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प्रयागराज का विश्व प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर (बड़े हनुमान जी): इतिहास, कथा और दर्शन (Prayagraj's Famous Bade Hanuman Temple: History, Story and Darshan)

17,379 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🙏 प्रयागराज का लेटे हुए हनुमान मंदिर (बड़े हनुमान जी)

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

त्रिवेणी संगम के पास विराजे विश्राम मुद्रा में हनुमान

प्रयागराज (इलाहाबाद) का अद्वितीय एवं विश्व प्रसिद्ध धाम

🌟 परिचय: बड़े हनुमान मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में पवित्र त्रिवेणी संगम के निकट स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर, जिसे बड़े हनुमान मंदिर या किले वाले हनुमान के नाम से भी जाना जाता है, सम्पूर्ण विश्व में अपनी अद्भुत मुद्रा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान हनुमान के उस अद्वितीय स्वरूप को समर्पित है, जहाँ वे लेटी हुई (शयन) मुद्रा में विराजमान हैं।

यहाँ स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा लगभग 20 फीट लंबी है और यह अपने आप में अत्यंत दुर्लभ एवं चमत्कारी मानी जाती है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहाँ हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। संगम में डुबकी लगाने के बाद यहाँ दर्शन करना श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से जुड़ी एक प्राचीन परंपरा रही है।

मान्यता है कि यह मंदिर सदियों पुराना है और इसका गहरा पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। यह केवल एक पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि अपार विश्वास, चमत्कारों और अखंड भक्ति का प्रतीक है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित यह विशाल प्रतिमा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है और अलौकिक शांति का अनुभव कराती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

यह प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में, पवित्र त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित है। यह स्थल प्राचीन अकबर के किले के पास है, जिस कारण इसे 'किले वाले हनुमान' भी कहा जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज शहर का मध्य भाग।
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (प्रयागराज मुख्य रेलवे स्टेशन) से लगभग 6-7 किमी दूर। टैक्सी या ऑटो द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। वाराणसी, लखनऊ, कानपुर आदि से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 12-15 किलोमीटर दूर है।
🗺️

किला परिसर, संगम तट, प्रयागराज

प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~7 किमी
त्रिवेणी संगम से दूरी: निकटवर्ती

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

🔱 लंका विजय के बाद का विश्राम

मंदिर से जुड़ी सबसे प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की और अशोक वाटिका से माता सीता को मुक्त कराया, तब अत्यंत थके हुए हनुमान जी ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। ऐसी मान्यता है कि लंका विजय के उपरांत भगवान राम ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि वे यहाँ सदा विश्राम की मुद्रा में विराजित रहेंगे और उनके दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर होंगे। तभी से हनुमान जी यहाँ लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं।

🙏 अहिरावण और कामदा देवी का दमन

इस मूर्ति की एक और विशेषता है। मान्यता है कि हनुमान जी के बाएं पैर के नीचे अहिरावण (रावण का पुत्र या मायावी राक्षस) और दाएं पैर के नीचे कामदा देवी स्थित हैं। कथा के अनुसार, अहिरावण ने भगवान राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद हनुमान जी ने पाताल लोक में जाकर उसका वध किया और अपने प्रभुओं को मुक्त कराया। उसी विजय के प्रतीक स्वरूप हनुमान जी के चरणों में अहिरावण और उसकी शक्ति कामदा देवी दबे हुए हैं।

कहा जाता है कि यह मूर्ति सदियों से यहाँ विद्यमान है, और अकबर के किले के निर्माण के समय भी यह मूर्ति पहले से मौजूद थी। किले का निर्माण करते समय इस स्थान को अछूता छोड़ दिया गया, जिससे यह मंदिर आज भी किले के भीतर स्थित है।

🙏

"जहाँ विश्राम करते हैं संकटमोचन"

मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से यहाँ आता है, हनुमान जी स्वयं उसके सपने में आकर उसकी समस्याओं का समाधान बताते हैं।

🏛️ अद्भुत वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 20 फीट लंबी शयन मुद्रा में प्रतिमा

