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श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में: भजन (Shri Ram Janki Baithe Hain Mere Seene Me Bhajan Lyrics in Hindi ) - Bhakti lok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री राम जानकी का अनुपम भक्ति स्तोत्र

राम-जानकी की गूंज और भक्ति का अनुभव करें। इस भक्तिपूर्ण भजन के साथ मन का विशुद्धिकरण करें।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में: भजन (Shri Ram Janki Baithe Hain Mere Seene Me Bhajan Lyrics in Hindi ) - भक्ति लोक श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में: व्यंग के ऐ विभिषण तना ना सह पाऊं क्यूँ तोड़ी है ये माला तुझे ए लंकापति बतलाऊं मुझमें भी है तुझमें भी है सब में है समझाऊँ ए लंकापति विभीषण ले देख मैं तुझको आज दिखाऊं।। श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में देख लो मेरे दिल के नगीने में।। मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए राम के नाम का मुझ को रस चाहिए सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।। अनमोल कोई भी चीज मेरे काम की नहीं दिखती अगर उसमे छवि सिया राम की नहीं ॥ राम रसिया हूँ मैं राम सुमिरण करूँ सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ सच्चा आनंद है ऐसे जीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥ फाड़ सीना हैं सब को ये दिखला दिय भक्ति में मस्ती है सबको बतला दिय कोई मस्ती ना सागर को मीने में श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥ श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे देख लो मेरे दिल के नगीने में।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय श्री राम और सीता की भक्ति और उनके प्रति असीम श्रद्धा है। भजन का प्रारंभ ही व्यंगपूर्ण संवाद से किया गया है, जिसमें विभीषण से संवाद करते हुए भक्ति और सामंजस्य की बात कही गई है। यह संदेश दिया गया है कि भक्ति के मार्ग में कोई भेदभाव नहीं है। अंतत: राम और जानकी का अपार प्रेम भक्ति को एक अद्वितीय स्थिति में स्थापित करता है। जैसे ही भक्त कहता है 'श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में', वह यह दर्शाता है कि राम और सीता उसके हृदय में सदा विराजमान हैं। यह उनके शाश्वत प्रेम और एकता का संकेत है। यहाँ भक्ति का रस, सुख का अमृत और राम के नाम का महत्व प्राप्त होता है। भक्त कहता है कि उसे अन्य वस्तुओं की अपेक्षा राम का नाम ही सर्वश्रेष्ठ लगता है।

इस भजन में भावाभिव्यक्ति का अनूठा दर्शन होता है। भक्त व्यथित होकर विभीषण से कहता है कि राम का नाम लेते ही संसार की सारी दुख-दर्द मिट जाते हैं। यहाँ भाव यह है कि वास्तविक समृद्धि और आनंद केवल राम के नाम में छिपा होता है। भक्त अपनी भक्ति को आगे बढ़ाते हुए यह कहता है कि उसके जीवन का उद्देश्य राम की सिया की छवि की आराधना है। 'सच्चा आनंद है ऐसे जीने में' का अर्थ है कि भक्ति में जो सुख है, वही असली सुख है। भक्ति का यह रूप भक्त के जीवन में सौंदर्य, नित्यता और शांति का संचार करता है। इस गहन भावना में मनुष्य अपने सारे भौतिक संसाधनों को तुच्छ मान लेता है, क्योंकि राम का नाम ही उसके लिए सर्वोच्च है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अद्भुत चित्रण किया गया है। द्वारका का रुख करते हुए भक्ति, समर्पण, और श्री राम के प्रति अपार प्रेम का एहसास होता है। भक्त चिंतन और समर्पण के माध्यम से भगवान के साथ संबंध बनाता है, जो उसे आत्मिक स्तर पर ऊंचा उठाता है। 'अनमोल कोई भी चीज नहीं' कहकर यह समझाया गया है कि स्थायी सुख केवल भक्ति में ही प्राप्त होता है। राम और सीता का सेवन मानसिक शांति और संतोष का साधन है। अंततः यह भजन भगवान के प्रति सुझाए गए सच्चे प्रेम को दर्शाता है, जो न केवल भक्ति का एक रूप है, बल्कि मानव जीवन की सच्चाई भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भक्ति मार्ग के संदर्भ में यह भजन विशेष महत्व रखता है। रामायण में राम का नाम सदा भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना गया है। जब भक्त 'श्री राम जानकी' का स्मरण करता है, तो वह उसका सच्चा आदर्श सीखता है। राम के जीवन से प्रेरणा लेता है कि जीवन में धर्म और moral values का पालन कैसे किया जाए। यह भजन पहले से ही कई धार्मिक संतों और भक्तों ने गाया है। इससे समाज में भक्ति भाव का विस्तार हुआ है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में संतों और भक्तों की बच्ची, 'राम की भक्ति सबसे सरल मार्ग है' की अवधारणा को इस भजन के माध्यम से दर्शाया गया है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सुकून, और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्त इस गाने के माध्यम से राम और सीता के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हुए आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करते हैं। यह भजन नकारात्मक भावनाओं को समाप्त करता है और भक्त के मन को स्थिरता प्रदान करता है। साथ ही, यह भक्ति में गहरे उतरने का एक साधन है, जिससे भक्ति मार्ग की समझ व अनुभव में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का नियमित पाठ सुबह या संध्या समय करना शुभ माना जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे पूजा स्थल पर स्वच्छता बनाए रखें और दीप जलाकर इस भजन का पाठ करें। भजन के दौरान ध्यान केंद्रित रखें और भगवान के प्रति अपने प्रेम और भक्ति को सच्चे मन से व्यक्त करें। इसे सुनने या गाने से पहले शुद्ध विचार और सकारात्मक मनोदशा बनाना आवश्यक है, ताकि भक्ति का रस सही अर्थ में समर्पित हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

भजन का प्रमुख संदेश है कि राम और जानकी का प्रेम और भक्ति अनंत है, जो भक्त के हृदय में निवास करती है।

भजन का जाप करने से क्या लाभ होता है?

भजन का जाप मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक उन्नति का साधन है, जो भक्त के जीवन को संतुलित और व्यवस्थित करता है।

इस भजन को किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना चाहिए, जब मन शांत और ध्यान में हो।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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