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विमान शास्त्र (Vimana Shastra) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
प्राचीन विज्ञान

विमान शास्त्र

Vimana Shastra
0 कुल अध्याय
54 पठन
hi भाषा
350 पृष्ठ

विमान शास्त्र के अनुसार प्राचीन भारत में उड़ने वाले यान थे।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

विमान शास्त्र महर्षि भरद्वाज द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथ है। इसमें विमानों के निर्माण, धातुओं, और उड़ान तकनीक का वर्णन है।
विमान शास्त्र भारतीय वैमानिकी परंपरा का दस्तावेज है।

विमान शास्त्र एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है जो विमानों (उड़ने वाले यानों) की रचना, निर्माण, और संचालन का वर्णन करता है। इसे महर्षि भरद्वाज द्वारा रचित माना जाता है। इस ग्रंथ में विभिन्न प्रकार के विमानों के नाम, उनके निर्माण में प्रयुक्त धातुएँ, ईंधन, यंत्र, और उड़ान के तकनीकी पहलुओं का विस्तृत विवरण है।

विमान शास्त्र के अनुसार विमान सात प्रकार के होते हैं – रुक्म, सुंदर, शकुना, रुक्मवती, शक्ति, पुष्पक, और त्रिपुर। इनमें से पुष्पक विमान रावण का प्रसिद्ध विमान था। इस ग्रंथ में धातु विज्ञान, यंत्र विज्ञान, और प्रणोदन प्रणाली की जानकारी दी गई है।

हालाँकि इस ग्रंथ की प्राचीनता पर विद्वानों में मतभेद है, फिर भी यह भारतीय विज्ञान परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ग्रंथ वैमानिकी, धातु विज्ञान, और प्राचीन तकनीकी ज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए अत्यंत रोचक है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ विमानों की संरचना, धातुओं के गुण, और यंत्रों की व्याख्या दी गई है। यह संस्करण शोधार्थियों, वैज्ञानिकों, और प्राचीन तकनीकी ज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
विमान शास्त्र (Vimana Shastra) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
विमान शास्त्र
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Vimana Shastra
श्रेणी (Category)
प्राचीन विज्ञान
पृष्ठ संख्या (Pages)
350 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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