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भक्ति रस काव्य व भजन

मुझे ऐसी लगन लगा दे | Mujhe Aisi Lagan Laga De | Shyam Bhajan by Priyanshu Chatanya Ji - BhaktiLok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण भक्ति का अनमोल गीत

कृष्ण की भक्ति में सच्ची लगन जगाने वाला यह भजन भक्तों के मन को छू लेता है।

मुझे ऐसी लगन लगा दे, मुझे ऐसी लगन लगा दे, कृष्णा, मुझे ऐसी लगन लगा दे। कृष्णा, मेरा तेरा रिश्ता, सबसे अडिग है, कृष्णा, मेरा तेरा रिश्ता, सबसे अडिग है। मैं तेरा भक्त, तेरा सिपाही, मुझे ऐसी लगन लगा दे। याद तेरा ही हर लम्हा, याद तेरा ही हर लम्हा, कृष्णा, मुझे ऐसी लगन लगा दे। तेरे बिना, अधूरी है, मेरी हर खुशबू, कृष्णा, मुझे ऐसी लगन लगा दे। तेरे बिना, अधूरी है, मेरी हर खुशबू, कृष्णा, मुझे ऐसी लगन लगा दे। मैं तेरा भक्त, तेरा सिपाही, मुझे ऐसी लगन लगा दे। भगवान मेरा तारणहार, भगवान मेरा तारणहार, मुझे ऐसी लगन लगा दे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य主题 है, भगवान कृष्ण के प्रति एकाग्रता और लगन की भावना को जगाना। "मुझे ऐसी लगन लगा दे" का अर्थ है कि भक्ति में अडिग संकल्प की आवश्यकता है। यहाँ, भक्त भगवान कृष्ण से आग्रह कर रहा है कि उसे ऐसी समर्पण की भावना प्राप्त हो, जिससे वह हमेशा भगवान की याद में लीन रह सके। भगवान कृष्ण के साथ संबंध को सबसे पवित्र और स्थायी माना गया है, जिससे यह पता चलता है कि भक्त का हर मस्तिष्क की धारा भगवान की ओर केंद्रित हो, यह सोचते हुए कि वह हमेशा भगवान के साए में रहे। इस भजन में भक्त का अपने जीवन में भगवान कृष्ण की मौजूदगी की प्रगाढ़ता भी प्रदर्शित होती है, जैसे वह कहते हैं कि उनका हर लम्हा सिर्फ कृष्णा का है।

भजन में भावनाएँ गहराई तक जाती हैं, जैसे भक्त अपनी जिज्ञासा और इच्छा के साथ, कृष्णा के प्रति प्रेम और भक्ति को दर्शाता है। "याद तेरा ही हर लम्हा" इस पंक्ति से यह अभिव्यक्त होता है कि भक्त का अनुभव एक गहरे व्यक्तिगत संबंध से भरा हुआ है। भक्त के जीवन में भगवान की अनुपस्थिति उसे अधूरा और खाली महसूस कराती है। यह यह दर्शाता है कि भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी आंतरिक अनुभूति होती है, जो जीवन के हर चरण को प्रकाशित करती है। जब भक्त यह कहता है कि "तेरे बिना, अधूरी है, मेरी हर खुशबू," तो यह उनकी भक्ति की गहराई को दिखाता है। यह दर्शाता है कि भक्ति के बिना जीवन वास्तव में अधूरा है।

इस भजन का जो मूल भावार्थ है, वह भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति मार्ग को संदर्भित करता है। भक्त इस भजन के माध्यम से अपने हृदय और आत्मा में कृष्ण के प्रति एक गहरा प्रेम व्यक्त कर रहा है। यह दर्शाता है कि भक्ति मार्ग में चलते हुए व्यक्ति को किस प्रकार एकाग्रता और अनन्य प्रेम की आवश्यकता होती है। "भगवान मेरा तारणहार" इस पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भक्त भगवान से सुरक्षा और मार्गदर्शन की कामना करता है। यह भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है कि भक्त अपने सभी विचारों और भावनाओं को भगवान के प्रति समर्पित करे, जिससे कि उसे मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त हो।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरा है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को सर्वोपरि माना गया है। भगवद गीता में भी भक्ति मार्ग की महत्ता का वर्णन किया गया है। कई पुराणों में भक्ति को सर्वोच्च साधना का रूप कहा गया है। जब भक्त कृष्ण के प्रति इस प्रकार की भक्ति व्यक्त करता है, तो वह केवल अपनी आत्मा का ही पोषण नहीं करता, बल्कि इस संसार के कल्याण की ओर भी कदम बढ़ाता है। धार्मिक ग्रंथों जैसे भागवत पुराण में भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति का संपूर्ण तात्पर्य प्रस्तुत किया गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन करने से आत्मिक शक्ति में वृद्धि होती है। मानसिक शांति और संतोष मिलते हैं, साथ ही ध्यान और ध्यान लगने की क्षमता भी बढ़ती है। भक्तों को यह भजन उनके जीवन में सकारात्मकता और उत्साह की भावना प्रदान करता है। यह भक्ति का एक अद्भुत अनुभव है जो भक्त को आध्यात्मिक ऊँचाइयों की ओर ले जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है, जब मन पूरी तरह से शांत हो। पूजा करते समय एक दीया जलाना और भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा से बिछाने वाले फूल अर्पित करना अच्छा रहता है। भजन का जप करते समय एक शांत और समर्पित मनोवृत्ति रखनी चाहिए, जिससे भावार्थ और अर्थ का पूर्ण अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण को व्यक्त करना है, जो व्यक्ति को कृष्ण के सिम्बल में एकाग्र कर देता है।

पुष्प अर्पित करते समय क्या विशेष ध्यान रखें?

पुष्प अर्पित करते समय मन को पूरी तरह से कृष्ण भाव में रखना चाहिए और एकाग्रता से मूल भाव को समझना चाहिए।

इस भजन का प्रभाव कैसे अधिकतम किया जा सकता है?

इस भजन का अधिकतम प्रभाव उसकी नियमित साधना में है। श्रद्धा और भक्ति से इसे गाना और सही माहौल में जप करना इस प्रभाव को बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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