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Punjabi Devi Bhajan

तेरा सहारा | Tera Sahara I Devi Bhajan I with Hindi English Lyrics I SONU NAYYAR - BhaktiLok

96 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ देवी का अद्वितीय सहारा

माँ देवी से आशीर्वाद पाने हेतु यह भजन अति महत्वपूर्ण है, इसे श्रद्धा के साथ गाएँ।

तेरा सहारा तेरे बिना सब सुना। हे माँ, हे माँ, तू है सारा जहाँ। तेरे चरणों में है सुख का सोना। हे माँ, हे माँ, ये मन तेरे ही तेरा है। तेरा सहारा, तेरा सहारा। तेरे बिना सब सुना। हे माँ, हे माँ, तू है सारा जहाँ। तेरे चरणों में है सुख का सोना। हे माँ, हे माँ। तेरे बिना मैं बेकार। तेरे बिना मैं बेकार। तेरी भक्ति में ही सुख है सारा। हे माँ, हे माँ, तेरे प्यारे नाम का जप करूँ। तेरे बिना सब सुना। हे माँ, हे माँ, तू है सारा जहाँ।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय देवी की कृपा और सहारों के महत्व को दर्शाता है। पहले ही पंक्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि देवी माँ के बिना जीवन नीरस और सूना होता है। 'तेरे बिना सब सुना' का अर्थ है कि जब तक जीवन में माँ का सहयोग और आशीर्वाद नहीं होता, तब तक जीवन का कोई अर्थ नहीं है। यह भाव न केवल माँ को साक्षात् देवी के रूप में चित्रित करता है, बल्कि यह भी बताता है कि माँ का रहना हमारे जीवन की सुख और शांति का स्रोत है। हर भक्त का मन दुक्ख से भरा होता है, जब वह माँ से दूर होता है, और इस भक्ति में ही उसे अपनी पहचान मिलती है।

भावार्थ में इस भजन में यह भी महत्वपूर्ण है कि जो व्यक्ति देवी की भक्ति और उसके नाम का जप करता है, वह सच्चे सुख की अनुभूति कर सकता है। यहाँ 'तेरा सहारा' शब्द का गहरा अर्थ है, जो भक्ति में मानसिक शांति और सुख का प्रतीक है। दुःख और संकट की घड़ी में, माता ही अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। भजन में 'तेरे चरणों में है सुख का सोना' के माध्यम से यह बताया गया है कि माँ के चरणों में सच्चा सुख बसा होता है। यही कारण है कि भक्त हमेशा माँ के चरणों में स्वीकार्यता की भावना को प्रकट करते हैं।

यह भजन भक्ति मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जो हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति और प्रेम के बिना हम माता की कृपा प्राप्त नहीं कर सकते। यह भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिसमें भक्त साधना करता है और अपने मन को माँ की ओर लगाता है। यहाँ यह भी दर्शाया गया है कि एक भक्त को जीवन में किसी भी कठिनाई का सामना करने के लिए, देवी माँ के सहारे और आशीर्वाद की आवश्यकता होती है। यह भजन एक प्रेरक संदेश देता है कि भक्त हमेशा देवी माँ से जुड़ा रहे, क्योंकि उनका नाम लेने से उसे जीवन में असली आनंद और शांति प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संकेत पौराणिक कथाओं और देवी उपासना के सिद्धांतों से जुड़ा है। देवी माँ का पूजा और उनकी भक्ति हमारी संस्कृतियों में गहरे पैठी हुई है। महाकाली, दुर्गा और सरस्वती सहित विभिन्न देवीओं की उपासना के विभिन्न अर्थ और महत्व होते हैं। जब भक्त 'तेरा सहारा' जैसे भजनों का गायन करते हैं, तब वे अपनी आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। यह भजन रामायण और महाभारत की कथाओं में देवी की महत्ता को भी दर्शाता है, जहाँ देवी संकट के समय अपने भक्तों की सहायता करती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर कई लाभ प्रदान करता है। मानसिक रूप से, यह भक्ति का अभ्यास भक्त को आंतरिक संतोष और शांति प्रदान करता है। शारीरिक रूप से, नियमित पाठ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, देवी माँ का स्मरण भक्त के जीवन में दिव्यता स्थापित करता है और उसके पापों का नाश करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम में करना सबसे उपयुक्त होता है, जब वातावरण शांति और पवित्रता से भरा हो। एक दीपक जलाकर और माता की तस्वीर के सामने बैठकर इस भजन का स्मरण करें। ध्यान में रहकर और श्रद्धापूर्वक गाते हुए, भक्त को मन की एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए ताकि देवी माँ के प्रति उनका समर्पण पूर्ण रूप से प्रकट हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'तेरा सहारा' का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है देवी माँ का बिना जीवन का अधूरापन। यह दर्शाता है कि माँ का सहारा ही जीवन में सुख और शांति का स्रोत है।

इसे गाने का सही समय और तरीका क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को करना सर्वोत्तम है। शांति से बैठकर और दीपक जलाकर इसे गाने से लाभ होता है।

इस भजन को गायन के लाभ क्या हैं?

भजन का गायन मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का कारण बनता है, जो भक्त को देवी माँ के मार्ग की ओर ले जाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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