भक्तिलोक ग्रंथालय
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हारीत संहिता (Harita Samhita) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
आयुर्वेद

हारीत संहिता

Harita Samhita
0 कुल अध्याय
53 पठन
hi भाषा
540 पृष्ठ

इसमें लोहा, स्वर्ण, रजत आदि धातुओं के भस्मीकरण के नियम हैं।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

हारीत संहिता आयुर्वेद का प्राचीन ग्रंथ है। इसमें रसायन, वाजीकरण, धातु-भस्म और पंचकर्म का वर्णन है।
हारीत संहिता में आयुर्वेद के अष्टांग का समन्वय है।

हारीत संहिता आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में से एक है, जिसके रचयिता महर्षि हारीत माने जाते हैं। यह ग्रंथ आयुर्वेद के अष्टांग (आठ अंगों) का समन्वित रूप प्रस्तुत करता है। इसमें सात स्थान हैं – सूत्रस्थान, निदानस्थान, विमानस्थान, शारीरस्थान, चिकित्सास्थान, कल्पस्थान, और उत्तरस्थान। हारीत संहिता में विशेष रूप से रसायन (रासायनिक औषधियाँ) और वाजीकरण (वीर्य-वर्धक) चिकित्सा का विस्तृत वर्णन है।

यह ग्रंथ पंचकर्म, स्वस्थवृत्त, आहार-विहार, और दैनिकचर्या पर भी प्रकाश डालता है। हारीत संहिता की एक विशेषता है – "लोहादि धातुओं का भस्मीकरण और उपयोग", जिसमें धातु-औषधियों के निर्माण और चिकित्सीय प्रयोग के नियम दिए गए हैं। इसमें विभिन्न रोगों के लिए मिश्रित औषधि-योगों और मर्म चिकित्सा का भी वर्णन है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ आयुर्वेद के शोधार्थियों, रसशास्त्रियों और चिकित्सकों के लिए उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
हारीत संहिता (Harita Samhita) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
हारीत संहिता
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Harita Samhita
श्रेणी (Category)
आयुर्वेद
पृष्ठ संख्या (Pages)
540 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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