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श्वेताश्वतरोपनिषद् (Shvetashvatara Upanishad) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

श्वेताश्वतरोपनिषद्

Shvetashvatara Upanishad
0 कुल अध्याय
52 पठन
hi भाषा
175 पृष्ठ

श्वेताश्वतरोपनिषद् में योग और ईश्वर की स्तुति प्रमुख है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

श्वेताश्वतरोपनिषद् में भक्ति, योग और ईश्वर के अस्तित्व पर विशेष बल दिया गया है।
श्वेताश्वतरोपनिषद् में प्रकृति-पुरुष और भक्ति का समन्वय है।

श्वेताश्वतरोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध है। यह उपनिषद् विशेष रूप से भक्ति, योग और ईश्वर के अस्तित्व पर जोर देती है। इसमें छह अध्याय हैं, जिनमें सांख्य, योग और वेदांत का समन्वय दिखता है।

इस उपनिषद् में "रुद्र" को सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में स्तुति की गई है। इसमें योग के मार्ग से आत्मा और परमात्मा के एकत्व का उपदेश है। प्रसिद्ध मंत्र "सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि" (सभी भूतों में आत्मा को और सभी भूतों को आत्मा में देखना) यहाँ से लिया गया है।

श्वेताश्वतरोपनिषद् में प्रकृति और पुरुष के संबंध का भी विवेचन है। यह उपनिषद् वेदांत के साथ-साथ भक्ति परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसमें ईश्वर को "स्वतंत्र" और "सर्वज्ञ" बताया गया है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
श्वेताश्वतरोपनिषद् (Shvetashvatara Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
श्वेताश्वतरोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Shvetashvatara Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
175 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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