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भक्ति रस काव्य व भजन

चलs बम देवघर नगरिया ( Chal Bam Devghar Nagariya Lyrics in hindi ) -Guddu Halchal Kanwar Geet Bolbam Bhakti Song - BhaktiLok

52 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव भक्ति: बम देवघर का मार्ग

इस भजन के माध्यम से शिव के प्रति असीम प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति होती है।

चलs बम देवघर नगरिया, चलs बम देवघर नगरिया। जहाँ लवलेश चढ़े टकोरि, जहाँ शिवासन करीं जोरि। दे दे तेज, दे दे तेज, डोले जहाँ देवगण। चलs बम देवघर नगरिया। जीवा मापाजना करो, भ्रमण सह वरत थाल सजाओ। अरि चलो चलो, सब चलें बम देवघर नगरिया। जहाँ देदे पुजें शिव, जहाँ शांति मिले मन। चलs बम देवघर नगरिया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय शिव की भक्ति है। इसमें भक्त शिव को उनके निवास स्थान 'देवघर' की ओर चलने का आह्वान करते हैं। 'चलs बम देवघर नगरिया' की पुनरावृत्ति इस बात का परिचायक है कि भक्त का मन कितना उत्साहित है, शिव का स्मरण करके वह अपने आपको शिव के प्रति समर्पित कर देता है। इसमें यह भी दर्शाया गया है कि कैसे शिव को समर्पित स्थानों पर भक्तों के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है, जिससे संपन्नता और शांति प्राप्त होती है। इसे सुनकर सुनने या गाने वाला हर भक्त शिव की कृपा का आह्वान करता है।

इस भजन के भावार्थ में भक्ति और समर्पण की गहराई है। भक्त पहले अपने मन में एक सकारात्मक सोच पैदा करते हैं और शिव की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। जब भक्त 'जीवा मापाजना करो, भ्रमण सह वरत थाल सजाओ' जैसे भाव व्यक्त करते हैं, तो यह दर्शाता है कि वे अपने शरीर और मन को शुद्ध करके शिव के चरणों में जाने को तत्पर हैं। यह भाव भक्त के मन के भीतर एक गहन संतोष और आनंद का संचार करता है, जो उसे शिव की ओर खींचता है।

इस भजन का एक प्रमुख दार्शनिक पहलू भक्तिवाद (Bhakti Marg) है। यह भक्तों को निरंतर शिव के प्रति समर्पित रहने और उनके मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। शिव को सर्वशक्तिमान और सृष्टि के रक्षक के रूप में दर्शाया गया है। भक्त अपनी समस्याओं को शिव के चरणों में रखकर स्थिति को सुधारने की उम्मीद रखते हैं। यह भजन सभी को बताते हुए विश्वास दिलाता है कि जो भी शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा से चलता है, उसे शिव के आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होंगे।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का आधार भारतीय पौराणिक कथाओं में शिव की महिमा है। हिन्दू धर्म में शिव को कल्याणकारी तथा दुष्टों पर विजय पाने वाले साक्षात देवता के रूप में पूजा जाता है। शिव सहायकों के साथ पर्वत की ओर जाते हैं, जहाँ उनकी आराधना की जाती है। यह भजन ऐसी पवित्रता का आह्वान करता है जो भक्तों को उनके शाश्वत स्वरूप से जोड़ता है। महादेव का निवासस्थान 'देवघर' इसे और भी पवित्र बनाता है, जहाँ भक्तों की भक्ति प्रतिफलित होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन भक्त के मानसिक तनाव को कम कर सकता है, उसे शांति और ध्यान की स्थिति में पहुंचा सकता है। भक्ति भावना से भरे इस गीत के साथ जुड़ने से व्यक्ति स्वस्थ और आध्यात्मिक जीवन के मार्ग पर अग्रसर होता है। शिव की कृपा से भक्त सभी प्रकार की परेशानियों से मुक्त होकर आनंद का अनुभव करते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह और शाम के समय करना उचित है, विशेषकर शिवरात्रि या अन्य शिव पूजा के अवसर पर। विधिपूर्वक दीप जलाना और शिवलिंग पर दूध, दही एवं फूल अर्पित करना चाहिए। भजन के पोषण में पूरी श्रद्धा और ध्यान के साथ बैठना चाहिए, जिससे मन एकाग्रता के साथ प्रभु शिव की कृपा की प्राप्ति हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का मुख्य संदेश है?

इस भजन का मुख्य संदेश शिव की भक्ति और उनकी कृपा की प्राप्ति के लिए समर्पण है। भक्तों को शिव के प्रति प्रेम और श्रद्धा से आगे बढ़कर उनकी पूजा करनी चाहिए।

किस समय इस भजन का गायन करना चाहिए?

इस भजन का गायन सुबह और शाम के समय किया जाना चाहिए, खासकर शिवरात्रि पर, जब भक्त अधिकतम भक्तिभाव से शिव का स्मरण करते हैं।

इस भजन का किस प्रकार का प्रभाव होता है?

यह भजन भक्तों को मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है, उनके जीवन में सकारात्मकता लाता है और उनके भीतर भक्ति भावना जागृत करता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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