भक्तिलोक ग्रंथालय
ग
गौडपादकारिका (Gaudapada Karika) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

गौडपादकारिका

Gaudapada Karika
0 कुल अध्याय
68 पठन
hi भाषा
220 पृष्ठ

गौडपादकारिका के अनुसार जगत माया है, ब्रह्म ही सत्य है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

गौडपादकारिका आचार्य गौडपाद का ग्रंथ है। इसमें अद्वैत वेदांत के अजातिवाद, माया और ब्रह्म-आत्मा की अभिन्नता का वर्णन है।
गौडपादकारिका अद्वैत वेदांत का प्राचीनतम ग्रंथ है।

गौडपादकारिका आचार्य गौडपाद द्वारा रचित अद्वैत वेदांत का प्राचीनतम और प्रथम व्यवस्थित ग्रंथ है। यह माण्डूक्य उपनिषद् पर आधारित है। इसमें चार अध्याय (प्रकरण) हैं – आगमप्रकरण, वैतथ्यप्रकरण, अद्वैतप्रकरण, और अलातशान्तिप्रकरण। कुल २१५ कारिकाएँ हैं।

गौडपाद ने इस ग्रंथ में अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांत – अजातिवाद (जगत का अनुत्पन्न होना), माया, ब्रह्म और आत्मा की अभिन्नता, और उपनिषदों के महावाक्यों (तत्त्वमसि, अहं ब्रह्मास्मि) का सूक्ष्म विवेचन प्रस्तुत किया है। चौथे अध्याय (अलातशान्ति) में योग और अद्वैत का समन्वय दिखता है।

गौडपादकारिका अद्वैत वेदांत की आधारशिला है। शंकराचार्य ने इस पर भाष्य लिखकर अद्वैत दर्शन को सुस्थापित किया।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल कारिकाओं के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ अद्वैत दर्शन के अध्ययन, साधना, और शोध के लिए अनिवार्य है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
गौडपादकारिका (Gaudapada Karika) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
गौडपादकारिका
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Gaudapada Karika
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
220 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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