष्टि से की है।
शंकरभाष्य में ब्रह्म को निर्गुण, निराकार, सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध किया गया है। जीव और ब्रह्म की अभिन्नता (जीवब्रह्मैक्य) का प्रतिपादन किया गया है। जगत को मिथ्या (माया) बताया गया है। मोक्ष के साधन के रूप में ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) को ही एकमात्र उपाय माना गया है।
शंकरभाष्य पर बाद में वाचस्पति मिश्र, पद्मपाद, सुरेश्वराचार्य आदि ने टीकाएँ लिखीं। यह ग्रंथ अद्वैत वेदांत का सबसे प्रभावशाली ग्रंथ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत भाष्य के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ अद्वैत दर्शन के अध्ययन, साधना, और शोध के लिए अनिवार्य है।