ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
वाराह पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान विष्णु के वाराह अवतार पर केंद्रित है। इसमें सृष्टि, वाराह कथा, तीर्थों का माहात्म्य, व्रत, दान और मोक्ष का वर्णन है। यह पुराण वैष्णव और शैव दोनों परंपराओं का समन्वय करता है।
वाराह पुराण में २२४ अध्याय हैं। इसमें भगवान वाराह द्वारा पृथ्वी को उद्धार करने की कथा, व्रतों (जैसे एकादशी, जन्माष्टमी) की विधि, तीर्थों (गया, प्रयाग, काशी) का महात्म्य, और शिव-पार्वती संवाद के माध्यम से धर्मोपदेश दिया गया है। इसमें एक अलग खंड "सनत्कुमारसंहिता" भी है।
वाराह पुराण में भक्ति, ज्ञान और कर्म का संतुलन बताया गया है। इसे पढ़ने से सभी पाप नष्ट होते हैं और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
हमारा हिंदी संस्करण मूल श्लोकों के साथ सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ तीर्थयात्रियों, व्रत करने वालों और धार्मिक अध्ययन करने वालों के लिए उपयोगी है।