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Sai Baba

जय साई की बोलिये | Jai Sai Ki Boliye | Jaspal Singh | Sai Baba Aarti | Sai Baba Bhajan | Sai Baba Songs - Bhaktilok

156 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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जय साई की बोलिये | Jai Sai Ki Boliye | Jaspal Singh | Sai Baba Aarti | Sai Baba Bhajan | Sai Baba Songs - Bhaktilok



जय साई की बोलिये | Jai Sai Ki Boliye | Jaspal Singh | Sai Baba Aarti | Sai Baba Bhajan | Sai Baba Songs - Bhaktilok


जय जय साईराम जय जय साईराम

जब भी आखिरी मूंडिये जब भी आखिरी खोलिये

जब भी आंखें मूंदिये जब भी आंखें खोलिये

जय साई की बोलिये जय साई की बोलिये

जय साईं की बोलिये जय साईं की बोलिये

जय जय साई बोलिये जय जय साई बोलिये

जय जय साईं बोलिए जय जय साईं बोलिए

जय जय साईं जय जय साईं जय जय साईं जय जय साईं

जो साई की जय बोले वो आगे बढ़ता जा रहा है

जो साईं की जय बोले वो आगे बढ़ते जाते हैं

जय जय साई दर्शन से साई विजय दिलाते हैं

जय-जय साईं कहने से साईं विजय दिलाते हैं

अपनी भक्ति तोलिये जय साईं की बोलिये

अपनी भक्ति टोलिये जय साईं की बोलिये

जय जय साईं बोलिये जय जय साईं बोलिये

जयकारा मेरे साई का सीधी शिरडी है

जयकारा मेरे साईं का सीधा शिरडी जाता है

सीधी शिरडी जाती है सीधी शिरडी जाती है

सीधा शिरडी जाता है सीधा शिरडी जाता है

भक्तों का जयकारा सुनकर साईं ने उन्हें बुलाया

सुनकर भक्तों का जयकारा साईं उनको बुलाता है

साई उन्हें बुलाता है साई उन्हें बुलाता है

साईं उनको बुलाता है साईं उन्हें बुलाता है

अगर साई के हो तो जय साई की बोलिये

यदि साईं के हो लीजिए तो जय साईं की बोलिए

जय साईं की बोलिए जय साईं की बोलिए

इसके दर पे ना राजा ना रंक कोई राजदंड है

इसके दर पे ना राजा ना रंक कोई राजेंद्र है

यह प्रतीक सर्व धर्म का धर्मराज प्रचारक है

ये प्रतीक है सर्व धर्म का धर्मराज धर्मेंद्र है

जगह जगह मत डोलिये जय साई की बोलिये

जगह-जगह मत डोलिए, जय साईं की बोलिए





🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "जय साई की बोलिये | Jai Sai Ki Boliye | Jaspal Singh | Sai Baba Aarti | Sai Baba Bhajan | Sai Baba Songs - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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