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Matarani Bhajan

किस नाम से पुकारू | Kis Naam Se Pukaru | Guru Ji Bhajan | Shukrana Guru ji | Taranhar | Jai Guru Ji - BhaktiLok

49 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

किस नाम से पुकारू | किस नाम से पुकारू, मैं परमात्मा तेरा जैसे सागर में मोती, है ये एक, मैंने तुझे पाया। जो भक्ति करे तेरा, उसको तेरा सथ का दान।। तेरा दर, तेरा दर, खोल दे तुझसे मेरा जीवन,। किस नाम से पुकारू, मैं परमात्मा तेरा। क्योंकि तेरा नाम ही है मेरा। किस नाम से पुकारू, मैं परमात्मा तेरा। किस नाम से पुकारू...। करूँ संदूर की बारात, तेरा गुनगान करता। (हक्ती का भाव) तू मेरा तारणहार। सुख और शांति तुझे करे। (शुक्राना) तेरा रूप अमृत से भरा है...। किस नाम से पुकारू...।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय परमात्मा को पुकारने की आवश्यकता और उनकी अनुकम्पा को प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति है। 'किस नाम से पुकारू' की पंक्ति इस विचार को उजागर करती है कि भक्त एक सच्चे स्वरूप की खोज में है, जो कि केवल एक नाम में नहीं बल्कि उनकी पूर्णता में निवास करता है। यहाँ, भक्ति की केंद्रीयता को दर्शाया गया है, जो कि जीवन को उल्लासित कर सकती है। जब भक्त कहते हैं 'तेरा दर खोल दे', तो यह उनकी प्रार्थना है कि भगवान उनके जीवन के सभी कठिनायियों को दूर करें और उन्हें आशीर्वाद दें। यह स्पष्ट करता है कि भक्ति सरलता, सच्चाई, और समर्पण की प्रक्रिया है जिससे भक्त परमात्मा से जुड़ता है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन मन की गहराई से उत्पन्न होने वाली भक्ति और धन्यवाद का प्रतीक है। संगीत की हर धुन में भक्त का अनुभव وخा आता है कि कैसे वे भगवान को पुकारते हैं और उनकी कृपा की आशा करते हैं। 'तेरा रूप अमृत से भरा है' कहने से, भक्त यह ज़ाहिर करते हैं कि वे केवल सतही भक्ति नहीं, बल्कि गहरे संबंध की ओर अग्रसर होना चाहते हैं। इस प्रकार, इस भजन का सार समर्पण में निहित है, जो भगवान के साथ एक गहन संबंध बनाने की कोशिश का परिचायक है। भक्त की भावनाएँ और कठिनाइयाँ यहाँ महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग मुश्किलों से भरा होता है, लेकिन अंततः ये हमें आत्मा के सच्चे अनुभव की ओर ले जाती है।

वैष्णव भक्ति में, इस भजन को गहरी धार्मिक और दार्शनिक अर्थों से बिंधना महत्त्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि व्यक्ति यदि ईश्वर की शरण में आता है तो उसके सभी दुख और संकट दूर हो सकते हैं। इस प्रकार का भक्ति मार्ग अर्थात 'भक्ति मार्ग' समर्पण और सेवा पर आधारित होता है। यहाँ 'तारणहार' का वर्णन यह उजागर करता है कि भगवान ही हमारे दुखों का निवारण कर सकते हैं। भक्त की प्रार्थना का सकारात्मक असर उसे मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में स्थिरता और शांति प्रदान करता है। यह ऐसा मार्ग है जहाँ आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ा जाता है, और जीवन में तात्कालिक सुख की खोज की जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन के पीछे का महत्व प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रंथों में गहराई से व्याप्त है। जैसे कि भागवत पुराण में भगवान की भक्ति के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन मिलता है, इस भजन में भी भक्ति का महत्व बताया गया है। कई पौराणिक कथाएँ, जैसे रामायण और महाभारत में भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण का उल्लेख मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य तब तक अधूरा रहता है जब तक वह अपने ईश्वर के प्रति सच्चे मन से प्रार्थना नहीं करता। इस अद्भुत भक्ति गीत में भक्त की याचना और ईश्वर की कृपा प्राप्ति की प्रक्रिया को दर्शाया गया है, जो श्रद्धा और विश्वास की नींव पर आधारित है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का ध्यान और जप करने से मन को शांति और सुकून मिलता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है। भक्तों ने अनुभव किया है कि नियमित रूप से इसे गाने से आध्यात्मिक जागृति होती है और ईश्वर के प्रति गहरा जुड़ाव होता है। यह आत्मिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर ध्यान केंद्रित कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का ध्यान सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है। इस दौरान सामर्थ्य की भावना को जगाने के लिए दीपक जलाना और पुष्प अर्पित करना महत्वपूर्ण होता है। ध्यान करते समय सुखद स्थिति में बैठें और मन को एकाग्र रखें। ईश्वर की भक्ति करते समय सकारात्मक भाव और निर्मल मन के साथ ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त का अपने ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रार्थना है। यह ईश्वर से अनुकम्पा प्राप्त करने का माध्यम है और जीवन की सभी समस्याओं का समाधान खोजने में सहायता करता है।

भजन का जप करने का सही समय क्या है?

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम है। इस समय विशेष वातावरण की शांति भक्त की प्रार्थना को गहराई प्रदान करती है।

भजन का जप करते समय क्या करना चाहिए?

भजन का जप करते समय दीप जलाना और फूलों की अर्पणा करना अति आवश्यक है ताकि भक्त का हृदय स्पर्शित हो और ध्यान केंद्रित हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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