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देवघर घुमा दी जीजा जी

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

देवघर घुमा दी जीजा जी देवघर घुमा दी जीजा जी कांवर लाद के चल देहु भैया देवघर घुमा दी जीजा जी शिव भोले की पूजा करत हैं गंगाजल ले के आत हैं बोल बम बम करत चलत हैं देवघर घुमा दी जीजा जी कैलाश पर्वत को ध्यान धरत हैं महादेव को मन में बसत हैं कांवर यात्रा में शामिल होत हैं देवघर घुमा दी जीजा जी भाई के हाथ में कांवर भारी देवघर की बेला बिहारी शिव की भक्ति में रंग भारी देवघर घुमा दी जीजा जी गंगाजल भर के ले चलत हैं शिव को अर्पित करत जात हैं हर हर महादेव कहत जात हैं देवघर घुमा दी जीजा जी

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'देवघर घुमा दी जीजा जी' शिव भक्ति का एक प्रसिद्ध काँवर गीत है जो विशेषकर बिहार के क्षेत्र में गाया जाता है। इस गीत का मुख्य विषय भगवान शिव की पूजा और देवघर की पवित्र यात्रा से संबंधित है। 'जीजा जी' (बहु) की संबोधना प्रार्थना को अधिक प्रेमपूर्ण और पारिवारिक बनाती है। गीत में कहा गया है कि भक्त गंगाजल लेकर शिव को समर्पित करने के लिए देवघर की यात्रा करते हैं। 'बोल बम बम' का मंत्र शिव के नाम का जाप है जो भक्त की आत्मा को पवित्र करता है। कांवर लेकर चलना भक्ति और समर्पण का प्रतीक है, जहाँ भक्त शारीरिक कष्ट सहते हुए भी मानसिक शांति खोजते हैं। यह गीत कैलाश पर्वत और महादेव के ध्यान को प्रोत्साहित करता है, जो आत्मिक उन्नति का मार्ग दर्शाता है।

इस भजन का भावार्थ गहरी आध्यात्मिक भक्ति और समर्पण की भावना से जुड़ा है। जब भक्त 'काँवर लाद के चल देहु भैया' कहते हैं, तो वे अपने भीतर के विकार और अज्ञानता को त्यागने का आह्वान करते हैं। गंगाजल का प्रतीकात्मक अर्थ आत्मा की पवित्रता है, जिसे शिव के चरणों में समर्पित करना चाहिए। 'हर हर महादेव' का उच्चारण केवल सामूहिक गीत नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है जो ईश्वर से जुड़ने की चाहना प्रकट करती है। कैलाश पर्वत का ध्यान करना परम सत्य और शांति की खोज का प्रतीक है। भक्त की यात्रा केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है, जहाँ प्रत्येक कदम आत्मनिरीक्षण और मन की शुद्धि का कार्य करता है। यह गीत संदेश देता है कि जीवन की यात्रा में कष्ट और समर्पण से ही परमात्मा का मिलन संभव है।

भक्ति मार्ग की दृष्टि से यह गीत शैव परंपरा का प्रतीक है जहाँ भगवान शिव को सर्वोच्च देवता माना जाता है। शिव की उपासना सृष्टि के विनाश और पुनर्निर्माण के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दर्शाती है। गंगा को शिव के मस्तक से निकला माना जाता है, इसलिए गंगाजल का पूजन शिव पूजन का अभिन्न अंग है। देवघर (बैद्यनाथ धाम) भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहाँ शिव का सर्वाधिक शक्तिशाली रूप प्रकट माना जाता है। काँवर यात्रा का तात्पर्य है आत्मा की निर्भरता को त्यागकर परमात्मा पर पूर्ण विश्वास करना। 'महादेव' का ध्यान करना हृदय में ब्रह्मचेतना को जागृत करता है। यह मार्ग तपस्या, समर्पण और निरंतर आत्मविकास की साधना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह गीत शैव भक्ति परंपरा में गहरी जड़ें रखता है जो वेद, पुराण और शिव संहिता जैसे धर्मग्रंथों में निहित है। शिवपुराण में देवघर (बैद्यनाथ) की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है, जहाँ कहा गया है कि भगवान शिव यहाँ सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं। महाभारत में भी गंगाजल से शिव की पूजा का महत्व बताया गया है। काँवर यात्रा की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, जिसमें भक्त नदी से जल लेकर शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं। रामायण में भी शिव की भक्ति का महत्व प्रतिपादित किया गया है। उपनिषदों में शिव को परब्रह्म माना गया है, जिनका ध्यान ही मुक्ति का साधन है। यह गीत इन सभी परंपराओं का जीवंत प्रतिफलन है जो लोक संस्कृति और वैदिक ज्ञान को जोड़ता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मानसिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास को बढ़ाता है। शारीरिक स्तर पर इसका पाठ श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है और मन की एकाग्रता बढ़ाता है। आत्मिक स्तर पर यह भजन शिव से जुड़ाव स्थापित करता है, जिससे आंतरिक शक्ति और दृढ़ संकल्प का विकास होता है। भक्तों में भय और चिंता का विनाश होता है। यह गीत सामूहिक चेतना को भी जागृत करता है, जिससे सामाजिक सद्भावना और एकता बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को प्रातःकाल और संध्या के समय गाना अधिक फलदायक है। पूजन से पहले घी का दीप जलाएँ और बेलपत्र चढ़ाएँ। शरीर को स्नान कराकर शुद्ध वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। आसन पर बैठते समय ध्यान दें कि मेरुदंड सीधी हो। भजन को धीरे-धीरे, भक्तिभाव से गाएँ। मन को शिव के अमल रूप में स्थिर करें। गंगाजल की पवित्रता को अपनी आत्मा में समाहित करने का भाव रखें। नियमितता और निष्ठा से साधना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

देवघर घुमा दी जीजा जी में 'देवघर' का क्या अर्थ है?

देवघर बिहार में स्थित बैद्यनाथ धाम है, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह स्थान शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। काँवर यात्रा में भक्त गंगाजल लेकर यहाँ पहुँचते हैं और शिव को अर्पित करते हैं।

काँवर यात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?

काँवर यात्रा भक्ति और समर्पण का सर्वोच्च रूप है। इसमें भक्त गंगा से जल लेकर शिव मंदिरों में पहुँचाते हैं, जो आत्मा की पवित्रता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। यह कष्ट सहते हुए भी भगवान की सेवा करने की प्रतिज्ञा दर्शाती है।

इस भजन में 'बोल बम बम' का क्या महत्व है?

'बोल बम बम' भगवान शिव का मंत्र है जो उनके नाम का जाप है। इसका उच्चारण करने से मन की विचलितता दूर होती है, चेतना जागृत होती है और शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शब्द ब्रह्मांड की शक्ति को जागृत करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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