बड़े हनुमान मंदिर की वास्तुकला का सबसे प्रमुख और अद्भुत आकर्षण भगवान हनुमान की 20 फीट लंबी विशाल प्रतिमा है जो शयन (लेटी हुई) मुद्रा में है। समूचे भारत में हनुमान जी के इस स्वरूप का अन्यत्र दर्शन दुर्लभ है। प्रतिमा के शरीर पर चांदी का कवच और सजावट देखते ही बनती है। भक्त दूर से ही इस विशाल प्रतिमा के दर्शन कर लाभान्वित होते हैं।

🛡️ अहिरावण और कामदा देवी

जैसा कि पौराणिक कथा में वर्णित है, मूर्ति के बाएं पैर के नीचे अहिरावण और दाएं पैर के नीचे कामदा देवी आकृतियाँ स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। यह दृश्य हनुमान जी की बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और भक्तों में अटूट विश्वास जगाता है।

🏰 किले के भीतर स्थित मंदिर

यह मंदिर प्राचीन अकबर के किले के भीतर स्थित है। यही कारण है कि इसे 'किले वाले हनुमान' भी कहा जाता है। किले के विशाल प्रवेश द्वार से होकर मंदिर तक पहुंचा जाता है। माना जाता है कि किले का निर्माण करते समय इस मंदिर को क्षति न पहुंचे, इसलिए इसे सुरक्षित रखा गया।

🔔 गर्भगृह और दर्शन

मंदिर का गर्भगृह भी विशाल है ताकि इस विशाल प्रतिमा को समाहित किया जा सके। भक्त लाइन में लगकर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं और हनुमान जी के सिर वाले हिस्से से पैरों तक जाते हुए दर्शन करते हैं। मंदिर में हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को यहाँ भारी भीड़ होती है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • संकट नाशक: ऐसी अटूट मान्यता है कि बड़े हनुमान जी के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी संकट, भय और दुःख दूर हो जाते हैं।
  • स्वप्न में उपदेश: अनेक भक्तों का अनुभव है कि जब वे किसी गंभीर समस्या से ग्रस्त होते हैं और यहाँ आकर सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, तो हनुमान जी उनके स्वप्न में आकर मार्गदर्शन करते हैं।
  • भूत-प्रेत बाधा निवारण: ऐसा विश्वास है कि इस मंदिर में आने और हनुमान जी की शरण लेने से भूत-प्रेत की बाधा से मुक्ति मिलती है।
  • संगम स्नान के बाद दर्शन: प्रयागराज में संगम में पवित्र डुबकी लगाने के बाद बड़े हनुमान जी के दर्शन करना यात्रा को पूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इससे स्नान का पुण्य और अधिक बढ़ जाता है।
  • मनोकामना पूर्ति: भक्त यहाँ आकर अपनी मुरादें मांगते हैं और जब उनकी मनोकामना पूर्ण होती है, तो वे पुनः आकर हनुमान जी का आभार व्यक्त करते हैं और चोला चढ़ाते हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व

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हनुमान जयंती

चैत्र पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व यहाँ धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। भक्त दूर-दूर से आते हैं।

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मंगलवार और शनिवार

सप्ताह के ये दिन हनुमान जी को समर्पित हैं। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ विशेष श्रृंगार और भंडारों का आयोजन होता है। भक्त संकटमोचन के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं।

