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Punjabi Devi Bhajan

पूरब से फूटल ललकी किरिनिया | Purab Se Phootal Lalaki Kiriniya | Jyoti Kumari | Chandani Singh Devigeet Bhakti Song - BhaktiLok

146 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति का उजाला: माँ की आराधना

इस भजन के माध्यम से माँ की असीम कृपा का अनुभव करें और अपने जीवन में सेवा की भावना जागृत करें।

पूरब से फूटल ललकी किरिनिया पूरब से फूटल ललकी किरिनिया तू ही दरसवा, तू ही दरसवा, माई के मन्दिरिया। दुनिया में भक्ति के रंग भरे, बाहों में अनमोल रत्न दुनिया में भक्ति के रंग भरे। तू ही दरसवा, तू ही दरसवा, माई के मन्दिरिया। सुख-समृद्धि का ओहगार तू ए माई! तेरे नाम से बहे पवित्रता का नदिया। तू ही दरसवा, तू ही दरसवा, माई के मन्दिरिया। संसार में तेरा ही प्रभू रूप! कर्मों में भक्ति का हलचल किया। तू ही दरसवा, तू ही दरसवा, माई के मन्दिरिया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ देवी की आराधना है, जो भक्ति में एक अद्वितीय स्थान रखती हैं। 'पूरब से फूटल ललकी किरिनिया' पंक्ति से संकेत मिलता है कि जैसे सूर्योदय में कलियों में नई जिन्दगी का संचार होता है, वैसे ही माँ के आशीर्वाद से मनुष्य का जीवन भी उज्ज्वल और चित्ताकर्षक हो जाता है। भजन में माँ के प्रति भक्ति भाव को स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है। यह वात्सल्य का भाव प्रकट करता है, जो भक्त के हृदय में माँ के प्रति निस्वार्थ प्रेम का परिचायक है। यहाँ 'तू ही दरसवा, तू ही दरसवा, माई के मन्दिरिया' पंक्ति माँ के दर्शन को पाने की उत्कण्ठा को दर्शाती है, जो भक्ति का शुद्धतम रूप है।

इस भजन में श्रद्धा और समर्पण का महत्वपूर्ण भाव निहित है। जब भक्त कहता है कि 'तू ही दरसवा', तब वह माँ से केवल भौतिक सुख की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सम्पूर्णता की कामना करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि माँ की कृपा केवल भक्ति का प्रतिफल नहीं, बल्कि जीवन की सम्पूर्णता का आधार है। भजन का यह भाव भक्त को न केवल मानसिक सशक्तीकरण प्रदान करता है, बल्कि उसके मन में साधना और तप की भावना को भी जागृत करता है। यह भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

इस भजन में शास्त्रों और तात्त्विक दृष्टिकोण का अवलोकन किया जा सकता है। भारतीय दर्शन में माँ शक्ति का ऊँचा स्थान है। वे सृजन और संहार दोनों में समाहित हैं। माँ दुर्गा, काली या महासरस्वती की उपासना में यह भजन जाति-धर्म के बंधनों से मुक्त होकर सच्चे भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह उन पंक्तियों के माध्यम से, जो वहन करती हैं भगवान के अनुकंपा और मार्गदर्शन का, भक्ति मार्ग की गहराइयों में ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में देवी पूजा की महत्वपूर्ण परंपरा को दर्शाता है। देवी भागवत पुराण में माता का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण है और उनके प्रति भक्त का समर्पण जीवन को संपूर्णता प्रदान करता है। माँ की पूजा से मनुष्य के सारे दुख और कष्ट समाप्त होते हैं। रामायण में माँ सीता और महाभारत में देवी दुर्गा की कृपा के प्रसंग हमें यह सिखाते हैं कि माँ की आराधना से केवल तात्कालिक सुख नहीं, अपितु आत्मिक शांति भी प्राप्त होती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, शारीरिक भलाई और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह मन में सकारात्मकता लाता है और तनाव को दूर करता है। भक्ति के द्वारा भक्त जो शांति और आनंद प्राप्त करता है, वह जीवन के हर क्षेत्र में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना के लिए सुबह का समय सर्वोत्तम माना जाता है। भक्त को चाहिए कि वे सुबह जल्दी उठकर स्नान कर शुद्धता का अनुभव करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें, दीप जलाएं और भक्तिभाव से इस भजन का गायन करें। सही मनोदशा में रहते हुए माँ से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में सद्भावना और प्रेम का संचार करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ देवी को समर्पित है, जो शक्ति और भक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।

इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव माँ की उपासना और उनके प्रति समर्पण है, जो भक्त के हृदय में भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

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'पूरब से फूटल ललकी किरिनिया: माँ देवी की भक्ति में लिपटे भाव, आराधना और अद्वितीय प्रेम का अनुभव करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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