ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
गोपालतापनीयोपनिषद् अथर्ववेद से संबद्ध है और यह कृष्ण भक्ति पर केंद्रित है। यह उपनिषद् दो भागों में है – पूर्वतापनी और उत्तरतापनी। इसमें गोपाल (कृष्ण) को सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
उपनिषद् में गोपाल मंत्र "क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय नमः" आदि का विस्तृत विवेचन है। इसमें कृष्ण के विभिन्न रूपों, उनकी लीलाओं, और उनकी उपासना की विधियाँ बताई गई हैं। गोपाल को "आनन्द" और "बालक" रूप में वर्णित किया गया है।
गोपालतापनीयोपनिषद् विशेष रूप से वैष्णव परंपरा, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के लिए महत्वपूर्ण है। यह उपनिषद् कृष्ण नाम जप और भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताती है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।