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Krishna Bhajan

आज तो सुन ही लेना ये भजन || Krishna Bhajan || Shyam Bhajan || Top Krishna Bhajan || 2022 |bhajan - Bhaktilok

49 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

आज तो सुन ही लेना ये भजन कृष्ण कृष्ण कृष्ण कहता हूँ बार बार श्याम श्याम श्याम मेरे प्यारे भैया आज तो सुन ही लेना ये भजन तेरी बंसी की मधुर सुर सुनकर मेरा मन मयूर नाचे गोकुल की गलियों में तेरी लीला प्रेम की बरसा बाचे आज तो सुन ही लेना ये भजन राधा रानी का प्रेम तेरे साथ वृंदावन में खेल खेले मुरली की तान सुनकर सखियाँ सब मिलकर आनंद झेले आज तो सुन ही लेना ये भजन कृष्ण तुम हो सकल सृष्टि के नाथ तुम्हारे बिन नहीं कोई मेरा मन तुम्हारे चरणों में रमा दूजा कोई नहीं कोई आज तो सुन ही लेना ये भजन भक्त वत्सल है तुम्हारा भाव सदा सेवक को पालो द्रौपदी का चीरहरण रोका भक्ति की रक्षा पालो आज तो सुन ही लेना ये भजन

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन "आज तो सुन ही लेना ये भजन" एक सरल किंतु गहन प्रार्थना है जिसमें भक्त श्रीकृष्ण से विनती करता है कि वे उसकी यह भक्ति गीत को सुनें। भजन के मूल संदेश में कृष्ण की दिव्य लीलाओं, उनकी मुरली की मधुर वंशी, और वृंदावन की रासलीलाओं का वर्णन है। जब भक्त कहता है "कृष्ण कृष्ण कृष्ण कहता हूँ बार बार" तो वह नाम जप की परंपरा को दर्शाता है जो हिंदू धर्म में सर्वोच्च साधना माना जाता है। राधा-कृष्ण के प्रेम को संदर्भित करते हुए, भजन मानव हृदय और ईश्वर के बीच के अनंत प्रेम संबंध को दर्शाता है। गोकुल की गलियों में भगवान की बाल लीलाओं का चित्रण करके, यह भजन भक्त के मन में कृष्ण की प्रभु सत्ता के साथ-साथ उनकी मनोहर छवि को भी जागृत करता है।

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहन और भक्ति की परिपक्वता को दर्शाता है। जब भक्त कहता है "तेरी बंसी की मधुर सुर सुनकर मेरा मन मयूर नाचे" तो वह आंतरिक आनंद और रस की अनुभूति व्यक्त करता है जो कृष्ण की दिव्य संगीत से उत्पन्न होती है। यह केवल शारीरिक नृत्य नहीं है, बल्कि आत्मा का कृष्ण के प्रेम में पूर्ण समर्पण है। "राधा रानी का प्रेम तेरे साथ वृंदावन में खेल खेले" - यह पंक्ति राधा के विरह और मिलन दोनों को प्रतिबिंबित करती है, जो भक्त के हृदय में भी परावर्तित होती है। भक्त का अपना अहंकार पूरी तरह विलीन हो जाता है और केवल कृष्ण की स्मृति ही शेष रहती है। इस परिणति में भक्त का व्यक्तिगत सुख-दुःख अप्रासंगिक हो जाता है, और केवल कृष्ण की सेवा ही एकमात्र लक्ष्य बन जाता है।

इस भजन का दार्शनिक सार भक्ति मार्ग की गहनतम अवस्था को प्रकट करता है। "कृष्ण तुम हो सकल सृष्टि के नाथ, तुम्हारे बिन नहीं कोई" - यह पंक्ति अद्वैत दर्शन को भक्ति के माध्यम से व्यक्त करती है। यहाँ कृष्ण को सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान परमात्मा के रूप में स्वीकार किया जाता है। भक्ति मार्ग में यह विश्वास अनिवार्य है कि ईश्वर केवल दूर आकाश में नहीं, बल्कि भक्त के हृदय में निवास करते हैं। "मेरा मन तुम्हारे चरणों में रमा, दूजा कोई नहीं कोई" - इस पंक्ति से भक्त की निष्काम भक्ति का संकेत मिलता है। यह दृष्टिकोण शरणागति और आत्मसमर्पण का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने समस्त अधिकार और प्रत्याशाएं कृष्ण को अर्पित कर देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन वैष्णव धर्म परंपरा में गहरी जड़ें रखता है। श्रीकृष्ण भगवद्गीता के वक्ता हैं और महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्र हैं। गोकुल और वृंदावन की लीलाओं का वर्णन भागवत पुराण में विस्तार से मिलता है। इस भजन में राधा का उल्लेख करना भारतीय काव्य और आध्यात्मिक परंपरा में प्रेम और भक्ति के सर्वोच्च उदाहरण को दर्शाता है। द्रौपदी का चीरहरण रोकने की घटना महाभारत से ली गई है, जो प्रदर्शित करती है कि कृष्ण अपने भक्तों की रक्षा के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। भक्त वत्सल होने की कृष्ण की विशेषता सभी धार्मिक ग्रंथों में प्रशंसित है। यह भजन उस दिव्य प्रेम का अभिव्यक्ति है जो कृष्ण प्रत्येक भक्त के लिए रखते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास, और हृदय की पवित्रता को प्राप्त करता है। कृष्ण नाम का जप स्नायु-तंत्र को शांत करता है और ध्यान-क्षमता बढ़ाता है। भजन के दौरान भक्ति भाव से चेतना के उच्च स्तरों को स्पर्श किया जा सकता है। यह सुख, आनंद, और भय का निवारण करता है, साथ ही नकारात्मक विचारों से मुक्ति दिलाता है। नियमित अभ्यास से मन की एकाग्रता बढ़ती है और जीवन में उद्देश्य का स्पष्ट बोध होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सर्वाधिक प्रभावकारी है। शुद्ध मन और स्वच्छ स्थान में बैठकर आरती करें, दीये जलाएं और तुलसी के पत्तों का प्रयोग करें। भजन गायन के समय घंटी बजाएं और प्रेमभाव से कृष्ण का स्मरण करें। पद्मासन या सुखासन में बैठें, मेरुदंड सीधा रखें। भजन को धीरे, आरोह-अवरोह के साथ गाएं। हृदय में कृष्ण की प्रतिमा को स्थापित करें और प्रेम से उन्हें अर्पित करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन को किसी विशेष समय पर ही गाना चाहिए?

नहीं, परंतु प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में इसका गायन सर्वोत्तम फल देता है। इसे किसी भी समय, विशेषकर कृष्ण जन्माष्टमी और माता राधा के दिनों पर गाया जा सकता है। नियमित अभ्यास से सर्वोच्च लाभ प्राप्त होता है।

इस भजन में 'आज तो सुन ही लेना' का क्या आशय है?

यह भक्त की विनम्र प्रार्थना है। भक्त कृष्ण से कहता है कि आज कम से कम इस भजन को तो सुन लो। यह शरणागति, विनय, और भक्त की नम्रता को दर्शाता है, साथ ही अपेक्षा और प्रेमभाव को व्यक्त करता है।

क्या इस भजन से कृष्ण की कृपा प्राप्त हो सकती है?

हाँ, भक्तिमय मन और सच्ची श्रद्धा से गाए गए इस भजन से निश्चित रूप से कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। भक्ति और नाम जप को भगवद्गीता में सर्वोच्च साधना माना गया है। प्रेमभाव से अर्पित भजन कभी निरर्थक नहीं जाता।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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