मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
तुलसी विवाह बधाई गीत (Tulsi Vivah Badhai Geet Lyrics in Hindi) - Tara Devi Tulsi ji ke bhajan - Bhaktilok
Album - तुलसी विवाह बधाई गीत | Tulsi Vivah Badhai GeetSong - Tulsi Vivah Badhai GeetSinger - Tara DeviMusic - Baljeet ChahalLyrics - Subhash BoseLabel - Ambey Bhakti
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।
तुलसी विवाह बधाई गीत (Tulsi Vivah Badhai Geet Lyrics in Hindi) -
तुलसी रानी का विवाह है सब बधाई गाओ रेहाँ बधाई गाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेतुलसी रानी का विवाह है सब बधाई गाओ रेहाँ बधाई गाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेसजा के लाओ रे सजा के लाओ रेसजा के लाओ रे सजा के लाओ रेतुलसी रानी का विवाह है सब बधाई गाओ रेहाँ बधाई गाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेकार्तिक मास एकादशी शुभ घड़ी आयीकार्तिक मास एकादशी शुभ घड़ी आयीहरी भरी धरती भी मन ही मन हर्षायीहरी भरी धरती भी मन ही मन हर्षायीकार्तिक मास एकादशीशुभ घड़ी आयीहरी भरी धरती भीमन ही मन हर्षायीहरी पटरानी अब यूँ ना शर्माओ ना तुम लहराओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेमंगल कलेश लिए सखी द्वारे पे है डोलेकोरस मंगल कलेश लिए सखी द्वारे पे है डोलेतुलसी देवी तुम्हे नमन हम सब अब ये बोलेतुलसी देवी तुम्हे नमन हम सब अब ये बोलेमंगल कलेश लिएसखी द्वारे पे है डोलेतुलसी देवी तुम्हे नमनहम सब अब ये बोलेसज गए अंगना में सदा दर्श दिखालो दर्श दिखलाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेसजा के लाओ रे सजा के लाओ रेसजा के लाओ रे सजा के लाओ रेतुलसी रानी का विवाह है सब बधाई गाओ रेहाँ बधाई गाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रेशालिग्राम जी को फूलो से सजा के लाओ रे
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "तुलसी विवाह बधाई गीत (Tulsi Vivah Badhai Geet Lyrics in Hindi) - Tara Devi Tulsi ji ke bhajan - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें