पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री विष्णु आरती
332 पाठ

ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) – Lyrics in Hindi

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
५-७ मिनट पठन अवधि
हिन्दी आरती भाषा
परंपरागत रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) – Lyrics in Hindi ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

🙏 ॐ जय जगदीश हरे

(Om Jai Jagdish Hare) – प्रसिद्ध विष्णु आरती

सबसे लोकप्रिय आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: विष्णु आरती / भगवान विष्णु
📍 भाव: आस्था, समर्पण, कृपा

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।
स्वामी ठाकुर तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

तन मन धन सब कुछ है तेरा।
स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझ को अर्पण, क्या लागे मेरा॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह सर्वाधिक लोकप्रिय आरती भगवान विष्णु (जगदीश) को समर्पित है। "ॐ जय जगदीश हरे" – विश्व के स्वामी भगवान विष्णु की जय हो। वे भक्तों के सभी संकटों को क्षणभर में दूर करने वाले हैं।

आरती में भक्त की विनती है – माता-पिता की तरह आप ही मेरे सहारा हैं, आपके अतिरिक्त और कोई आसरा नहीं। आप परमात्मा, अन्तर्यामी, करुणासागर और पालनकर्ता हैं। भक्त अपने तन, मन, धन सब कुछ उन्हें समर्पित कर देता है।

यह आरती भक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम है। इसे गाने से मन को शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

सार्वभौमिक आरती: यह आरती लगभग सभी हिन्दू पूजा-अनुष्ठानों में गाई जाती है, चाहे व्रत हो या त्योहार। इसे "सार्वजनिक आरती" भी कहा जाता है।

विष्णु के स्वरूप: भगवान विष्णु को जगदीश (जगत के ईश्वर) कहा गया है। वे सृष्टि के पालनहार हैं और भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं।

भक्ति का मार्ग: इस आरती में नवधा भक्ति के सभी तत्व समाहित हैं – श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वन्दन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

भगवान जगदीश सबके दुःख हरते हैं। सच्चे मन से की गई यह आरती भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो भगवान विष्णु की कृपा से अपने जीवन में सुख-शांति और मोक्ष की कामना रखते हैं।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।

॥ इति श्रीविष्णु आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे ।।

१. ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) – Lyrics in Hindi का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री विष्णु के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

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भगवान श्री विष्णु जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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