🌊

माघ मेला / कुंभ मेला

प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले एवं कुंभ के पवित्र अवसर पर तो यहाँ श्रद्धालुओं का अपार जनसागर उमड़ता है। संगम स्नान के बाद बड़े हनुमान जी के दर्शन हर श्रद्धालु की प्राथमिकता होती है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम यहाँ से बेहद नजदीक है। नाव द्वारा संगम तक जाया जा सकता है।
  • अकबर का किला (प्रयागराज किला): मंदिर जिस किले के भीतर स्थित है, वह मुगल सम्राट अकबर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक किला है।
  • पत्थर गिरजा (Allahabad St. Joseph's Cathedral): प्रयागराज का प्रसिद्ध गिरजाघर भी दर्शनीय है।
  • आनंद भवन: नेहरू परिवार की ऐतिहासिक कोठी, जो अब एक संग्रहालय है।
  • स्वराज भवन: मोतीलाल नेहरू द्वारा निर्मित यह भवन भी एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है।
  • अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आजाद पार्क): क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की स्मृति से जुड़ा यह पार्क शहर के बीचों-बीच स्थित है।
  • हनुमान मंदिर, अलीगंज: अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक और प्रसिद्ध हनुमान मंदिर।
📌 यात्रा टिप: सबसे पहले संगम में स्नान करें, फिर बड़े हनुमान जी के दर्शन करें। इसके बाद किले के अन्य हिस्सों और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

यहाँ यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, जिससे घूमना सुखद होता है। यदि आप माघ मेले या कुंभ के साक्षी बनना चाहते हैं, तो जनवरी-फरवरी में आना उचित रहेगा, लेकिन भीड़ अत्यधिक होगी।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी दर्शन करने जाएं, भीड़ कम होती है और मन शांत रहता है।
  • मंगलवार और शनिवार विशेष दिन हैं, लेकिन इन दिनों भीड़ अधिक हो सकती है, इसलिए समय का ध्यान रखें।
  • मंदिर के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध हो सकता है, सूचना अवश्य ले लें।
  • प्रसाद और पूजन सामग्री मंदिर के बाहर आसानी से मिल जाती है।
  • किले के भीतर प्रवेश हेतु सुरक्षा जांच हो सकती है, आधार कार्ड या पहचान पत्र साथ रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: लेटे हुए हनुमान मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में त्रिवेणी संगम के पास स्थित है। यह अकबर के किले के भीतर है।

प्रश्न 2: हनुमान जी की प्रतिमा कितनी लंबी है?

उत्तर: यहाँ विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा लगभग 20 फीट लंबी है और शयन मुद्रा में है।

प्रश्न 3: यहाँ क्या विशेष दिखता है?

उत्तर: हनुमान जी के बाएं पैर के नीचे अहिरावण और दाएं पैर के नीचे कामदा देवी की आकृतियाँ हैं, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।

प्रश्न 4: मंदिर खुलने का समय क्या है?

उत्तर: सामान्यतः मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है।

प्रश्न 5: क्या यहाँ प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 6: प्रयागराज कैसे पहुंचें?

उत्तर: प्रयागराज रेल, सड़क और हवाई मार्ग द्वारा देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 7: क्या किले के अंदर पर्यटकों के लिए कोई शुल्क है?

उत्तर: किले का अधिकांश भाग भारतीय सेना के नियंत्रण में है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कभी-कभी पहचान पत्र दिखाने की आवश्यकता हो सकती है। किले के अन्य भागों में जाने की अनुमति सीमित हो सकती है।

📝 निष्कर्ष: बड़े हनुमान जी के दर्शन का आध्यात्मिक लाभ

प्रयागराज का बड़े हनुमान मंदिर भारतीय आस्था और पौराणिक आख्यानों का एक अद्भुत जीवंत उदाहरण है। यहाँ 20 फीट लंबे लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन करना एक अविस्मरणीय अनुभव है। मंदिर से जुड़ी कथा (लंका विजय के बाद विश्राम, अहिरावण का वध) भक्तों में असीम विश्वास और ऊर्जा का संचार करती है।

जब भी आप प्रयागराज की यात्रा करें, त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के बाद इस पवित्र मंदिर में जरूर आएं। यहाँ की शांति, भक्ति का सागर, और संकटमोचक की अद्भुत मुद्रा आपके मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ जाएगी। चाहे आप किसी भी समस्या से ग्रस्त हों, बड़े हनुमान जी की शरण में आकर आप अवश्य ही आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।

🙏 हर हर महादेव ।। जय श्री राम ।। जय हनुमान ।।

🙏 बड़े हनुमान मंदिर (लेटे हुए हनुमान जी), प्रयागराज
त्रिवेणी संगम के पास विराजे संकटमोचन
श्रेणियां: temple Mandir

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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