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पदार्थधर्मसंग्रह (Padarthadharmasamgraha) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

पदार्थधर्मसंग्रह

Padarthadharmasamgraha
0 कुल अध्याय
58 पठन
hi भाषा
500 पृष्ठ

पदार्थधर्मसंग्रह के अनुसार पदार्थों का ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

पदार्थधर्मसंग्रह प्रशस्तपाद का वैशेषिक दर्शन का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें छह पदार्थों, नौ द्रव्यों और गुणों का विस्तृत विवरण है।
पदार्थधर्मसंग्रह में द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय का विश्लेषण है।

पदार्थधर्मसंग्रह आचार्य प्रशस्तपाद द्वारा रचित वैशेषिक दर्शन का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है। यह कणाद के वैशेषिकसूत्र पर एक व्यवस्थित टीका है। इसमें छह पदार्थों (द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय) का विस्तृत वर्णन किया गया है।

प्रशस्तपाद ने सूत्रों की संक्षिप्त शैली को विस्तार देकर वैशेषिक दर्शन को सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया। इसमें नौ द्रव्यों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा, मन) का विश्लेषण, गुणों (रूप, रस, गंध, स्पर्श आदि) का वर्गीकरण, कर्म के पाँच प्रकार (उत्क्षेपण, अपक्षेपण, आकुंचन, प्रसारण, गमन), और सामान्य, विशेष, समवाय का स्वरूप स्पष्ट किया गया है।

पदार्थधर्मसंग्रह न्याय-वैशेषिक दर्शन के अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इस पर आगे कई टीकाएँ लिखी गईं, जिनमें व्योमशिव का व्योमवती, उदयनाचार्य का किरणावली, और श्रीधर का न्यायकन्दली प्रमुख हैं।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत पाठ के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ न्याय-वैशेषिक दर्शन, भारतीय तत्वमीमांसा, और वैज्ञानिक चिंतन के इतिहास के अध्ययन के लिए अनिवार्य है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
पदार्थधर्मसंग्रह (Padarthadharmasamgraha) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
पदार्थधर्मसंग्रह
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Padarthadharmasamgraha
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
500 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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