भक्तिलोक ग्रंथालय
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ईश्वरप्रत्यभिज्ञा (Ishvara Pratyabhijna) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

ईश्वरप्रत्यभिज्ञा

Ishvara Pratyabhijna
0 कुल अध्याय
136 पठन
hi भाषा
225 पृष्ठ

कश्मीर शैव दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ – प्रत्यभिज्ञा सिद्धांत।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

ईश्वरप्रत्यभिज्ञा कश्मीर शैव दर्शन का मूल ग्रंथ है जो चैतन्य की पहचान और ईश्वर-जीव की एकता को स्थापित करता है।
उत्पलदेवाचार्य का ईश्वरप्रत्यभिज्ञा – हिंदी अनुवाद।

ईश्वरप्रत्यभिज्ञा कश्मीर शैव दर्शन का प्रमुख ग्रंथ है, जिसे उत्पलदेवाचार्य ने रचा है। यह ग्रंथ “प्रत्यभिज्ञा” (पहचान) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें जीव अपने शुद्ध चैतन्य स्वरूप को पहचानता है।

इस पुस्तक में मूल कारिकाओं का हिंदी अनुवाद, भाष्य और विस्तृत व्याख्या दी गई है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
ईश्वरप्रत्यभिज्ञा (Ishvara Pratyabhijna) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
ईश्वरप्रत्यभिज्ञा
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Ishvara Pratyabhijna
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
225 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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