ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
अग्नि पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान अग्नि द्वारा ऋषियों को उपदेशित ग्रंथ है। यह पुराण विश्वकोशीय शैली में रचित है – इसमें धर्म, राजनीति, आयुर्वेद, अलंकार, ज्योतिष, वास्तु, साहित्य, और मोक्ष का विस्तृत वर्णन है।
अग्नि पुराण में ३८३ अध्याय हैं। प्रारंभ में सृष्टि की रचना, वंशावली, और अवतारों का वर्णन है। इसके बाद राजधर्म, नीति, दण्डविधान जैसे विषय आते हैं। आयुर्वेद का एक बड़ा खंड है जिसमें रोगों का निदान, औषधियाँ और स्वास्थ्य रक्षा के उपाय बताए गए हैं। अलंकार शास्त्र में काव्य के प्रकार, रस, छंद और व्याकरण का उल्लेख है। ज्योतिष खंड में ग्रहों के फल, मुहूर्त और सामुद्रिक शास्त्र (हस्तरेखा) का वर्णन है।
इस पुराण में स्तोत्रों का भी संग्रह है – शिव सहस्रनाम, विष्णु सहस्रनाम, देवी स्तोत्र आदि। उत्तर भाग में योग, प्राणायाम और मोक्ष के सिद्धांत बताए गए हैं। अग्नि पुराण को पढ़ने से ज्ञान के सभी क्षेत्रों में पारंगत होने की मान्यता है।
हमारा हिंदी संस्करण मूल श्लोकों के साथ सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ शोधार्थियों, साधकों और जिज्ञासुओं के लिए अद्वितीय है।