भक्तिलोक ग्रंथालय
ग
गन्धर्ववेद (Gandharvaveda) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपवेद

गन्धर्ववेद

Gandharvaveda
0 कुल अध्याय
71 पठन
hi भाषा
400 पृष्ठ

इसके सिद्धांतों पर भरतमुनि का नाट्यशास्त्र आधारित है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

गन्धर्ववेद सामवेद का उपवेद है, जो संगीत, नृत्य और नाट्य कला का प्राचीन शास्त्र है।
गन्धर्ववेद भारतीय संगीत और नाट्य परंपरा का आधार है।

गन्धर्ववेद संगीत, नृत्य और नाट्य कला का प्राचीन शास्त्र है। इसे सामवेद का उपवेद माना जाता है। इस ग्रंथ में स्वर, राग, ताल, वाद्य यंत्र, नृत्य की मुद्राएँ, अभिनय, और रस-सिद्धांत का विस्तृत वर्णन है। गन्धर्ववेद के आधार पर ही बाद में भरतमुनि ने "नाट्यशास्त्र" की रचना की, जो संगीत, नृत्य और नाट्य का सर्वांगीण ग्रंथ है।

गन्धर्ववेद में गायन के लिए सप्त स्वर (षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद) और उनके शुद्ध एवं विकृत रूपों का वैज्ञानिक विश्लेषण है। तालों की गणना, वाद्य यंत्रों के निर्माण और वादन-विधि, तथा नृत्य के विभिन्न भेदों (तांडव, लास्य) का भी विवेचन है। यह ग्रंथ केवल कला-शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि भाव-अभिव्यक्ति, मनोविज्ञान, और रस-निष्पत्ति के सिद्धांतों का भी ज्ञान देता है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में गन्धर्ववेद के मूल सूत्रों के साथ संगीत-सिद्धांत, नृत्य-कला और नाट्य-विधान का सरल विवेचन किया गया है। यह पुस्तक संगीतकारों, नर्तकों, नाट्यकलाकारों और भारतीय कला-परंपरा के अध्येताओं के लिए अमूल्य है।

सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लोकप्रिय अध्याय (Top 20 Chapters)

लोकप्रिय अध्यायों की सूची उपलब्ध नहीं है।

ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
गन्धर्ववेद (Gandharvaveda) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
गन्धर्ववेद
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Gandharvaveda
श्रेणी (Category)
उपवेद
पृष्ठ संख्या (Pages)
400 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

सभी अध्याय सूची (All Chapters Directory)

अध्याय अभी संकलित किए जा रहे हैं।