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सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
दर्शन

सांख्यकारिका

Samkhya Karika
0 कुल अध्याय
60 पठन
hi भाषा
200 पृष्ठ

सांख्यकारिका के अनुसार प्रकृति और पुरुष के विवेक से मोक्ष मिलता है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

सांख्यकारिका ईश्वरकृष्ण का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें प्रकृति-पुरुष विवेक, पच्चीस तत्व, और कैवल्य का वर्णन है।
सांख्यकारिका में सत्कार्यवाद और तीन गुणों का सिद्धांत है।

सांख्यकारिका ईश्वरकृष्ण द्वारा रचित सांख्य दर्शन का सबसे प्राचीन और सुव्यवस्थित ग्रंथ है। यह ७२ कारिकाओं में सांख्य दर्शन के मूल सिद्धांतों – प्रकृति-पुरुष विवेक, सत्कार्यवाद, पच्चीस तत्वों की उत्पत्ति, और कैवल्य (मोक्ष) का संक्षिप्त एवं स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करता है।

सांख्यकारिका के अनुसार जगत की उत्पत्ति प्रकृति (मूल प्रकृति) से होती है। प्रकृति में तीन गुण – सत्त्व, रजस, तमस – होते हैं। प्रकृति के सत्त्व गुण से महत्तत्व, फिर अहंकार, फिर ग्यारह इंद्रियाँ और पाँच सूक्ष्म तन्मात्राएँ, और अंत में पाँच महाभूत उत्पन्न होते हैं। पुरुष चैतन्य तत्व है, जो प्रकृति से सर्वथा भिन्न है। जब पुरुष प्रकृति के साथ अपने संयोग को समझकर विवेक प्राप्त कर लेता है, तब वह कैवल्य (मोक्ष) को प्राप्त होता है।

सांख्यकारिका भारतीय दर्शन के सबसे प्रभावशाली ग्रंथों में से एक है। इसका प्रभाव योग, वेदांत, और भागवत जैसे ग्रंथों पर स्पष्ट दिखता है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत कारिकाओं के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह ग्रंथ दर्शनशास्त्र के छात्रों, साधकों, और शोधार्थियों के लिए अमूल्य है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
सांख्यकारिका
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Samkhya Karika
श्रेणी (Category)
दर्शन
पृष्ठ संख्या (Pages)
200 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
26 September 2026

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