पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री आदि शक्ति आरती
218 पाठ

जय आदि शक्ति माता आरती (Jai Adi Shakti Aarti) – Lyrics in Hindi

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

पारंपरिक शास्त्रीय राग / ताल
५-७ मिनट पठन अवधि
हिन्दी आरती भाषा
परंपरागत रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ जय आदि शक्ति माता आरती (Jai Adi Shakti Aarti) – Lyrics in Hindi ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

🙏 जय आदि शक्ति माता

(Jai Adi Shakti Mata) – आदिशक्ति की आरती

आदि शक्ति आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन / शाक्त
🏷️ श्रेणी: आदि शक्ति / दुर्गा आरती
📍 भाव: शक्ति, सृजन, पालन, संहार

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता॥

सृष्टि के आदि में तुम, निर्गुण से सगुण हुई।
प्रकृति प्रधान बनी, जगत जननी कहलाई॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, तीनों रूप तुम्हारे।
शिवा, राधा, सीता, सब अवतार प्यारे॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही काली कंकाली, तुम भैरवी भवानी।
तुम ही जगदम्बा, जग की कल्याणी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम बिना सब सूनी, तुमसे सब भरा है।
जीव तुम्हारी माया, तुमसे जग ठहरा है॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

तुम ही सृष्टि करती, तुम ही पालनहारी।
प्रलय काल में तुम ही, सबको अपन धारी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

भक्त जनों के संकट, तुरंत हरने वाली।
सुख-सम्पत्ति देकर, मनवांछित फल देनी॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

जय आदि शक्ति माता, जय जय आदि शक्ति माता।
ब्रह्मा विष्णु महेश, तुम से जगाता॥

✍️ परंपरागत आरती (शाक्त परंपरा)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

"जय आदि शक्ति माता" – यह आरती आदिशक्ति, जो सृष्टि की मूल ऊर्जा हैं, की स्तुति करती है। आदि शक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। वे दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में त्रिदेवियों में प्रकट होती हैं और सभी अवतारों की आधारभूता हैं।

यह आरती बताती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड आदि शक्ति की माया से संचालित है। वे भक्तों के संकट हरने वाली, सुख-सम्पत्ति देने वाली और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली हैं।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

आदि शक्ति – सृष्टि की मूल ऊर्जा: आदि शक्ति को सभी देवी स्वरूपों की जननी माना गया है। यह आरती उनके सगुण-निर्गुण दोनों रूपों का वर्णन करती है।

त्रिदेवियों का एकीकृत रूप: दुर्गा (शक्ति), लक्ष्मी (संपत्ति), सरस्वती (ज्ञान) – ये तीनों ही आदि शक्ति के ही विभिन्न स्वरूप हैं। यह आरती इस एकता को दर्शाती है।

सृजन, स्थिति और संहार: आदि शक्ति ही सृष्टि की रचयिता, पालनहारी और संहारकर्त्री हैं। यह आरती उनके इस त्रिकाल व्यापी स्वरूप की आराधना है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

आदि शक्ति की उपासना से भक्त को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों क्षेत्रों में सफलता मिलती है। यह आरती साधक को शक्ति, साहस और समृद्धि प्रदान करती है।

✨ आस्था का प्रतीक

जो भक्त नियमपूर्वक इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी विघ्न-बाधाएँ दूर हो जाती हैं और माँ आदि शक्ति की असीम कृपा की वर्षा होती है।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ।। जय आदि शक्ति माता ।।

॥ इति श्रीआदिशक्तिआरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय आदि शक्ति माता ।।

१. जय आदि शक्ति माता आरती (Jai Adi Shakti Aarti) – Lyrics in Hindi का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री आदि शक्ति के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री आदि शक्ति जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री आदि शक्ति की समस्त आरतियाँ