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माता की आरती (Mata Ki Aarti) – Lyrics in Hindi | Jai Ambe Gauri

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
५-७ मिनट पठन अवधि
हिन्दी आरती भाषा
परंपरागत रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ माता की आरती (Mata Ki Aarti) – Lyrics in Hindi | Jai Ambe Gauri ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

🙏 माता की आरती

(Mata Ki Aarti) – प्रसिद्ध दुर्गा आरती

जय अम्बे गौरी मैया ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: माता की आरती / दुर्गा आरती
📍 भाव: शक्ति, आराधना, रक्षा

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

जय अम्बे गौरी मैया, जय श्यामा गौरी।
तुम ही हो भवानी, तुम ही जगत जननी॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

सिंदूर सोहत माँग, मृगमद की टीका।
उज्ज्वल दोउ नैना, चन्द्रवदन नीका॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

शेरोंवाली माता, दुष्टों को दलती।
भक्तों की रखवाली, सदा सुख फलती॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

अम्बे तू है जगदम्बे, काली जय दुर्गे।
खप्पर कटारी वाली, शोभित भुज चतुर्गे॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम-निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

माता की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह आरती माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। “माता की आरती” के माध्यम से भक्त माँ से सुख, समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करते हैं। आरती में माँ के विभिन्न स्वरूपों – अम्बे, गौरी, श्यामा, भवानी, जगदम्बा, काली, दुर्गा – का वर्णन है।

माँ सिंदूर सजी माँग, मृगमद की टीका और उज्जवल नेत्रों से विराजमान हैं। वे शेर पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्टों का संहार करती हैं। आरती के अंत में कहा गया है कि जो कोई इस आरती को गाता है, उसे सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

नवरात्रि की आराधना: यह आरती नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना में विशेष रूप से गाई जाती है।

शक्ति की उपासना: माँ आदि शक्ति हैं – यह आरती उनके सौम्य एवं उग्र दोनों स्वरूपों का वर्णन करती है।

रक्षा और समृद्धि: नियमित पाठ से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सभी विघ्न दूर होते हैं।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

माँ सभी भक्तों पर सदा कृपा बरसाती हैं। यह आरती उनके प्रति समर्पण और विश्वास को दर्शाती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो माँ की शक्ति और करुणा से अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय अम्बे गौरी मैया ।।

॥ इति श्रीमाता की आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय अम्बे गौरी मैया ।।

१. माता की आरती (Mata Ki Aarti) – Lyrics in Hindi | Jai Ambe Gauri का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री माता के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

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भगवान श्री माता जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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